RLSP chief Upendra Kushwaha: उपेंद्र कुशवाहा ने उठाई मांग! पटना को फिर से पाटलिपुत्र कहा जाए, बोधगया मंदिर प्रबंधन में हो बदलाव

रालोमो प्रमुख उपेंद्र कुशवाहा ने पटना का नाम बदलकर पाटलिपुत्र करने और बोधगया मंदिर कानून में बदलाव की मांग की है। जानिए इसके पीछे का इतिहास, राजनीति और धार्मिक दृष्टिकोण।

RLSP chief Upendra Kushwaha: उपेंद्र कुशवाहा ने उठाई मांग! प
RLSP chief Upendra Kushwaha- फोटो : social media

RLSP chief Upendra Kushwaha: राज्यसभा सांसद और रालोमो के राष्ट्रीय अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा ने एक बार फिर से पटना का नाम बदलकर पाटलिपुत्र करने की मांग उठाई है। उन्होंने यह मांग सम्राट अशोक की जयंती के अवसर पर की, जिसे उन्होंने देश के इतिहास का गौरवशाली प्रतीक बताया।

पाटलिपुत्र: ऐतिहासिक और सांस्कृतिक गौरव

पाटलिपुत्र, मौर्य साम्राज्य की राजधानी और सम्राट अशोक जैसे ऐतिहासिक महापुरुषों का केंद्र रहा है। आज का पटना उसी पाटलिपुत्र का आधुनिक स्वरूप माना जाता है। उपेंद्र कुशवाहा का कहना है कि इस नाम परिवर्तन से लोगों को अपने गौरवशाली अतीत से जुड़ने का अवसर मिलेगा।उन्होंने कहा कि आज सम्राट अशोक की जयंती है, यह अवसर है जब हमें अपनी ऐतिहासिक विरासत को सम्मान देना चाहिए। पटना को फिर से पाटलिपुत्र कहने से न केवल उसकी सांस्कृतिक पहचान लौटेगी, बल्कि नई पीढ़ी को भी अपनी जड़ों से जुड़ने की प्रेरणा मिलेगी।"

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बोधगया मंदिर प्रबंधन में बदलाव की मांग: बौद्ध समुदाय को मिले अधिकार

प्रेस कांफ्रेंस के दौरान उपेंद्र कुशवाहा ने बोधगया मंदिर प्रबंधन अधिनियम, 1953 में संशोधन की भी मांग की। उन्होंने कहा कि यह कानून कांग्रेस कार्यकाल में बना था, जिसमें डीएम को मंदिर समिति का अध्यक्ष बनाया गया, और यह पद अनिवार्य रूप से एक हिंदू के लिए सुरक्षित रखा गया।

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बौद्ध धर्मावलंबियों की नाराजगी

एक माह से बौद्ध समुदाय के लोग बोधगया में आंदोलनरत हैं। उनकी मांग है कि महाबोधि मंदिर का प्रशासन बौद्धों के हाथ में हो, क्योंकि यह मंदिर बौद्ध धर्म के सबसे पवित्र स्थलों में से एक है।कुशवाहा ने कहा कि 1953 के कानून में 8 सदस्यीय समिति की व्यवस्था की गई थी, लेकिन उसमें बौद्धों की भूमिका सीमित थी। यह अन्यायपूर्ण है। अब समय आ गया है कि इस व्यवस्था में बदलाव हो और बौद्ध समुदाय को उसका अधिकार मिले।"

राजनीतिक विस्तार: नई सदस्यता से पार्टी को मजबूती

इसी कार्यक्रम में उपेंद्र कुशवाहा ने शाहाबाद के कैमूर निवासी आलोक कुमार सिंह और उनके समर्थकों को पार्टी की सदस्यता दिलाई। उन्होंने कहा कि इनका साथ पार्टी के लिए राजनीतिक रूप से लाभकारी होगा और इससे संगठन को जमीनी स्तर पर मजबूती मिलेगी।

इतिहास, धर्म और राजनीति का संगम

पटना का नाम बदलकर पाटलिपुत्र रखने की मांग हो या बोधगया मंदिर में बौद्धों को अधिकार देने की—दोनों मुद्दे भारतीय समाज की विविधता, इतिहास और धार्मिक चेतना से गहराई से जुड़े हैं। उपेंद्र कुशवाहा की यह पहल इतिहास को पुनर्जीवित करने और धार्मिक समुदायों को उनका हक दिलाने की दिशा में एक प्रयास मानी जा सकती है।