Bihar News : बिहार में आधुनिक इंजीनियरिंग और बौद्ध कला का दिखेगा अद्भुत संगम, बुद्ध सम्यक दर्शन संग्रहालय का भव्य स्वरूप बनकर हुआ तैयार

Bihar News : बिहार के वैशाली जिले में आधुनिक इंजीनियरिंग और बौद्ध कला का अद्भुत संगम देखने को मिलेगा. बुद्ध सम्यक दर्शन संग्रहालय का भव्य स्वरूप बनकर अब तैयार हो गया है.....पढ़िए आगे

Bihar News : बिहार में आधुनिक इंजीनियरिंग और बौद्ध कला का दि
आधुनिक इंजीनियरिंग और बौद्ध कला संगम - फोटो : SOCIAL MEDIA

PATNA : भवन निर्माण विभाग की ओर से निर्मित बुद्ध सम्यक दर्शन संग्रहालय एवं स्मृति स्तूप में बाह्य प्रदर्श कार्य का अधिष्ठापन किया जा रहा है। परिसर में बौद्ध धर्म से जुड़े प्रतीकों, भगवान बुद्ध की प्रतिमा का अधिष्ठापन, लिच्छवी पिलर, बौद्ध धर्म के अष्टमंगल प्रतीक, तारा की मूर्ति लगाने का कार्य पूर्ण कर लिया गया है। अष्टमंगल प्रतीक शंख, धम्मचक्र, अनंत बंध,  मछली, ध्वज, कलश, छत्र और कमल अधिष्ठापित किए गए हैं। 

बुद्ध की जीवन-यात्रा अब पत्थरों में     

भगवान बुद्ध की मूर्ति भूमिस्पर्श मुद्रा में स्थापित की गई है। इसके अलावा परिसर में भगवान बुद्ध के जीवन की चार प्रमुख घटनाओं को भी खूबसूरत तरीके से दर्शाया गया है। भवन निर्माण विभाग के सचिव कुमार रवि ने बताया कि स्तूप परिसर में बाह्य प्रदर्श अधिष्ठापन का कार्य अंतिम चरण में है। ओडिशा, जयपुर एवं बिहार के कलाकारों द्वारा मूर्तियां एवं भगवान बुद्ध से जुड़े प्रतीक तैयार किए गए हैं।

स्तूप में प्रेयर व्हील  

उन्होंने बताया कि स्मृति स्तूप में प्रेयर व्हील भी लगाया गया है। सचिव ने बताया कि परिसर में बौद्ध प्रतीकों, मूर्तियों एवं भगवान बुद्ध की जीवन-घटनाओं का सुंदर चित्रण लगभग पूर्ण कर लिया गया है। इसके साथ परिसर में सौंदर्यीकरण का कार्य भी हो रहा है। सौंदर्यीकरण का काम अपने अंतिम चरण में है और जल्द ही इसका कार्य पूर्ण कर लिया जाएगा। 

राजस्थान के पत्थर, बुद्ध की प्रेरणा  

 पवित्र पुष्करणी तालाब एवं पौराणिक स्थान के निकट स्थित यह स्तूप पूरी तरह पत्थरों से निर्मित है। 29 जुलाई 2025 को स्मृति स्तूप का उद्घाटन किया गया। यह आधुनिक इंजीनियरिंग और प्राचीन बौद्ध वास्तुकला का एक अद्भुत मिश्रण है। बौद्ध वास्तुकला के अनुसार इस स्तूप में चार तोरणद्वार, शीर्ष पर छत्र, परिक्रमा पथ, चारों दिशाओं में भगवान बुद्ध की मूर्ति तथा रेलिंग युक्त रैम्प का निर्माण किया गया है। स्तूप की कुल ऊंचाई 35 मीटर, आंतरिक व्यास 37.8 मीटर तथा बाहरी व्यास 49.8 मीटर है। इसके निर्माण में कुल 42 हजार 373 बलुआ पत्थरों का प्रयोग किया गया है। स्मृति स्तूप के निर्माण में विशेष रूप से गुलाबी रंग के बलुआ पत्थर राजस्थान के वंशी पहाड़पुर से लाये गये हैं।