Bihar Liquor Ban Policy: बंद बाटे दारू, बाकी सगरो बिकाता, एसपी से बेसी दरोगवा कमाता!... सत्ताधारी दल विधायक का सरकार पर तंज, बिहार में शराबबंदी पर उठे तीखे सवाल
Bihar Liquor Ban Policy: बिहार की सियासत में शराबबंदी को लेकर एक बार फिर हलचल तेज है। इस बार वार विपक्ष ने नहीं, बल्कि सत्ता पक्ष के ही एक विधायक ने अपनी सरकार पर कटाक्ष की जुबानी धार चला दी है।
Bihar Liquor Ban Policy: बिहार की सियासत में एक बार फिर हलचल तेज है। इस बार वार विपक्ष ने नहीं, बल्कि सत्ता पक्ष के ही एक विधायक ने अपनी सरकार पर कटाक्ष की धार चला दी है। भाजपा के लौरिया से विधायक विनय बिहारी ने शराबबंदी कानून की जमीनी हकीकत पर ऐसा बयान दिया कि राजनीतिक गलियारों में कानाफूसी शुरू हो गई।
उनका तंज साफ था “बंद बाटे दारु, बाकी सगरो बिकाता… एसपी से बेसी दरोगवा कमाता… बाकी बताईं ऐ सरकार, बिहार कहां जा ता?” यानी कागज पर शराबबंदी है, मगर हकीकत में हर चौक-चौराहे पर बोतल का कारोबार फल-फूल रहा है।
विधानसभा परिसर में मीडिया से मुखातिब होते हुए विधायक ने कहा कि ऐसा कोई चौकीदार नहीं जिसे पता न हो कि दारू कहां बनती है और कहां बिकती है। उन्होंने इशारों-इशारों में पुलिस महकमे पर भी सवालिया निशान लगा दिया। उनका कहना था कि जनता परेशान है, सरकार को राजस्व की हानि हो रही है, लेकिन “बीच के लोग” मालामाल हो रहे हैं।
वे यहीं नहीं रुके। उन्होंने कहा, शराब मिलल है, तभी तो लोग हिलल है। शादी-बारात का हवाला देते हुए बोले कि 500 लोगों की भीड़ में 100 लोग नशे में मिल जाते हैं। सवाल यह कि अगर बंदी इतनी सख्त है, तो ये सुरूर आखिर आ कहां से रहा है?
बता दे कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की सरकार ने 2016 में पूर्ण शराबबंदी लागू की थी, जिसे सामाजिक सुधार की बड़ी पहल बताया गया था। लेकिन समय-समय पर इस कानून की प्रभावशीलता पर सवाल उठते रहे हैं।
अब जब सत्ता पक्ष के ही विधायक समीक्षा और सख्ती की मांग कर रहे हैं, तो यह महज बयानबाजी नहीं, बल्कि नीति पर अंदरूनी असंतोष का संकेत भी माना जा रहा है।सवाल सीधा है कि क्या शराबबंदी सिर्फ फाइलों में कैद है? या सरकार अब सचमुच सख्त कदम उठाएगी? बिहार की सियासत में यह बहस अभी और गरमाने वाली है।