राजस्व वादों के निपटारे में देरी पर सरकार सख्त; उपमुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा ने दिए समयबद्ध न्याय के निर्देश
बिहार के उपमुख्यमंत्री सह राजस्व मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने बिहारभूमि पोर्टल पर दर्ज होने वाले दाखिल-खारिज, अतिक्रमण और भूमि विवादों के निष्पादन के लिए अब नई और सख्त समय-सीमा (Deadline) निर्धारित कर दी है ।
Patna - : बिहार के उपमुख्यमंत्री सह राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने राजस्व न्यायालयों में लंबित मामलों के निष्पादन में हो रही देरी पर कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने स्पष्ट किया है कि आम नागरिकों को समयबद्ध न्याय दिलाना राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है और आरसीएमएस/बिहारभूमि पोर्टल पर दर्ज मामलों का निष्पादन हर हाल में निर्धारित समय-सीमा के भीतर होना चाहिए । उन्होंने अधिकारियों को चेतावनी दी है कि अनावश्यक विलंब या लापरवाही किसी भी स्तर पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी, क्योंकि न्याय केवल होना ही नहीं चाहिए, बल्कि होता हुआ दिखना भी चाहिए ।
विभागीय प्रधान सचिव सी.के. अनिल ने इस संबंध में सभी समाहर्ताओं को पत्र लिखकर राजस्व न्यायालयों में लंबित वादों की नियमित समीक्षा और प्रभावी पर्यवेक्षण का निर्देश दिया है । पत्र में न्यायिक निष्पक्षता के लिए प्राकृतिक न्याय के दो प्रमुख सिद्धांतों— 'ऑडी अल्टरम पार्टम' (किसी को बिना सुने दंडित न करना) और 'नेमो डेबेट एसे जुडेक्स इन प्रोप्रिया सुआ कौसा' (कोई अपने मामले में न्यायाधीश नहीं हो सकता)—का अक्षरशः पालन करने की हिदायत दी गई है । विभागीय समीक्षा में यह पाया गया है कि अंचल अधिकारी से लेकर अपर समाहर्ता स्तर तक कई वाद समय-सीमा बीतने के बाद भी लंबित हैं
राजस्व विभाग ने विभिन्न प्रकार के वादों के निष्पादन के लिए एक निश्चित समय-सीमा पुनः निर्धारित की है। अंचल अधिकारी के स्तर पर बिना आपत्ति वाले दाखिल-खारिज के लिए 35 दिन और आपत्ति वाले मामलों के लिए 75 दिन का समय तय किया गया है । इसी तरह, लोक भूमि अतिक्रमण वाद के लिए 90 दिन और भू-मापी जैसे कार्यों के लिए मात्र 7 से 11 दिन की समय-सीमा निर्धारित की गई है, ताकि जनता को सरकारी दफ्तरों के अनावश्यक चक्कर न लगाने पड़ें ।
भूमि सुधार उप समाहर्ता (DCLR) और अपर समाहर्ता (ADM) न्यायालयों के लिए भी सख्त मानक तय किए गए हैं। दाखिल-खारिज अपील के लिए 30 दिन, जबकि भूमि विवाद निराकरण, लगान निर्धारण और बटाईदारी जैसे वादों के लिए 90 दिनों की अवधि निर्धारित है । अपर समाहर्ता स्तर पर जमाबंदी रद्दीकरण और दाखिल-खारिज रिवीजन अपील जैसे महत्वपूर्ण मामलों का निपटारा अब अनिवार्य रूप से 30 दिनों के भीतर करना होगा
प्रधान सचिव ने सभी समाहर्ताओं को अपने और अपने अधीनस्थ न्यायालयों के लंबित वादों की सतत निगरानी और नियमित मॉनिटरिंग का आदेश दिया है। इस निर्देश की प्रतिलिपि राज्य के सभी प्रमंडलीय आयुक्तों, भूमि सुधार उप समाहर्ताओं और अंचल अधिकारियों को भेज दी गई है ताकि आदेश का कड़ाई से अनुपालन सुनिश्चित हो सके। सरकार की इस पहल से राजस्व प्रबंधन में पारदर्शिता आने और न्याय व्यवस्था के प्रति आम नागरिकों का भरोसा मजबूत होने की उम्मीद है ।