बिहार में मिठास की वापसी! नीतीश कुमार के फरमान पर सकरी-रैयाम चीनी मिलें फिर होंगी आबाद, 2401 गांव को किया गया आरक्षित
Bihar news:वर्षों से बंद पड़ी सकरी और रैयाम चीनी मिलों को दोबारा चालू कराने की तैयारी ने रफ्तार पकड़ ली है।
Bihar news: बिहार सरकार ने उद्योग और रोजगार को लेकर बड़ा फैसला किया है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के निर्देश पर वर्षों से बंद पड़ी सकरी और रैयाम चीनी मिलों को दोबारा चालू कराने की तैयारी ने रफ्तार पकड़ ली है। गन्ना उद्योग विभाग ने दरभंगा और मधुबनी जिलों के कुल 2401 गांवों को आरक्षित कर दिया है, ताकि दोनों मिलों को नियमित और पर्याप्त गन्ना आपूर्ति सुनिश्चित हो सके। इसे “समृद्ध उद्योग-सशक्त बिहार” की रणनीति का अहम पड़ाव माना जा रहा है।
राज्य सरकार के सात निश्चय-3 एजेंडा के तहत बंद उद्योगों को पुनर्जीवित करने और नए निवेश को आमंत्रित करने की नीति पर अमल तेज़ है। इसी सिलसिले में मुख्य सचिव की अध्यक्षता में एक उच्चस्तरीय समिति गठित की गई है, जो संचालन, वित्तीय संरचना और उत्पादन लक्ष्य पर निगरानी रखेगी। सूत्रों के मुताबिक, सकरी (मधुबनी) और रैयाम (दरभंगा) चीनी मिलों का संचालन सहकारिता विभाग के माध्यम से किया जाएगाताकि किसानों की भागीदारी और जवाबदेही दोनों मजबूत हों।
आंकड़ों की ज़ुबान में तस्वीर और साफ है। सकरी चीनी मिल के लिए मधुबनी जिले के 686 और दरभंगा जिले के 697 गांवों को आरक्षित किया गया है। वहीं रैयाम चीनी मिल को मधुबनी के 438 और दरभंगा के 580 गांवों से गन्ना मिलेगा। अंध्राथाढ़ी, बबुरही, झंझारपुर, फुलपरास, राजनगर से लेकर बहादुरपुर, हायाघाट, जाले, सिंघवारा और बिस्फी, बेनीपट्टी, जयनगर जैसे प्रखंड इस औद्योगिक पुनरुत्थान की धुरी बनेंगे।
सियासी मायने भी कम अहम नहीं। लंबे अरसे से ठप पड़ी मिलों की चिमनियों से फिर धुआं उठना केवल उत्पादन का संकेत नहीं होगा, बल्कि क्षेत्रीय रोज़गार, परिवहन, कोल्ड-चेन और सहायक उद्योगों में नई जान फूंकने का पैगाम भी होगा। किसान संगठनों का मानना है कि तयशुदा आरक्षण से गन्ना खरीद की गारंटी बनेगी और भुगतान चक्र में पारदर्शिता आएगी।
अब निगाहें क्रियान्वयन पर हैं क्या तैयारी जमीनी हक़ीकत में बदलेगी? अगर योजना मुकम्मल हुई, तो मिथिला की धरती पर उद्योग की मिठास फिर लौट सकती है।