सफरनामा 2025..बात साल 2025 की बड़ी राजनितिक घटनाओं की, जो बिहार ही नहीं पुरे देश में चर्चाओं में रही..
संघर्ष अभी बाकी है, सवाल अभी ज़िंदा हैं, लेकिन आत्मविश्वास पहले से कहीं मजबूत है। क्योंकि बिहार रुकता नहीं…बिहार चलता है…
News4nation Desk : संघर्ष अभी बाकी है, सवाल अभी ज़िंदा हैं, लेकिन आत्मविश्वास पहले से कहीं मजबूत है। क्योंकि बिहार रुकता नहीं…बिहार चलता है…“हर साल नया होता है…लेकिन कुछ साल सवाल लेकर आते हैं। 2025 भी वैसा ही साल था बिहार के लिए।”News4Nation आपके लिए लेकर आया है एक विशेष कार्यक्रम — सफरनामा 2025..हम बात करेंगे साल 2025 की उस बड़ी राजनितिक घटनाओं की, जिसने बिहार ही नहीं पुरे देश की सियासी गलियारे में चर्चाओं में रही..
सबसे पहले बात विधानसभा चुनाव 2025 की..1= बिहार विधानसभा चुनाव में NDA की हुई अप्रत्याशित जीत..243 में 202 सीटों पर जीत हासिल की..जिसमें बीजेपी सबसे बड़ी पार्टी बनी उसने 89 सीट और जदयू ने 85 सीट जितने में सफ़ल रही..इतना ही नहीं चिराग की पार्टी ने 19 सीटें जीत लीं..जबकि मांझी की पार्टी ने 5 और कुशवाहा की पार्टी ने 4 सीटें जीतीं.. तेजस्वी यादव जो मुख्यमंत्री की दंभ भरते चल रहे थे उनको मात्र 25 सीटों पर संतोष करना पड़ा...और अपने आपको स्वघोषित उपमुख्यमंत्री कहलवाने वाले मुकेश सहनी का सूपड़ा साफ़ हो गया..कांग्रेस की भी दुर्गति कुछ कम नहीं हुई, पिछले चुनाव में 19 सीट जितने वाली कांग्रेस मात्र 6 सीटों पर सिमट गई..चुनाव के बाद नितीश कुमार जहां मुख्यमंत्री बने वहीं सम्राट चौधरी और विजय सिन्हा उपमुख्यमंत्री बनाये गये..विधानसभा अध्यक्ष बीजेपी के पास ही रही गयाजी से लगातार नौवीं बार विधायक बने प्रेम कुमार अध्यक्ष बने,,तो उपाध्यक्ष जदयू के नरेन्द्र नारायण यादव बने...नेता प्रतिपक्ष एक बार फिर तेजस्वी यादव बने..सबसे बड़ी बात जो हुई वो पोर्टफोलियो बंटवारे में हुई जब पहली बार बीजेपी ने नितीश कुमार से गृह मंत्रालय ले लिया और सम्राट चौधरी गृह मंत्री बनाये गये..

2= आरजेडी के चुनाव में भारी हार ने उसके पारिवारिक कलह को भी बाहर ला दिया..लालू यादव को किडनी देने बाली उनकी बेटी रोहिणी आचार्य ने अपने ही परिवार ख़ासकर तेजस्वी पर गंभीर आरोप लगाई..रोहिणी ने कहा,चुनाव में शर्मनाक हार के लिए सिर्फ एक आदमी ज़िम्मेदार है और वी है तेजस्वी के बेहद क़रीबी राज्यसभा सांसद संजय यादव..फिर क्या था संजय यादव की जगह रोहिणी आचार्या को ही घर से बेईज्जत करके निकल दिया गया..

