महागठबंधन में सब ठीक नहीं, राजद ने बिहार का हिसाब झारखंड में किया बराबर, राज्यसभा चुनाव में हार का लिया बदला !

मार्च 2026 में बिहार में हुए राज्यसभा चुनाव में राजद उम्मीदवार की हार हुई क्योंकि कांग्रेस के तीन विधायकों ने वोट नहीं किया अब झारखंड में कांग्रेस उम्मीदवार की हार को उसी का बदला माना जा रहा है.

Jharkhand Rajya Sabha Result
Jharkhand Rajya Sabha Result- फोटो : news4nation

Jharkhand Rajya Sabha Election : झारखंड राज्यसभा चुनाव के नतीजों ने महागठबंधन की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है। एनडीए समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार परिमल नाथवानी ने कांग्रेस उम्मीदवार प्रणव झा को हराकर राज्यसभा की सीट जीत ली। चुनाव परिणाम के बाद कांग्रेस के कुछ नेताओं ने आरोप लगाया कि राजद के चार विधायकों ने कांग्रेस प्रत्याशी के पक्ष में मतदान नहीं किया, जिसके कारण यह हार हुई। हालांकि राजद ने इन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है।


दिलचस्प बात यह है कि झारखंड की यह सियासी कहानी बिहार के राज्यसभा चुनाव की याद दिला रही है, जहां मार्च महीने में राजद उम्मीदवार अमरेंद्र धारी सिंह को हार का सामना करना पड़ा था। उस चुनाव में कांग्रेस के तीन विधायक मतदान के दौरान अनुपस्थित रहे थे। वाल्मीकिनगर से सुरेंद्र प्रसाद, मनिहारी से मनोहर प्रसाद सिंह और फारबिसगंज से मनोज बिस्वास वोट डालने नहीं पहुंचे थे। इनके अलावा राजद के ढाका विधायक फैसल रहमान भी मतदान से दूर रहे थे। उस समय राजद खेमे में यह चर्चा तेज थी कि कांग्रेस विधायकों की गैरमौजूदगी ने उसकी राज्यसभा सीट छीन ली।


राजनीतिक गलियारों में सवाल 

अब झारखंड में कांग्रेस उम्मीदवार की हार के बाद राजनीतिक गलियारों में सवाल उठने लगे हैं कि क्या बिहार में मिली हार का हिसाब झारखंड में बराबर हुआ है? हालांकि राजद आधिकारिक तौर पर ऐसे किसी आरोप को खारिज कर रहा है और कह रहा है कि कांग्रेस अपने ही विधायकों का समर्थन सुनिश्चित नहीं कर सकी।

राजद ने दिखाया आईना 

राजद ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर कांग्रेस को आईना दिखाने की कोशिश की। पार्टी ने लिखा कि झारखंड के परिणाम से साफ हो गया है कि कांग्रेस अपने सभी विधायकों का समर्थन हासिल करने में विफल रही। दूसरे दलों पर आरोप लगाने से पहले कांग्रेस को आत्ममंथन करना चाहिए। राजद ने यह भी याद दिलाया कि मार्च में हुए राज्यसभा चुनावों में हरियाणा के पांच, ओडिशा के दो और बिहार के तीन कांग्रेस विधायक भाजपा के पक्ष में क्रॉस वोटिंग या मतदान से दूर रहे थे।


अंदरूनी खींचतान तेज 

ऐसे में झारखंड के नतीजों ने महागठबंधन के भीतर अविश्वास और अंदरूनी खींचतान की चर्चाओं को फिर से हवा दे दी है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि बिहार और झारखंड की इन दो घटनाओं ने सहयोगी दलों के बीच भरोसे पर नए सवाल खड़े कर दिए हैं। अब देखने वाली बात होगी कि कांग्रेस और राजद इस विवाद को यहीं खत्म करते हैं या आने वाले दिनों में यह सियासी तनातनी और बढ़ती है।


हालांकि यह ध्यान देने वाली बात है कि राजद द्वारा बदला लेने का दावा किसी आधिकारिक बयान का हिस्सा नहीं है, बल्कि चुनावी घटनाक्रम और दोनों दलों के आरोप-प्रत्यारोप के आधार पर उठ रहे राजनीतिक सवालों और चर्चाओं का हिस्सा है।