Bihar politics:तेजस्वी ने ओवैसी के मैनिफेस्टो को किया खारिज, AIMIM की डील ठप, आरजेडी के MY किले को बचाने के लिए बिछाई नई बिसात!

Bihar politics: तेजस्वी यादव किसी भी कीमत पर अपनी पक्की सीट 5 विधायकों वाली AIMIM की झोली में डालकर अपने पैर पर कुल्हाड़ी नहीं मारना चाहते।

Tejashwi Yadav
तेजस्वी ने ओवैसी के मैनिफेस्टो को किया खारिज- फोटो : social Media

Bihar politics:बिहार के  नया 'वार' छिड़ा हुआ है। असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी AIMIM के सूबेदार अख्तरुल ईमान ने आरजेडी के कार्यकारी अध्यक्ष  तेजस्वी यादव के सामने एक बड़ी मांग  रख दी है। ईमान का कहना है कि पुरानी वफादारी और राज्यसभा चुनाव में दिए गए समर्थन  के एवज में आरजेडी उनके एक मोहरे को विधान परिषद (MLC) की कुर्सी तक पहुंचाए। लेकिन, अंदरखाने से खबर आ रही है कि तेजस्वी यादव ने इस प्रपोजल  को सिरे से खारिज कर दिया है।

तेजस्वी यादव किसी भी कीमत पर अपनी पक्की सीट 5 विधायकों वाली AIMIM की झोली में डालकर अपने पैर पर कुल्हाड़ी नहीं मारना चाहते। आरजेडी के रणनीतिकारों को अच्छे से मालूम है कि अगर ओवैसी की पार्टी को इस  महागठबंधन में जरा भी जगह दी, तो भविष्य में वो सीमांचल की सीटों पर अपना कब्जा (दावा) ठोक देगी.

यही नहीं, तेजस्वी को सबसे बड़ा खौफ अपने 'MY' (मुस्लिम-यादव) समीकरण के बिखरने का है। आरजेडी को डर है कि अगर उन्होंने खुलकर ओवैसी से हाथ मिलाया, तो उनका हिंदू वोट बैंक बिदक जाएगा। इसी खौफ  की वजह से तेजस्वी ने कभी भी मुसलमान डिप्टी सीएम की मांग का खुलकर 'समर्थन' नहीं किया।बिहार के 17 फीसदी मुस्लिम वोट बैंक पर राज करने के लिए आरजेडी और AIMIM के बीच लंबे समय से खूनी कम्पटीशन  चल रहा है। ओवैसी की ताकत जितनी बढ़ेगी, आरजेडी का किला उतना ही कमजोर होगा।

इन दोनों पार्टियों के बीच की दुश्मनीबहुत पुरानी है। 2020 के विधानसभा चुनाव में ओवैसी ने 5 सीटें जीती थीं, लेकिन तेजस्वी ने बड़ा खेल  करते हुए उनके 4 विधायकों को तोड़कर अपनी पार्टी में मिला लिया था।इस धोखे का बदला ओवैसी ने 2025 के चुनाव में लिया, जब उन्होंने सीमांचल की 5 सीटों (अमौर, बहादुरगंज, जोकीहाट, कोचाधामन और वायसी) पर आरजेडी का सूपड़ा साफ करते हुए खुद कब्जा जमा लिया। उस दौरान दोनों तरफ से जमकर 'जुबानी गोलियां' (भाषणबाजी) चली थीं और तेजस्वी ने ओवैसी को चरमपंथी तक कह डाला था।

गणित साफ है विधान परिषद की एक सीट के लिए 25 विधायकों के वोट की जरूरत है। आरजेडी के पास यह नंबर अकेले मौजूद है, इसलिए उसे किसी बैसाखी की जरूरत नहीं है। ऐसे में ओवैसी की मांग को ठुकराकर जो डैमेज होगा, उसे कंट्रोल करने के लिए तेजस्वी यादव किसी अपने मुसलमान चेहरे को आगे बढ़ा सकते हैं, ताकि सांप भी मर जाए और लाठी भी न टूटे!