Death Anniversary Today : महान समाजसेवी स्वर्गीय महेश शर्मा की 14 वीं पुण्यतिथि आज, परिजनों, प्रशसंकों और गणमान्य लोगों ने दी भावभीनी श्रद्धांजली
Death Anniversary Today : महान समाजसेवी स्वर्गीय महेश शर्मा की आज 14 वीं पुण्यतिथि है. इस मौके पर परिजनों, प्रशसंकों पर कई गणमान्य लोगों ने उन्हें भावभीनी श्रद्धांजली दी है.....पढ़िए आगे

PATNA : एक बुजुर्ग का स्वर्ग सिधार जाना एक भरे-पूरे लाईब्रेरी के ख़त्म हो जाने के बराबर माना जाता है। इसमें कोई अतिश्योक्ति नहीं की हमारे बुजुर्गों के पास ज्ञान, अनुभव और जानकारियों का असीमित भंडार होता है। जिसका लाभ उनके बाद की पीढ़ी को मिलता है। बुजुर्ग ही होते हैं, जो हमें समाज में जीने के तौर तरीके, संस्कार, जीवन की शैली और हमारे गौरवमयी इतिहास की जानकारी देते हैं। जो कहीं खोजने के बाद गूगल भी हाथ खड़े कर देगा। उनके उन खूबियों का लाभ परिवार, समाज, राज्य और देश को मिलता है। इन्हीं खूबियों को समेटे हुए थे गया जिले के निवासी स्वर्गीय महेश शर्मा, जिनकी आज 14 वीं पुण्यतिथि है। इस मौके पर शिक्षा, राजनीति, प्रशासनिक क्षेत्र के लोगों के साथ आम लोगों ने उन्हें भावभीनी श्रद्धांजली दी है।
गया जिले के टेकारी प्रखंड के मुसी गाँव में जन्मे महेश शर्मा की इलाके में पहचान एक सच्चे, ईमानदार, कर्मठ, धार्मिक, समाजसेवी और हर किसी की मदद के लिए तैयार रहनेवाले व्यक्ति के रूप में थी। मदद के लिए उनके दरवाजे तक पहुंचा कोई भी इंसान निराश होकर नहीं लौटता था। भले महेश शर्मा सरकारी सेवा में थे। लेकिन मन का आनंद उन्हें लोगों की सेवा कर ही मिलता था। सरकारी सेवा से रिटायर होने के बाद वे तन, मन, धन से लोगों की सेवा करने लगे। जितना मन उनका धार्मिक कार्यों में लगता। उतना ही लोगों की सेवा की भावना उनमें कूट-कूट कर भरी थी।
सत्य निष्ठा के साथ जिंदगी गुजारनेवाले महेश शर्मा के व्यक्तित्व और कृतित्व की चर्चा आज भी इलाके में की जाती है। अपने पीछे वे दो पुत्र और दो पुत्री छोड़ गए है। जिनमें कौशलेन्द्र प्रियदर्शी और अमरेन्द्र प्रियदर्शी शामिल हैं। जबकि उनकी पत्नी स्वर्गीय.....एक कर्तव्य परायण, धार्मिक और कुशल शिक्षिका थी। उनके दो बेटों में कौशलेन्द्र प्रियदर्शी राज्य के प्रमुख डिजिटल मीडिया NEWS4NATION के संपादक है। जबकि दुसरे पुत्र अमरेन्द्र प्रियदर्शी की पहचान समाजसेवी के रूप में हैं। अपने पिता के पद चिन्हों पर चलते हुए अमरेन्द्र प्रियदर्शी भी लोगों की सेवा के लिए तत्पर होते हैं। अपने पिता की स्मृतियों के संजोये कौशलेन्द्र प्रियदर्शी ने कहा की उनके दिए गए संस्कार और व्यवहार को जीवन का आधार बनाकर कर्तव्य पथ पर निरंतर अग्रसर हैं। उनका सरल स्वभाव,अभाव में भी हंसते हुए जीने की अद्धभुत कला, बगैर गुस्से से सरोकार किये हर मुश्किल काम को चुटकी में निपटा देना..यही हम भाई बहनों को आज भी सम्बल देता है। प्रियदर्शी बताते है की मुझे लगता है कि वे दुनिया के चंद बेहतरीन अभिभावकों में से एक थे। आज भी हैं। उनके ही संस्कारों से सिंचित व आशीर्वाद से पल्लवित व पुष्पित होकर हम भाई-बहन जिंदगी के रास्ते तय कर रहे हैं।
कौशलेन्द्र प्रियदर्शी ने कहा की आज की तारीख में भी हमारे रोल मॉडल हमारे पिता ही हैं। काम क्रोध,मद मोह से मुक्त विदेह की तरह जीकर पिताजी ने सीखा दिया था कि गृहस्थ जीवन मे भी बगैर छल कपट कैसे जिया जा सकता है। ईश्वरीय गुणों से परिपूर्ण उनका जीवन एक पाठशाला की तरह है जहां के छात्र के तौर अभी भी हम सीखने की कोशिश निरन्तर कर रहे हैं। गलतियां होने पर मुस्कुरा कर माफ कर दंड देने का उनका तरीका भी अकल्पनीय था।