पटना में शोधार्थियों का लोकभवन मार्च, असिस्टेंट प्रोफेसर बहाली समेत कई मांगों को लेकर प्रदर्शन

प्रदर्शन कर रहे शोधार्थियों ने विश्वविद्यालयों में असिस्टेंट प्रोफेसर की नियुक्ति प्रक्रिया को नियमित और पारदर्शी बनाने की मांग की। उनका कहना है कि लंबे समय से नियुक्ति प्रक्रिया को लेकर अभ्यर्थियों और शोधार्थियों के बीच असमंजस की स्थिति बनी हुई है।

Researchers march to Lok Bhavan
Researchers march to Lok Bhavan- फोटो : news4nation

Bihar News :  ‘ऑल Ph.D. होल्डर एंड रिसर्च स्कॉलर एसोसिएशन ऑफ बिहार’ के बैनर तले बड़ी संख्या में जुटे शोधार्थी ने शनिवार को वीर कुंवर सिंह पार्क से लोकभवन की ओर मार्च के लिए निकले। सहायक प्राध्यापक बहाली और अन्य मांगों को लेकर शोधार्थियों ने यह विरोध मार्च निकाला।  इससे पहले शोधार्थी पिछले 19 दिनों से गर्दनीबाग धरना स्थल पर आमरण अनशन पर बैठे थे। लंबे समय से जारी आंदोलन के बाद शनिवार को शोधार्थियों ने अपनी मांगों को सरकार और संबंधित अधिकारियों तक पहुंचाने के लिए लोकभवन मार्च किया।


असिस्टेंट प्रोफेसर नियुक्ति प्रक्रिया नियमित करने की मांग

प्रदर्शन कर रहे शोधार्थियों ने विश्वविद्यालयों में असिस्टेंट प्रोफेसर की नियुक्ति प्रक्रिया को नियमित और पारदर्शी बनाने की मांग की। उनका कहना है कि लंबे समय से नियुक्ति प्रक्रिया को लेकर अभ्यर्थियों और शोधार्थियों के बीच असमंजस की स्थिति बनी हुई है। शोधार्थियों ने नियुक्तियों में डोमिसाइल यानी निवास नीति लागू करने की भी मांग की है। उनका तर्क है कि बिहार के विश्वविद्यालयों में होने वाली नियुक्तियों में राज्य के योग्य अभ्यर्थियों को उचित अवसर मिलना चाहिए।


गेस्ट असिस्टेंट प्रोफेसरों के नियमितीकरण की मांग

आंदोलनकारियों ने वर्षों से विश्वविद्यालयों में कार्यरत गेस्ट असिस्टेंट प्रोफेसरों को सेवा नियमितीकरण का लाभ देने की मांग भी उठाई। शोधार्थियों का कहना है कि लंबे समय से सेवा दे रहे गेस्ट फैकल्टी के भविष्य को लेकर सरकार को स्पष्ट नीति बनानी चाहिए।इसके अलावा प्रदर्शनकारियों ने विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता बनाए रखने की मांग की। शोधार्थियों ने कहा कि उच्च शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए विश्वविद्यालयों की अकादमिक और प्रशासनिक स्वायत्तता का संरक्षण जरूरी है।


19 दिनों से आमरण अनशन

शोधार्थियों के मुताबिक, उनकी मांगों को लेकर गर्दनीबाग धरना स्थल पर पिछले 19 दिनों से आमरण अनशन चल रहा था। इसके बावजूद मांगों पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं होने के बाद आंदोलन को आगे बढ़ाते हुए लोकभवन मार्च का फैसला लिया गया। 


मार्च के दौरान प्रदर्शनकारियों ने अपनी मांगों के समर्थन में नारेबाजी की और सरकार से जल्द से जल्द उनकी मांगों पर सकारात्मक निर्णय लेने की अपील की।


पटना से अनिल की रिपोर्ट।