Bihar Fiscal Crisis: स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड की राशि घटाने पर बिफरे तेजस्वी का सम्राट सरकार पर करारा वार,बोले- गंभीर आर्थिक संकट की ओर सरकार

Bihar Fiscal Crisis:बिहार की सियासत में अब राजकोषीय सेहत और बढ़ते कर्ज को लेकर घमासान तेज होता दिखाई दे रहा है। ...

Tejashwi Attacks Bihar Govt Over Debt Fiscal Deficit and Fin
तेजस्वी का सम्राट सरकार पर करारा वार- फोटो : social Media

Bihar Fiscal Crisis:बिहार की सियासत में अब राजकोषीय सेहत और बढ़ते कर्ज को लेकर घमासान तेज होता दिखाई दे रहा है। नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए एनडीए सरकार पर निशाना साधते हुए बिहार की आर्थिक स्थिति को बेहद चिंताजनक बताया है। उन्होंने दावा किया कि राज्य पर कर्ज का बोझ लगातार बढ़ रहा है और सरकार के पास कर्मचारियों, पेंशनधारकों, ठेकेदारों और विकास योजनाओं के भुगतान के लिए पर्याप्त राशि नहीं है।

तेजस्वी यादव ने आरोप लगाया कि बिहार की राजकोषीय स्थिति बेहद खराब हो चुकी है और कुल सार्वजनिक ऋण में चार गुना से अधिक वृद्धि हुई है। उनके मुताबिक, राज्य को गंभीर आर्थिक संकट की तरफ धकेला जा रहा है। हालांकि, ये दावे नेता प्रतिपक्ष के राजनीतिक आरोप हैं; इनके अलग-अलग आंकड़ों की स्वतंत्र पुष्टि जरूरी है।

खजाना खाली, फिर भी बढ़ता जा रहा कर्ज

तेजस्वी यादव ने अपने पोस्ट में दावा किया कि राज्य में वित्तीय दबाव इतना बढ़ गया है कि सरकारी कर्मचारियों और पेंशनधारकों से जुड़े भुगतान, सामाजिक सुरक्षा पेंशन, ठेकेदारों के बकाये और कई विकासात्मक कार्यों के लिए समय पर राशि उपलब्ध नहीं हो पा रही है।

स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड की राशि घटाई गई

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि छात्रों को मिलने वाली सुविधाओं पर भी असर पड़ा है। तेजस्वी के मुताबिक, स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड की राशि घटाई गई है और छात्रवृत्ति खत्म की जा रही है। इन आरोपों पर सरकार का आधिकारिक पक्ष इस बयान में सामने नहीं आया है।



5.8% राजकोषीय घाटे का दावा

तेजस्वी यादव ने दावा किया कि वित्तीय वर्ष 2025-26 में बिहार का राजकोषीय घाटा GSDP का 5.8 फीसदी रहा, जिसे उन्होंने प्रमुख राज्यों में सबसे अधिक बताया। उन्होंने कहा कि भारी राजकोषीय घाटे के साथ राज्य पर बढ़ता कर्ज गंभीर चिंता का विषय है।उनका आरोप है कि राज्य की अपनी राजस्व प्राप्तियां खर्च के अनुपात में पर्याप्त नहीं हैं। उन्होंने सरकार से राजस्व संग्रह बढ़ाने, बजट प्रबंधन सुधारने और राजकोषीय घाटे को नियंत्रित करने के लिए दीर्घकालिक रणनीति बताने की मांग की।

‘सरकार के पास आर्थिक प्रबंधन की ठोस योजना नहीं’

तेजस्वी यादव ने सरकार की आर्थिक नीतियों पर सवाल उठाते हुए कहा कि राजस्व सृजन और संग्रहण बढ़ाने के साथ-साथ ऋण और खर्च को नियंत्रित करने के लिए कोई ठोस दीर्घकालिक योजना नजर नहीं आती।उन्होंने आरोप लगाया कि पिछले दो वर्षों में सरकार ने रिकॉर्ड कर्ज लिया, लेकिन इसके बावजूद राजकीय कोष खाली होने की स्थिति बताई जा रही है। इसी सवाल को उठाते हुए उन्होंने पूछा कि आखिर बिहार का पैसा जा कहां रहा है?

NDA सरकार पर भ्रष्टाचार के भी आरोप

नेता प्रतिपक्ष ने आर्थिक मुद्दे को सीधे भ्रष्टाचार से जोड़ते हुए एनडीए सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार भ्रष्टाचार और कथित संगठित लूट के रिकॉर्ड बना रही है और इसका खामियाजा बिहार की जनता को भुगतना पड़ रहा है।तेजस्वी ने सरकार पर तीखी राजनीतिक भाषा में हमला बोलते हुए कहा कि राज्य को ऐसे अंधकार की तरफ ले जाया जा रहा है, जिससे बिहार के लोगों का वर्तमान और भविष्य दोनों प्रभावित हो सकते हैं।हालांकि, सरकार की वित्तीय स्थिति का वास्तविक आकलन केवल राजनीतिक बयानों से नहीं, बल्कि बजट दस्तावेजों, सार्वजनिक ऋण, राजस्व प्राप्तियों, राजकोषीय घाटे और वास्तविक व्यय के आधिकारिक आंकड़ों के आधार पर किया जाना चाहिए। फिलहाल तेजस्वी यादव के बयान ने बिहार में अर्थव्यवस्था और सरकारी वित्त को लेकर सियासी बहस जरूर तेज कर दी है।