Bihar Politics : चुनावी नारे नहीं, दलितों का धरातल पर उत्थान ही असली सामाजिक न्याय: डॉ. संतोष कुमार सुमन

Bihar Politics : हिन्दुस्तानी अवाम मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं मंत्री डॉ. संतोष कुमार सुमन ने कहा कि दलित विमर्श को केवल चुनावी नारों और राजनीतिक लाभ तक सीमित रखना सामाजिक न्याय की भावना के साथ अन्याय है।

Bihar Politics : चुनावी नारे नहीं, दलितों का धरातल पर उत्थान
सामाजिक न्याय की भावना के साथ अन्याय- फोटो : SOCIAL MEDIA

PATNA : हिन्दुस्तानी अवाम मोर्चा (से.) के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं बिहार सरकार के लघु जल संसाधन मंत्री डॉ. संतोष कुमार सुमन ने दलित समाज के उत्थान को लेकर विपक्षी दलों पर बड़ा राजनीतिक हमला बोला है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि दलित विमर्श को केवल चुनावी नारों और राजनीतिक लाभ तक सीमित रखना सामाजिक न्याय की मूल भावना के साथ सरासर अन्याय है। आज जरूरत इस बात की है कि दलित समाज के विकास, शिक्षा, आर्थिक स्वावलंबन, सामाजिक सम्मान और नीतिगत निर्णय प्रक्रिया में उनकी वास्तविक भागीदारी पर पूरी गंभीरता से काम किया जाए।

मोदी सरकार ने दलित उत्थान को दी प्राथमिकता: हम अध्यक्ष

डॉ. संतोष कुमार सुमन ने केंद्र और राज्य सरकार की पीठ थपथपाते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कुशल नेतृत्व में एनडीए सरकार ने इसी दूरगामी सोच के साथ दलित समाज के सर्वांगीण विकास को अपनी मुख्य प्राथमिकता दी है। उन्होंने कहा कि सरकार की नीतियां केवल कागजों या भाषणों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे समाज के इस वंचित वर्ग की तकदीर और तस्वीर बदलने का काम कर रही हैं।

धरातल पर उतरीं जनकल्याणकारी योजनाएं

लघु जल संसाधन मंत्री ने पिछले वर्षों में सरकार द्वारा किए गए कार्यों का लेखा-जोखा पेश करते हुए कहा कि दलित समाज के लिए आवास, शौचालय, शुद्ध पेयजल, बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं, उच्च शिक्षा, छात्रवृत्ति, कौशल विकास (स्किल डेवलपमेंट) और स्वरोजगार जैसी अनगिनत योजनाओं का लाभ बड़े पैमाने पर जमीनी स्तर पर सुनिश्चित किया गया है। एनडीए सरकार ने सामाजिक न्याय को केवल एक राजनीतिक नारा न बनाकर, उसे जनकल्याणकारी योजनाओं के माध्यम से पूरी तरह धरातल पर उतारा है।

दलितों के नाम पर राजनीति करने वाले करें आत्ममंथन

विपक्ष को आड़े हाथों लेते हुए डॉ. सुमन ने कहा कि जो लोग दशकों तक केवल दलितों के नाम पर अपनी राजनीतिक रोटियां सेकते रहे और सत्ता का सुख भोगते रहे, आज उन्हें आत्ममंथन करने की सख्त जरूरत है। दलित समाज अब केवल राजनीतिक चर्चा या वोट बैंक का विषय नहीं रह गया है, बल्कि वह आज के बदलते भारत के विकास का एक सशक्त और आत्मनिर्भर भागीदार बन रहा है।

अंतिम व्यक्ति तक सम्मान पहुँचाना ही एनडीए का संकल्प

बयान के अंत में मंत्री ने ज़ोर देकर कहा कि वास्तविक दलित विमर्श वही माना जा सकता है, जो समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति तक पूर्ण सम्मान, समान अवसर, सुरक्षा और विकास पहुँचाने का सच्चा माध्यम बने। उन्होंने दोहराया कि अंतिम व्यक्ति का विकास ही एनडीए सरकार की मूल नीति, साफ नीयत और अटूट प्रतिबद्धता है, जिससे किसी भी कीमत पर समझौता नहीं किया जाएगा।