3=इनकार के बावजूद अनुष्का यादव के साथ तेजप्रताप यादव के 12 साल से रिलेशनशिप में रहने का (कथित) इकरार तूल पकड़ता चला गया. विभिन्न मुद्राओं में दोनों की कई तस्वीरें सोशल मीडिया में तेजी से वायरल होने लगी. तेजप्रताप यादव ने अपने 12 साल पुराने प्यार वाले पोस्ट को झुठलाने की कोशिश की, किंतु नाकामयाब रहे. वहीं, परिवार के मुखिया लालू प्रसाद ने भी बिना देर किए निजी जिंदगी में नैतिक मूल्यों की अवहेलना तथा सामाजिक न्याय के सामूहिक संघर्ष के कमजोर होने का वास्ता देते हुए तेजप्रताप को पार्टी और परिवार से निष्कासित कर दिया. हालांकि, लालू यादव की बहू इसे ड्रामा करार देती हैं. उनका कहना है कि ये सब चुनाव की वजह से हो रहा है.

4= 14 दिसंबर 2025 को भारतीय जनता पार्टी ने नितिन नबीन को अपने राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष के रूप में नियुक्त किया। वे बिहार के पूर्व पथ निर्माण मंत्री और पटना के बांकीपुर से पंचवीं बार विधायक हैं, जो पार्टी में युवा नेतृत्व के रूप में पहचाने जाते हैं। यह जिम्मेदारी अब तक जेपी नड्डा के पास थी..इनके चयन ने देश में एक नई बहस छेड़ दी..लोग ये कहने लगे की क्या ऐसा भी हो सकता है, विश्व की सबसे बड़ी पार्टी के सबसे बड़े पद पर एक ऐसा व्यक्ति का चयन हो जाए जो प्रदेश के संगठन में भी कभी बड़े पद पर नहीं रहा हो..नितीन नबीन कार्यकारी अध्यक्ष बनने के बाद पहली बार पटना पहुंचे, जहां भाजपा कार्यकर्ताओं ने एयरपोर्ट से लेकर रोड शो तक उनका भव्य स्वागत किया। पटना में उनकी रैली और रोड शो ने राजनीतिक माहौल में एक अलग तरह का उत्साह का संचार किया। पटना में नितिन नबीन ने पार्टी सांसदों, विधायकों और कार्यकर्ताओं से बैठक कर आगे का एजेंडा साझा किया। उन्होंने विपक्षी नेताओं पर ज़ोरदार हमला बोला, राहुल गांधी-तेजस्वी यादव को पार्ट टाइमर कह दिया। उन्हें पार्टी में संगठन को नई ऊर्जा देने वाला नेता बताया जा रहा है।
5=चुनाव में महाजीत के बाद नीतीश सरकार ने अपने चुनावी वादों को अमलीजामा पहनाना शुरू कर दिए..जिसके तहत 1 कड़ोर नौकरी और रोज़गार को मूर्त रूप देने के लिए सरकार ने अपने काम की शुरुआत की..जिसके लिए तीन नए विभाग बनाए गए.. पहला, कौशल युवा विभाग दूसरा, उच्च शिक्षा विभाग और तीसरा नागरिक उड्डयन विभाग..ये तीनों विभाग बिहार के युवाओं के लिए नौकरी और रोज़गार के नए अवसर सृजित करेगी..
6=बिहार विधानसभा में इस बार सभी की निगाहें मोकामा विधनासभा पर टिक गई थी..कारण था दो बाहुबलियों का चुनावी अखाड़े में दो दो हाथ करना..एक तरफ जदयू से अनंत सिंह थे तो दूसरी तरफ आरजेडी से बाहुबली सूरजभान सिंह की पत्नी बीना देवी थी..इसी चुनावी घमासान के बीच दुलारचंद यादव की हत्या हो जाती है.. दिनदहाड़े हुई इस वारदात ने पूरे इलाके में दहशत फैला दी। और इल्जाम लगता है अनंत सिंह पर..जिसके बाद राजनीतिक और पुलिसिया दबिश के कारन अनंत सिंह रात के अंधेरे में पुलिस के सामने सरेंडर करके जेल चले जाते हैं..मोकामा चुनाव की कमान केंद्रीय मंत्री लालन सिंह संभालते हैं..अंततः अनंत सिंह की चुनाव में भारी मतों से जीत होती है..
