Bihar Farmers Registration : रिविज़नल सर्वे वाले जिलों ने मारी बाजी, मुजफ्फरपुर पंजीकरण में राज्य भर में अव्वल

Bihar Farmers Registration : डिप्टी सीएम विजय सिन्हा ने कहा की भूमि अभिलेखों की गुणवत्ता का सीधा प्रभाव रजिस्ट्रेशन की गति और कन्वर्जन पर पड़ता है.......पढ़िए आगे

Bihar Farmers Registration : रिविज़नल सर्वे वाले जिलों ने मा
भूमि अभिलेखों का प्रभाव - फोटो : SOCIAL MEDIA

PATNA :  उपमुख्यमंत्री सह मंत्री, राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग विजय कुमार सिन्हा ने कहा कि एग्रीस्टैक के अंतर्गत फार्मर्स रजिस्ट्रेशन की प्रगति का विश्लेषण यह स्पष्ट रूप से दर्शाता है कि भूमि अभिलेखों की गुणवत्ता का सीधा प्रभाव रजिस्ट्रेशन की गति और कन्वर्जन पर पड़ता है। रिविजनल सर्वे (RS) वाले जिलों में अपेक्षाकृत साफ और अद्यतन अभिलेख होने के कारण फार्मर्स रजिस्ट्रेशन तेजी से हो रहा है। उन्होंने कहा कि कैडस्ट्रल सर्वे (CS) वाले जिलों में उत्तराधिकार, संयुक्त जोत और पुराने अभिलेखों से जुड़ी संरचनात्मक चुनौतियाँ हैं, जिन्हें ध्यान में रखते हुए राज्य सरकार विशेष रणनीति के साथ कार्य कर रही है। सीएस जिलों में फार्मर्स रजिस्ट्रेशन को गति देने के लिए अतिरिक्त मानव संसाधन के साथ परिमार्जन एवं दाखिल–खारिज की आसान सुविधा तथा मौजूदा e-KYC के प्रभावी कन्वर्जन पर विशेष बल दिया जा रहा है। यह किसी प्रकार की प्रशासनिक कमजोरी नहीं, बल्कि दशकों पुरानी अभिलेखीय विरासत से जुड़ी स्वाभाविक चुनौती है। उपमुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि राज्य सरकार का लक्ष्य हर किसान को यूनिक किसान आईडी से जोड़कर केंद्र एवं राज्य सरकार की सभी योजनाओं का सीधा और पारदर्शी लाभ सुनिश्चित करना है।आरएस और सीएस दोनों प्रकार के जिलों की परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए लक्ष्य निर्धारण किया जा रहा है, ताकि राज्य स्तर पर एग्रीस्टैक महाअभियान को सफलतापूर्वक आगे बढ़ाया जा सके और राज्य के सभी किसान डिजिटल रूप से सशक्त बनें।  बताते चलें की बिहार में एग्रीस्टैक के तहत संचालित 'फार्मर्स रजिस्ट्रेशन महाअभियान' की प्रगति रिपोर्ट से यह स्पष्ट हुआ है कि राज्य के रिविज़नल सर्वे (RS) वाले जिले, कैडस्ट्रल सर्वे (CS) वाले जिलों के मुकाबले बेहतर प्रदर्शन कर रहे हैं। 09 जनवरी 2026 तक के आंकड़ों के आधार पर, आरएस जिलों में पंजीकरण की गति और रैंकिंग में सुधार की स्थिति अधिक सुदृढ़ पाई गई है।

