Bihar Budget 2026: ₹3.47 लाख करोड़ के बजट के बीच याद आए सुशील मोदी, 11 बार बजट पेश कर बनाया रिकॉर्ड, कई मिसाल किये कायम

Bihar Budget 2026: ₹3.47 लाख करोड़ के बजट के बीच याद आए सुशी

PATNA : बिहार विधानसभा में मंगलवार को वित्तीय वर्ष 2026-27 का ऐतिहासिक बजट पेश किया गया। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार का यह पहला बजट वित्त मंत्री बिजेंद्र प्रसाद यादव ने सदन के पटल पर रखा। इस बार बजट का कुल आकार ₹3,47,589 करोड़ रहा। इस महत्वपूर्ण अवसर पर बिहार की बदलती अर्थव्यवस्था और बजट के इतिहास में पूर्व उपमुख्यमंत्री दिवंगत सुशील कुमार मोदी के अविस्मरणीय योगदान की चर्चा भी जोरों पर रही।

सुशील मोदी 11 बार बजट पेश करने का 'अजेय' रिकॉर्ड

बिहार के वित्तीय प्रबंधन में सुशील कुमार मोदी का नाम स्वर्ण अक्षरों में दर्ज है। उनके नाम राज्य में सबसे अधिक 11 बार बजट पेश करने का रिकॉर्ड है। सन 2005 से 2020 तक, जब-जब बिहार में एनडीए की सरकार रही, वित्त विभाग की कमान मुख्य रूप से उन्हीं के हाथों में रही। उन्होंने पहली बार सन 2006 में बजट पेश किया था और तब से लेकर 2013 तक लगातार आठ बार सदन में बजट भाषण पढ़ा।

देश का पहला 'हरित बजट' और आर्थिक सुधार

सुशील कुमार मोदी केवल संख्या बल के लिए नहीं, बल्कि अपने नवाचारों (Innovations) के लिए भी जाने जाते हैं। देश में पहली बार 'हरित बजट' (Green Budget) पेश करने का गौरव भी उनके ही नाम है। विशेषज्ञों का मानना है कि लालू-राबड़ी शासनकाल के बाद बिहार की चरमराई अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने में मोदी की अहम भूमिका थी। उन्होंने न केवल पूर्ण बजट पेश करने की स्वस्थ परंपरा शुरू की, बल्कि वित्तीय अनुशासन के जरिए बिहार के बजट के आकार को भी नई ऊंचाइयों तक पहुँचाया।

नीतीश की योजनाओं को मिला 'वित्तीय आधार'

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की कई महत्वाकांक्षी योजनाएं, जैसे 'सात निश्चय', तभी धरातल पर उतर सकीं जब सुशील मोदी ने उनके लिए एक सुनियोजित वित्तीय ढांचा तैयार किया। 2017 में जब नीतीश कुमार पुनः एनडीए में शामिल हुए, तब मोदी ने फिर से उपमुख्यमंत्री और वित्त मंत्री की जिम्मेदारी संभाली और 2020 तक तीन और बजट पेश कर अपने कुल बजट की संख्या 11 तक पहुँचा दी।

बजट का विस्तार: 2005 से 2026 तक का सफर

मंगलवार को पेश किया गया ₹3.47 लाख करोड़ का बजट इस बात का गवाह है कि बिहार की अर्थव्यवस्था अब बड़े निवेश के लिए तैयार है। जहाँ 2005-06 में बजट का आकार बेहद सीमित था, वहीं सुशील मोदी द्वारा रखी गई 'वित्तीय नींव' पर आज बिहार एक विशाल आर्थिक इमारत खड़ी कर रहा है। भले ही आज वे हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन बिहार के हर बजट में उनके द्वारा किए गए सुधारों की झलक स्पष्ट दिखाई देती है। 

वंदना की रिपोर्ट