JDU से RJD और अब BJP तक, ऐसा रहा रितु जायसवाल का राजनीतिक सफर

बिहार की राजनीति में एक बार फिर बड़ा राजनीतिक उलटफेर देखने को मिल सकता है। ‘मुखिया दीदी’ के नाम से चर्चित सामाजिक और राजनीतिक कार्यकर्ता रितु जायसवाल 26 मई को बीजेपी में शामिल हो सकती हैं। जदयू से राजनीति शुरू करने वाली रितु जायसवाल ने आरजेडी में मह

JDU से RJD और अब BJP तक, ऐसा रहा रितु जायसवाल का राजनीतिक सफ

बिहार की चर्चित सामाजिक और राजनीतिक कार्यकर्ता रितु जायसवाल एक बार फिर बिहार की राजनीति में चर्चा के केंद्र में हैं। खबर है कि वह 26 मई को भारतीय जनता पार्टी (BJP) का दामन थाम सकती हैं। भाजपा नेता डॉ. संजय सरावगी उन्हें पार्टी की सदस्यता दिला सकते हैं। ऐसे में उनका पूरा राजनीतिक सफर फिर चर्चा में आ गया है, जिसमें जदयू, आरजेडी और अब बीजेपी तक का लंबा राजनीतिक सफर शामिल है।

जदयू से हुई राजनीतिक शुरुआत

रितु जायसवाल का राजनीति में प्रवेश जनता दल यूनाइटेड (JDU) से हुआ था। सीतामढ़ी जिले की सिंहवाहिनी पंचायत की मुखिया रहते हुए उन्होंने गांव में विकास, स्वच्छता, महिला सशक्तीकरण, शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में कई उल्लेखनीय काम किए। उनके कार्यों की चर्चा पूरे बिहार में होने लगी और उन्हें ‘मुखिया दीदी’ के नाम से पहचान मिली।

उनकी लोकप्रियता और सामाजिक सक्रियता को देखते हुए जदयू ने उन्हें सीतामढ़ी महिला सेल का जिला अध्यक्ष बनाया था। पंचायत स्तर पर उनके कामों ने उन्हें बिहार की चर्चित महिला नेताओं में शामिल कर दिया।

2020 में जदयू से दिया इस्तीफा

बिहार विधानसभा चुनाव 2020 से ठीक पहले सितंबर 2020 में रितु जायसवाल ने जदयू से इस्तीफा दे दिया। बताया गया कि वह पार्टी की नीतियों और टिकट वितरण को लेकर असंतुष्ट थीं। इसके बाद उन्होंने जदयू छोड़कर राष्ट्रीय जनता दल (RJD) का दामन थाम लिया।

आरजेडी में बढ़ा राजनीतिक कद

आरजेडी में शामिल होने के बाद पार्टी ने उन्हें महिला आरजेडी की प्रदेश अध्यक्ष जैसी बड़ी जिम्मेदारी सौंपी। इसके बाद वह बिहार में महिला राजनीति का बड़ा चेहरा बनकर उभरीं।

2020 के बिहार विधानसभा चुनाव में उन्होंने परिहार सीट से आरजेडी उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ा। हालांकि वह बेहद कम अंतर से चुनाव हार गईं। इसके बावजूद उनकी राजनीतिक सक्रियता लगातार बनी रही।

इसके बाद 2024 के लोकसभा चुनाव में आरजेडी ने उन्हें शिवहर लोकसभा सीट से उम्मीदवार बनाया। हालांकि वहां भी उन्हें जीत नहीं मिली, लेकिन मिथिलांचल और महिला वोटरों के बीच उनकी पकड़ मजबूत मानी जाती रही।

2025 में टिकट काटने के बाद  आरजेडी से बगावत

2025 के बिहार विधानसभा चुनाव में राजनीतिक समीकरण अचानक बदल गए। आरजेडी ने परिहार सीट से उनका टिकट काट दिया। इससे नाराज होकर रितु जायसवाल ने पार्टी के खिलाफ खुलकर बगावत कर दी और निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनाव मैदान में उतर गईं।

निर्दलीय चुनाव लड़ते हुए उन्होंने करीब 65 हजार वोट हासिल किए, जिसने राजनीतिक दलों का ध्यान खींचा। हालांकि इस कदम के बाद आरजेडी ने पार्टी विरोधी गतिविधियों का आरोप लगाते हुए उन्हें 6 साल के लिए निष्कासित कर दिया।

अब बीजेपी में नई पारी की तैयारी

आरजेडी से अलग होने के बाद से ही उनके अगले राजनीतिक कदम को लेकर अटकलें लगाई जा रही थीं। अब खबर है कि वह 26 मई को भाजपा में शामिल हो सकती हैं। माना जा रहा है कि बीजेपी बिहार में महिला नेतृत्व और पंचायत स्तर पर अपनी पकड़ मजबूत करने की रणनीति के तहत उन्हें पार्टी में शामिल कराने जा रही है।

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि जदयू से शुरू हुआ रितु जायसवाल का राजनीतिक सफर अब बीजेपी तक पहुंच गया है और आने वाले समय में वह बिहार की राजनीति में एक बार फिर बड़ा रोल निभा सकती हैं।