RS जिलों का वर्चस्व और भूमि अभिलेखों की सुलभता

रिविज़नल सर्वे (RS) से आच्छादित जिलों में फार्मर्स रजिस्ट्रेशन की सफलता का मुख्य कारण वहां के भूमि अभिलेखों की अद्यतन स्थिति और बेहतर गुणवत्ता है। इन जिलों में जमाबंदी अपडेटेड है और उत्तराधिकार से संबंधित विवाद भी कम हैं, जिसके कारण रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया में न्यूनतम बाधाएं आ रही हैं। एग्रीस्टैक प्रणाली के लिए आवश्यक साफ भू-खण्ड और स्पष्ट स्वामित्व जैसे मानक इन जिलों में सहज रूप से उपलब्ध हैं, जिससे मुजफ्फरपुर, वैशाली और भागलपुर जैसे जिलों ने उल्लेखनीय प्रदर्शन किया है।

CS जिलों में पुरानी अभिलेखीय विरासत की चुनौती

इसके विपरीत, कैडस्ट्रल सर्वे (CS) प्रधान जिलों जैसे पूर्वी चंपारण, पटना, जहानाबाद और मुंगेर में पंजीकरण की गति धीमी दर्ज की गई है। इन क्षेत्रों में दशकों पुराने और त्रुटिपूर्ण अभिलेख, संयुक्त जोत, भू-खण्डों का अत्यधिक विखंडन तथा उत्तराधिकार के लंबित मामले एक बड़ी संरचनात्मक बाधा बनकर उभरे हैं। विभाग ने स्पष्ट किया है कि यह धीमी गति प्रशासनिक शिथिलता के कारण नहीं, बल्कि इन जटिल और पुरानी चुनौतियों के कारण है, जो रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया में अतिरिक्त समय ले रही हैं।

रैंकिंग और कन्वर्जन रेट में दिखा स्पष्ट अंतर

08 से 09 जनवरी 2026 के बीच जारी आंकड़ों के अनुसार, कैमूर, भोजपुर और वैशाली जैसे आरएस जिलों की रैंकिंग में बड़ा सुधार देखा गया। वहीं, नालंदा, पटना और जमुई जैसे सीएस जिलों की रैंकिंग में या तो ठहराव आया या गिरावट दर्ज की गई। यह प्रवृत्ति स्पष्ट करती है कि रिविज़नल सर्वे वाले जिलों में क्रियान्वयन के लिए अधिक अनुकूल वातावरण उपलब्ध है, जबकि सीएस जिलों में जोत के सुधार को राज्य सरकार एक बड़ी चुनौती के रूप में देख रही है।

पंजीकरण के आंकड़े: मुजफ्फरपुर रहा राज्य में शीर्ष पर

आंकड़ों की बात करें तो कुल 75,568 पंजीकरण के साथ मुजफ्फरपुर जिला पूरे राज्य में प्रथम स्थान पर काबिज है। इसके बाद वैशाली (60,697), कटिहार (58,611), पूर्णिया (56,030) और भागलपुर (55,314) जैसे आरएस जिले अग्रणी भूमिका निभा रहे हैं। सीएस जिलों में पूर्वी चंपारण ने 51,145 और दरभंगा ने 44,834 पंजीकरण के साथ कुछ बेहतर स्थिति बनाई है, जबकि अरवल और लखीसराय जैसे जिलों में यह संख्या अभी भी काफी कम है।

प्रशासनिक दृष्टिकोण और भविष्य की रणनीति

मौजूदा चुनौतियों को देखते हुए राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने सीएस जिलों में पंजीकरण की गति बढ़ाने के लिए विशेष रणनीति बनाई है। अब इन जिलों में अतिरिक्त मानव संसाधन तैनात किए जाएंगे, जो परिमार्जन और दाखिल-खारिज की प्रक्रिया को तेज करेंगे। साथ ही, ई-केवाईसी के प्रभावी कन्वर्जन पर विशेष बल दिया जाएगा ताकि राज्य स्तर पर समग्र उपलब्धि सुनिश्चित हो सके। विभाग का मानना है कि आरएस जिलों के लिए निर्धारित आक्रामक लक्ष्य यथार्थपरक हैं और वे राज्य की प्रगति में सहायक सिद्ध होंगे।

वंदना की रिपोर्ट