7= पिछले दो दशकों तक लालू परिवार और राजद की राजनीतिक गतिविधियों का केंद्र रहा 10 सर्कुलर रोड स्थित राबड़ी आवास..जिसे खाली करने का नोटिस भवन निर्माण विभाग ने 25 नवंबर 2025 को दे दिया। वहीं विभाग ने बिहार विधान परिषद में नेता विपक्ष के लिए हार्डिंग रोड स्थित आवास संख्या-39 आवंटित कर दिया। पिछले 20 साल से रह रहे लालू परिवार के लिए यह नोटिस किसी बड़े झटके से कम नहीं था। जिसके बाद राजद की ओर से दावा किया गया था कि लालू परिवार राबड़ी आवास खाली नहीं करेगा। लेकिन 25 दिसंबर 2025 की आधी रात को 10 सर्कुलर रोड स्थित राबड़ी आवास अचानक खाली होने लगा। आधी रात को राबड़ी आवास से 4 से 5 गाड़ियां बाहर निकलीं इस दौरान आवास में भी हलचल देखने को मिली। आवास को खाली करने की प्रक्रिया तब शुरु हुई जब पटना में ना तो राजद सुप्रीमो लालू यादव हैं और ना ही तेजस्वी यादव मौजूद हैं। राबड़ी देवी अकेले आवास में हैं। इस खबर के सामने आने के बाद सियासी हलचल तेज ही गई। फिलहाल सभी सामना को गोला रोड में रखा गया। जिसके बाद उसे दूसरे जगह ले जाया जाएगा। राबड़ी आवास का बिहार की राजनीति में खास स्थान रहा है। था, जो अब इस आवास के खाली होने के साथ एक लंबे राजनीतिक अध्याय के समाप्त होने की चर्चा तेज हो गई है।
8=SIR यानी Special Intensive Revision — चुनाव आयोग द्वारा बिहार में मतदाता सूची का विशेष और सघन पुनरीक्षण अभियान। विपक्ष का आरोप था कि इस प्रक्रिया में बिना वजह मतदाताओं के नाम हटाए जा रहे हैं, जिससे मताधिकार को नुकसान हो सकता है — इसे “वोट चोरी” जैसा बताया गया। इसी मुद्दे को लेकर 17 अगस्त 2025 राहुल-तेजस्वी ने पुरे बिहार में ‘वोटर अधिकार यात्रा’ की..इस यात्रा का नेतृत्व राहुल गांधी ने किया, जिसमें तेजस्वी यादव और महागठबंधन के कई नेता शामिल रहे। यह यात्रा SIR के खिलाफ विरोध और मतदान के अधिकार को बचाने के मुद्दे पर थी। यात्रा और मार्च का नारा मतदाता के अधिकार की रक्षा और “वोट चोरी” के आरोपों पर आधारित था। नेताओं ने चुनाव आयोग और सत्ताधारी दलों पर आरोप लगाए कि वे SIR प्रक्रिया का इस्तेमाल राजनीतिक फायदे के लिए कर रहे हैं। बिहार विधानसभा चुनाव (2025) से पहले मतदान सूची को लेकर राजनीतिक माहौल गरम हुआ। राहुल-तेजस्वी की यह यात्रा SIR को लोकतांत्रिक अधिकारों पर खतरा बताकर जनता को एकजुट करने की कोशिश थी। 1 सितंबर 2025 को यह यात्रा पटना में बड़े कार्यक्रम और शक्ति प्रदर्शन के साथ समाप्त हुई।
9=साल 2024 से ही मुख्यमंत्री नितीश कुमार के बेटे निशांत कुमार के राजनीति में आने की अटकलें शुरू हो गई थीं। कई बार उन्होंने खुद साफ़ कहा कि उनका इन दिनों राजनीति में सीधे आने का मन नहीं है — लेकिन चर्चा फिर भी बनी रहती है..2025 के चुनाव के दौरान भी यह मुद्दा उठता रहा कि JDU कार्यकर्ताओं और कुछ नेताओं की ओर से निशांत को पार्टी में सक्रिय भूमिका निभाने के लिए कहा जा रहा है। यहाँ तक कि विपक्षी पार्टियों के भी नेताओं ने निशांत के आने पर स्वागत की बात कही..ख़ासकर नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने भी कई मौकों पर ये बातें कही कि निशांत को सक्रीय राजनीती में आना चाहिए..