Singham News: पूर्व IPS शिवदीप लांडे हुए भावुक, पत्नी गौरी के लिए लिखा दिल छू लेने वाला पोस्ट, कहा- 'तुम्हारे मासूम चेहरे को देख नहीं रुक रहे आंसू'

Singham News: पूर्व आईपीएस शिवदीप लांडे ने अपनी पत्नी गौरी के लिए मार्मिक पोस्ट लिखा है. जिसमें उन्होंने पत्नी के जज्बे की जमकर सराहना की है......पढ़िए आगे

Singham News: पूर्व IPS शिवदीप लांडे हुए भावुक, पत्नी गौरी क
सिंघम का मार्मिक पोस्ट - फोटो : SOCIAL MEDIA

N4N DESK : शिवदीप वामनराव लांडे, कड़क आईपीएस, सिंघम, सुपरकॉप, अपराध का दुश्मन, निरीहों का मसीहा और न जाने क्या-क्या। कभी पटना के एसपी और कोसी रेंज के डीआईजी रहे शिवदीप वामन राव लांडे ने अब इस्तीफा दे दिया हैं। लेकिन इस आईपीएस के कड़क चेहरे के पीछे एक नरम दिल वाला लेखक भी बसता है। वो लेखक जो कभी पत्नी ममता के लिए एक से एक बातें लिखता है, वो लेकर जो बेटी अराहा के लिए कविताएं गढ़ता है। शिवदीप लांडे ने एक किताब भी लिखी है... वूमन बिहाइंड द लॉयन। 

एक बार फिर शिवदीप लांडे ने एक भावुक करनेवाला पोस्ट किया है। जिसमें उन्होंने अपनी पत्नी गौरी को संबोधित किया है। लिखा की जीवन में बहुत सी कठिनाइयाँ आईं, विपत्तियों ने घेरा और बहुत विपरीत परिस्थितियां भी मुझे कभी विचलित नही कर पायी - मैं सदैव अटल रहा। किन्तु तुम्हारे एक निर्णय... सिर्फ एक निर्णय ने मुझे झकझोर कर रख दिया। अपने पिता को नया जीवन देने के लिए जब तुमने अपनी किडनी दान करने का निर्णय/संकल्प लिया। लांडे ने लिखा की तुम्हारा अपने पिता के प्रति निःस्वार्थ समर्पण, त्याग एवं जिद के आगे मैं नतमस्तक हूँ। नतमस्तक ।

लांडे आगे लिखते हैं की पिछले तीन महीनों में...ऑपरेशन के लिए जरूरी दर्जनों मेडिकल टेस्ट, हज़ारों कागजों की भूलभुलैया, कानूनी जंजीरें, सब कुछ तुमने अकेले संभाला। मैं बस मूक दर्शक बन तुम्हें निहारता रहा, और बस ये सोचता रहा कि भगवान बेटी को इंसान के जीवन में क्यों भेजता है? शायद आज इस प्रश्न का उत्तर मुझे मिल गया वह यह कि शायद माँ का साथ इंसान के जीवन में एक पड़ाव तक ही रहता है और पूरी उम्र उस माँ की कमी को ईश्वर एक बेटी के रूप में पूरा करता है। पूरी उम्र।

लांडे लिखते हैं की आज मुंबई के उस आईसीयू में... किडनी ट्रांसप्लांट के बाद... जब मैं तुम्हारे पास बैठा तुम्हारे मासूम चेहरे को देख रहा हूँ तो आँखों से बहता पानी... रुकने का नाम ही नहीं लेता। क्यों? क्यों नहीं रुकते ये आँसू? आज समझ आया। रिश्तेदारों में भाई छोड़ दे, बेटा पीठ दिखा दे, बहन मुड़ जाए, यहाँ तक कि पत्नी भी... जीवन-मृत्यु के इस युद्धक्षेत्र में साथ छोड़ दें। लेकिन बेटी? वो निस्वार्थ खड़ी रहती है। अपना जीवन दाँव पर लगाकर भी। तुम्हारी आँखें बंद हैं, गौरी। लेकिन तुम्हारा प्यार तुम्हारा त्याग हर पिता को सिखाता है कि बेटी ईश्वर का दिया हुआ सबसे बड़ा आशीर्वाद हैं।