Bihar News : 90 साल पुरानी जमाबंदी को संक्षिप्त कार्यवाही से रद्द नहीं कर सकते राजस्व अधिकारी, पटना हाईकोर्ट ने सुनाया ऐतिहासिक फैसला

Bihar News : पटना हाईकोर्ट ने कहा है कि 90 वर्ष से भी अधिक समय से निरंतर चली आ रही किसी जमाबंदी को राजस्व अधिकारी एक संक्षिप्त कार्यवाही के जरिए मनमाने ढंग से रद्द नहीं कर सकते.....पढ़िए आगे

Bihar News : 90 साल पुरानी जमाबंदी को संक्षिप्त कार्यवाही से
जमाबंदी पर फैसला - फोटो : SOCIAL MEDIA

PATNA : पटना हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण निर्णय देते हुए कहा है कि 90 वर्ष से अधिक समय से चली आ रही जमाबंदी को राजस्व अधिकारी संक्षिप्त कार्यवाही के जरिए रद्द नहीं कर सकते। यदि राज्य सरकार को किसी भूमि पर अपना दावा स्थापित करना है ,तो उसे सक्षम सिविल न्यायालय में टाइटल सूट दायर करना होगा। जस्टिस सौरेन्द्र पांडेय की एकलपीठ ने इस सिद्धांत को दोहराते हुए दरभंगा के अपर समाहर्ता द्वारा पारित तीन जमाबंदी रद्दीकरण आदेशों को निरस्त कर दिया।

कोर्ट ने वाणी झा एवं अन्य, विभूति कुमार दास तथा निर्मला देवी की याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए पाया कि विवादित जमाबंदी वर्ष 1927 से चली आ रही थी। इसके बावजूद राजस्व अधिकारियों ने उसे समरी कार्यवाही में रद्द कर दिया, जबकि कानून के अनुसार ऐसी दीर्घकालीन जमाबंदी को केवल सक्षम सिविल न्यायालय के निर्णय के आधार पर ही समाप्त किया जा सकता है। 

याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता विनय कांत मणि त्रिपाठी ने पक्ष रखा। सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने यह भी पाया कि जिन व्यक्तियों के नाम पर जमाबंदी रद्द करने की कार्यवाही शुरू की गई थी, उनका वर्षों पहले निधन हो चुका था। उनके विधिक उत्तराधिकारियों को पक्षकार बनाए बिना और सुनवाई का अवसर दिए बिना आदेश पारित किए गए, जो प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के विपरीत हैं।

कोर्ट ने ऐसे आदेशों को कानून की नजर में शून्य माना। कोर्ट ने यह भी कहा कि मूल सीएस खतियान में भूमि की प्रकृति ‘धानहर’ दर्ज थी, जबकि अधिकारियों ने केवल सर्वे नक्शे में भूमि को पोखर दर्शाए जाने के आधार पर कार्रवाई की। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यदि राज्य भूमि पर अपना अधिकार सिद्ध करना चाहता है ,तो उसे सक्षम सिविल न्यायालय में टाइटल सूट दायर करना होगा।