दिसंबर 2025 में चर्चाएँ फिर तेज़ हो गई..जब JDU के कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा ने कहा कि पार्टी और उसके कार्यकर्ता चाहते हैं कि निशांत राजनीति में आएं। इसके बाद ही JDU कार्यालय के बाहर पोस्टरों से भी अटकलें बढ़ीं कि निशांत को पार्टी में शामिल होने का संदेश मिल रहा है। भाजपा के राज्यसभा सांसद भीम सिंह ने तो भविष्य वाणी ही कर दी कि नितीश सीएम पद छोड़ेंगे और निशांत के हाथ में कमान दिया जाएगा.. चर्चाएं जो भी हो लेकिन अभी तक कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई कि निशांत सक्रिय राजनीति में कब या कैसे शामिल होंगे —साल 2025 में सिर्फ चर्चाएँ, संकेत और राजनीतिक दबाव ही दिखाई दिये।
10=2025 चुनाव से पहले नीतीश कुमार ने कुछ साहसिक क़दम उठाए..जिससे हाथ से फिसलती हुई बाजी को अपने पाले में लाया जा सके.. महिलाओं को साधने के लिए महिला रोजगार योजना के तहत 10 हज़ार रुपये की आर्थिक सहायता का ऐलान किया। इस योजना का उद्देश्य घरेलू महिलाओं, स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं और बेरोज़गार युवतियों को सीधा आर्थिक संबल देना था। आम जनता को सीधी राहत देते हुए 125 यूनिट तक बिजली मुफ्त करने का फैसला किया। इससे गरीब, निम्न-मध्यम वर्ग और ग्रामीण परिवारों के मासिक खर्च में तत्काल कमी आई। नीतीश सरकार ने बड़ा लोक-कल्याणकारी फैसला लेते हुए वृद्धा पेंशन की राशि 400 रुपये से बढ़ाकर 1100 रुपये प्रति माह कर दी। इस फैसले से लाखों बुज़ुर्गों को सीधी और स्थायी आर्थिक राहत मिली। ज़मीनी स्तर पर काम कर रहे आशा, आंगनवाड़ी, रसोइया, टोला सेवक सहित संविदा/मानदेय कर्मियों के मानदेय में बढ़ोतरी का फैसला किया। इससे वर्षों से उपेक्षित कर्मियों को आर्थिक राहत और सम्मान मिला। इन्हीं सब फैसलों ने नितीश कुमार को चुनाव में एकतरफ़ा जीत दिला दी..
11=उपेन्द्र कुशवाहा पर सबसे बड़ा आरोप यही रहा कि उन्होंने योग्यता से ज़्यादा रिश्ते को तरजीह दी।कई कार्यकर्ताओं का कहना है कि उपेन्द्र कुशवाहा खुद लंबे समय तक वंशवाद के विरोध की बात करते रहे, ऐसे में बेटे की ताजपोशी दोहरा मापदंड लगी। पार्टी के पुराने और ज़मीनी नेताओं को लगा कि वर्षों की मेहनत के बावजूद उन्हें नजरअंदाज़ कर दिया गया। इससे अंदरूनी असंतोष खुलकर सामने आया। आरोप लगे कि मंत्री पद देने से पहले पार्टी के भीतर पर्याप्त चर्चा/सहमति नहीं ली गई। कुछ नेताओं ने इसे टॉप-डाउन फैसला बताया। 4 विधायकों वाली पार्टी के भीतर गुटबाज़ी की चर्चा तेज़ हुई। ये चर्चा और ज़ोर तब पकड़ ली जब 25 दिसंबर की मटन पार्टी में 3 विधायक नहीं पहुंचे..एक जो उपस्थित थी वो कुशवाहा की पत्नी स्नेहलता थी..इसी दिन तीनों विधायक बीजेपी के कार्यकारी अध्यक्ष नितीन नविन के साथ दिखाई दिए..जिसके बाद से ही सियासी गलियारे में ये चर्चाएं ज़ोर पकड़ ली कि कुशवाहा की पार्टी में सबकुछ ठीक नहीं चल रहा है..आगे अब उपेन्द्र कुशवाहा अपनी पार्टी को कैसे संभालते हैं —यह 2026 में देखना दिलचस्प होगा..