बांकीपुर उपचुनाव: 'बिहारी बाबू' शत्रुघ्न सिन्हा ने किया प्रशांत किशोर का समर्थन, भाजपा के लिए बढ़ सकती है चुनौती

बांकीपुर विधानसभा सीट लंबे समय से भाजपा का मजबूत गढ़ रही है। वर्ष 1995 से इस सीट पर भाजपा का कब्जा है। हाल ही में नितिन नवीन के भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने के बाद राज्यसभा के लिए निर्वाचित होने से यह सीट खाली हुई

Shatrughan Sinha supports Prashant Kishor
Shatrughan Sinha supports Prashant Kishor - फोटो : news4nation

Bankipur Assembly By-election :  बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव में जन सुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर को बड़ा राजनीतिक समर्थन मिला है। तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के सांसद और बॉलीवुड अभिनेता शत्रुघ्न सिन्हा ने सोशल मीडिया पर खुलकर प्रशांत किशोर के पक्ष में अपील की है। उनके इस बयान ने चुनावी मुकाबले को नया राजनीतिक आयाम दे दिया है, क्योंकि बांकीपुर सीट पर कायस्थ मतदाताओं का प्रभाव माना जाता है और शत्रुघ्न सिन्हा स्वयं इसी समाज से आते हैं।


सोशल मीडिया पर किए गए अपने पोस्ट में शत्रुघ्न सिन्हा ने लिखा कि "बिहार की राजनीति में बड़ा धमाका हो गया है। सबसे योग्य, दूरदर्शी, विलक्षण बुद्धिजीवी, जन-जन के नेता और सबसे लोकप्रिय व्यक्तित्व प्रशांत किशोर ने चुनावी मैदान में उतरकर बिहार ही नहीं, पूरे देश की राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी है।" उन्होंने युवाओं और आम जनता से जाति, धर्म और दलगत सीमाओं से ऊपर उठकर प्रशांत किशोर का समर्थन करने की अपील भी की।


भाजपा के लिए क्यों अहम 

बांकीपुर विधानसभा सीट लंबे समय से भाजपा का मजबूत गढ़ रही है। वर्ष 1995 से इस सीट पर भाजपा का कब्जा है। हाल ही में नितिन नवीन के भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने के बाद राज्यसभा के लिए निर्वाचित होने से यह सीट खाली हुई और अब यहां उपचुनाव कराया जा रहा है। मतदान 30 जुलाई को होना है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि शत्रुघ्न सिन्हा का समर्थन सीधे तौर पर चुनावी नतीजे तय नहीं करेगा, लेकिन इसका प्रतीकात्मक और सामाजिक प्रभाव जरूर पड़ सकता है। इसकी सबसे बड़ी वजह यह है कि शत्रुघ्न सिन्हा बिहार की राजनीति का बड़ा चेहरा रहे हैं और पटना से सांसद भी रह चुके हैं। साथ ही वे कायस्थ समाज के प्रमुख नेताओं में गिने जाते हैं। बांकीपुर में भी कायस्थ मतदाताओं की अच्छी-खासी संख्या है।


दिलचस्प बात यह है कि भाजपा के पूर्व विधायक नितिन नवीन और शत्रुघ्न सिन्हा दोनों कायस्थ समाज से आते हैं। ऐसे में यदि कायस्थ मतदाताओं का एक हिस्सा प्रशांत किशोर की ओर आकर्षित होता है तो भाजपा के परंपरागत वोट बैंक में सेंध लग सकती है। हालांकि भाजपा का संगठन इस सीट पर बेहद मजबूत माना जाता है और पार्टी इसे अपनी प्रतिष्ठा की लड़ाई के रूप में देख रही है।


त्रिकोणीय मुकाबले की ओर बढ़ रहा चुनाव

इस बार बांकीपुर उपचुनाव केवल भाजपा और विपक्ष के बीच सीधी लड़ाई नहीं माना जा रहा। जन सुराज प्रमुख प्रशांत किशोर के मैदान में उतरने से मुकाबला त्रिकोणीय होता दिख रहा है। अब तक प्रमुख दलों ने अपने उम्मीदवारों का ऐलान कर दिया है। भाजपा ने अभी तक किसी को उम्मीदवार नहीं बनाया है। जन सुराज ने स्वयं प्रशांत किशोर को चुनाव मैदान में उतारा है, जबकि राष्ट्रीय जनता दल (राजद) ने रेखा गुप्ता को अपना प्रत्याशी घोषित किया है। कांग्रेस और वाम दल महागठबंधन के तहत राजद उम्मीदवार का समर्थन कर रहे हैं।


क्या बदलेंगे चुनावी समीकरण?

प्रशांत किशोर इस चुनाव को केवल एक विधानसभा सीट का चुनाव नहीं, बल्कि अपनी राजनीतिक स्वीकार्यता की परीक्षा के रूप में लड़ रहे हैं। दूसरी ओर भाजपा अपने सबसे मजबूत शहरी गढ़ को बचाने की चुनौती का सामना कर रही है। ऐसे में शत्रुघ्न सिन्हा जैसे वरिष्ठ नेता का सार्वजनिक समर्थन जन सुराज के लिए मनोवैज्ञानिक बढ़त देने वाला माना जा रहा है।


हालांकि चुनावी नतीजे केवल समर्थन से तय नहीं होंगे। भाजपा की मजबूत संगठनात्मक पकड़, एनडीए का परंपरागत वोट बैंक, महागठबंधन की रणनीति और प्रशांत किशोर की व्यक्तिगत छवि—इन सभी कारकों का असर 30 जुलाई को होने वाले मतदान में देखने को मिलेगा। ऐसे में बांकीपुर उपचुनाव अब केवल एक सीट का चुनाव नहीं, बल्कि बिहार की बदलती राजनीति का अहम संकेतक बनता जा रहा है।