जिला अस्पतालों में स्वास्थ्य सेवाओं एवं सर्जरी प्रदर्शन को लेकर स्वास्थ्य सचिव ने की राज्यस्तरीय समीक्षा, इमरजेंसी सेवाओं को बेहतर करने के साथ दिए कई निर्देश

स्वास्थ्य सचिव कुमार रवि ने सोमवार को डिजिटल कमांड एंड कंट्रोल सेंटर से राज्य के सभी जिलों के स्वास्थ्य अधिकारियों के साथ उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक की। इस दौरान उन्होंने आईपीडी दाखिला, ईएचआर लिंकेज और इमरजेंसी सेवाओं को बेहतर करने के निर्देश दिए....

जिला अस्पतालों में स्वास्थ्य सेवाओं एवं सर्जरी प्रदर्शन को ल
स्वास्थ्य सचिव कुमार रवि ने जिला अस्पतालों में स्वास्थ्य सेवाओं की समीक्षा की- फोटो : प्रिय दर्शन

Patna : बिहार स्वास्थ्य विभाग के सचिव कुमार रवि ने सोमवार को डिजिटल कमांड एंड कंट्रोल सेंटर से राज्य के सभी जिलों के स्वास्थ्य अधिकारियों के साथ उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक की। मुख्यमंत्री और स्वास्थ्य मंत्री के निर्देशों के आलोक में हुई इस बैठक में अस्पतालों के प्रदर्शन, IPD दाखिले, इलेक्ट्रॉनिक हेल्थ रिकॉर्ड (EHR) लिंकेज, इमरजेंसी सेवाओं, विभागवार सर्जरी और आयुष्मान भारत योजना की प्रगति की विस्तार से समीक्षा की गई। बैठक में BMSICL के प्रबंध निदेशक सुब्रत कुमार सेन सहित सभी जिलों के सिविल सर्जन और स्वास्थ्य अधिकारी उपस्थित थे।


आईपीडी दाखिले में बढ़ोतरी, ईएचआर लिंकेज में सुधार के निर्देश

समीक्षा में बताया गया कि सितंबर 2026 में राज्य के जिला अस्पतालों में कुल 49,450 मरीज आईपीडी में भर्ती हुए। जून में यह संख्या 26,443 और जुलाई में 36,680 थी, जबकि अगस्त में 49,973 मरीज भर्ती हुए थे। इससे स्पष्ट है कि जिला अस्पतालों में आईपीडी सेवाओं का उपयोग लगातार बढ़ रहा है।


सितंबर में आईपीडी दाखिले के मामले में मधेपुरा 8,037 मरीजों के साथ पहले स्थान पर रहा। इसके बाद बांका में 2,488, मुंगेर में 2,327, अररिया में 2,065 और सहरसा में 1,709 मरीज भर्ती हुए। वहीं जहानाबाद, शिवहर, भागलपुर, जमुई और नवादा में आईपीडी दाखिले अपेक्षाकृत कम पाए गए।


मरीजों के स्वास्थ्य रिकॉर्ड को डिजिटल रूप से जोड़ने की भी समीक्षा की गई। सितंबर में पूरे राज्य में 4,413 ईएचआर लिंक किए गए। मधेपुरा में सर्वाधिक 1,787 रिकॉर्ड लिंक हुए। इसके बाद अररिया, पटना, गोपालगंज और वैशाली का प्रदर्शन बेहतर रहा। दूसरी ओर कटिहार में एक भी रिकॉर्ड लिंक नहीं होने तथा सहरसा, सिवान, सुपौल और सारण में बहुत कम प्रगति पर स्वास्थ्य सचिव ने नाराजगी जताते हुए तत्काल सुधार के निर्देश दिए।


इमरजेंसी सेवाओं की नियमित निगरानी पर जोर

सितंबर माह में जिला अस्पतालों के एक्सीडेंट एंड इमरजेंसी विभागों में कुल 2,05,566 मरीजों का पंजीकरण हुआ। भोजपुर में सर्वाधिक 16,570 मरीजों ने इमरजेंसी सेवा प्राप्त की। इसके बाद सिवान, अररिया, वैशाली और मधेपुरा का स्थान रहा। वहीं लखीसराय, शेखपुरा, सहरसा, कटिहार और पटना में इमरजेंसी पंजीकरण अपेक्षाकृत कम दर्ज किया गया।


स्वास्थ्य सचिव ने निर्देश दिया कि जिला अस्पतालों में 24×7 इमरजेंसी सेवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित की जाए और मरीजों को समय पर आवश्यक जांच एवं उपचार मिले।


जिला अस्पतालों में तेजी से बढ़ी सर्जरी की संख्या

बैठक में जून से सितंबर 2026 के बीच जिला अस्पतालों में विभिन्न विभागों में हुई सर्जरी की भी समीक्षा की गई। प्रसूति एवं स्त्री रोग विभाग में सर्जरी की संख्या जून के 2,156 से बढ़कर सितंबर में 6,131 हो गई। जनरल सर्जरी में यह संख्या 174 से बढ़कर 1,420 तथा ऑर्थोपेडिक्स में 25 से बढ़कर 1,408 हो गई। सितंबर में ईएनटी की 300, नेत्र रोग की 222 तथा दंत रोग से संबंधित 224 सर्जरी भी की गईं।


जिला अस्पतालों में सर्जरी की संख्या में लगातार उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। जून में 2,428 सर्जरी हुई थीं, जो जुलाई में बढ़कर 5,650, अगस्त में 8,209 और सितंबर में 9,705 हो गईं। इस प्रकार जून की तुलना में सितंबर में सर्जरी की संख्या लगभग चार गुना बढ़ी है।


अक्टूबर में जिला अस्पतालों को मिलेंगे नए चिकित्सा उपकरण

बीएमएसआईसीएल के प्रबंध निदेशक सुब्रत कुमार सेन ने बताया कि अक्टूबर माह में जिला अस्पतालों को जनरल सर्जरी ओटी के लिए 14 प्रकार, गायनी ओटी के लिए 17 प्रकार और ऑर्थो ओटी के लिए 16 प्रकार के उपकरण उपलब्ध कराए जा रहे हैं। इसके अलावा 14 स्थानों पर सी-आर्म मशीनें स्थापित की जा रही हैं। अधिकांश उपकरणों का इंस्टॉलेशन 15 से 20 अक्टूबर तक तथा शत-प्रतिशत इंस्टॉलेशन 31 अक्टूबर तक पूरा करने का लक्ष्य है। सभी उपकरणों की KTL पोर्टल पर प्रविष्टि तथा एएमसी/सीएमसी की व्यवस्था सुनिश्चित करने के भी निर्देश दिए गए हैं।


बैठक के समापन पर स्वास्थ्य सचिव कुमार रवि ने सभी जिलों को उपलब्ध डॉक्टरों, उपकरणों और अन्य संसाधनों का अधिकतम उपयोग सुनिश्चित करने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि जिला अस्पतालों को ऐसी मजबूत स्वास्थ्य इकाई के रूप में विकसित किया जाए, जहां मरीजों को समय पर, सुरक्षित एवं गुणवत्तापूर्ण उपचार मिल सके।

प्रिय दर्शन की रिपोर्ट