Bihar Politics : ‘रोहिणी आचार्या भी बांधती थीं राखी उनके साथ क्या हुआ...मैं तो मुंहबोली बहन हूं’, तेजस्वी से भाई-बहन के रिश्ते पर रितु जायसवाल ने कसा तंज

Bihar Politics : तेजस्वी पर तीखा पलटवार करते हुए रितु जायसवाल ने कहा की राखी तो रोहिणी आचार्या भी बांधती थीं। अब उसके बाद क्या हुआ, उसे छोड़ दीजिए। मैं तो फिर भी मुंहबोली बहन हूं।

Bihar Politics : ‘रोहिणी आचार्या भी बांधती थीं राखी उनके साथ
मैं तेजस्वी की मुंहबोली बहन...- फोटो : SOCIAL MEDIA

PATNA : राजद की पूर्व नेत्री रितु जायसवाल ने औपचारिक रूप से भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) का दामन थाम लिया है। भाजपा की सदस्यता ग्रहण करने के बाद पत्रकारों से बातचीत करते हुए उन्होंने पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सहित शीर्ष नेतृत्व का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि आज से वह भाजपा परिवार का अभिन्न अंग बन गई हैं। इस दौरान उन्होंने अपने पूर्व के राजनीतिक अनुभवों को साझा करते हुए अपनी पुरानी पार्टी राजद और उसके वर्तमान नेतृत्व पर जमकर निशाना साधा।

 रितु जायसवाल ने कहा कि जब वह पहले एक विशेष विचारधारा से जुड़ी थीं, तब उसी चश्मे से चीजों को देखती थीं। लेकिन निर्दलीय चुनाव लड़ने के दौरान उन्हें समाज के अंतिम पायदान पर खड़े लोगों की वास्तविक पीड़ा और समस्याओं को करीब से समझने का मौका मिला। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नीतियों की जमकर सराहना करते हुए कहा कि पीएम मोदी की सोच अंतिम व्यक्ति तक बिना किसी भ्रष्टाचार के लाभ पहुंचाने की है। उन्होंने किसान सम्मान निधि, आवास योजना और विशेष रूप से 'आयुष्मान भारत' योजना का जिक्र करते हुए कहा कि इन योजनाओं ने गरीबों को एक बड़ी ताकत दी है, जिससे अब वे इलाज के अभाव में दम नहीं तोड़ते।

अपने निर्दलीय चुनाव के अनुभव को साझा करते हुए जायसवाल ने दावा किया कि उन्हें समाज के हर वर्ग का समान समर्थन मिला है। उन्होंने 'टीका' और 'टोपी' का प्रतीकात्मक उदाहरण देते हुए कहा कि दोनों ही वर्गों ने उन्हें लगभग 35-35 हजार वोट दिए। इसके अलावा दलित, पिछड़ा, अति-पिछड़ा और सवर्ण, सभी ने उन्हें बराबर समर्थन दिया। इससे उन्हें यह समझने का मौका मिला कि समाज के हर वर्ग की परेशानी एक जैसी है और वह उसी नेतृत्व के साथ जाना चाहती हैं, जो इन समस्याओं का वास्तविक और सीधा समाधान दे सके।

बातचीत के दौरान  रितु जायसवाल ने नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव के नेतृत्व और कार्यशैली पर करारा तंज कसा। कार्यकर्ताओं की अनदेखी का आरोप लगाते हुए उन्होंने कहा कि जब कोई कार्यकर्ता दूर-दराज से अपने नेता के दरवाजे पर मिलने आता है, तो कम से कम एक बार उससे मुलाकात जरूर करनी चाहिए। उन्होंने स्पष्ट कहा कि कार्यकर्ताओं की बात न सुनने और उन्हें अनसुना करने से वोट बैंक कमजोर होता है और इसी वजह से पार्टी में टूट होती है। परिहार की जनता का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि वहां की जनता की आवाज को राजद में अनसुना कर दिया गया।

अंत में, राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव की कार्यशैली की तारीफ करते हुए  रितु ने वर्तमान राजद नेतृत्व (तेजस्वी यादव) को नसीहत दे डाली। उन्होंने कहा कि लालू जी में वह बात थी कि वे दूर-दराज से आने वाले गरीब या झोला टांगे आम व्यक्ति से भी आसानी से मिल लेते थे और उनसे सीधा संवाद करते थे। ऋतु ने तंज कसते हुए कहा कि वर्तमान नेतृत्व को अपने पिता से अभी बहुत कुछ सीखने की जरूरत है, लेकिन ऐसा लगता है कि उनमें यह सब सीखने की चाहत ही नहीं दिखती। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि उनका मुख्य उद्देश्य केवल चुनाव लड़ना नहीं, बल्कि जनता की सच्ची सेवा करना है। वहीँ जब पत्रकारों ने उनसे तेजस्वी यादव को राखी बांधने और उनके बीच के 'भाई-बहन' के रिश्ते को लेकर सवाल किया, तो  रितु जायसवाल ने तीखा जवाब देते हुए कहा "राखी तो रोहिणी आचार्या भी बांधती थीं। अब उसके बाद क्या हुआ, उसे छोड़ दीजिए। मैं तो फिर भी मुंहबोली बहन हूं, वो तो उनकी अपनी बहन थीं।"

वंदना की रिपोर्ट