बिहार बनेगा जल परिवहन का हब: ₹82 करोड़ के कालूघाट IMMT से नेपाल तक व्यापार होगा आसान और सस्ता, इस महीने से होगा शुरू
परिवहन मंत्री श्रवण कुमार ने सारण के कालूघाट इंटर मल्टी मॉडल टर्मिनल का निरीक्षण कर मार्च तक परिचालन शुरू करने का लक्ष्य दिया है। ₹82.48 करोड़ की लागत से तैयार यह टर्मिनल न केवल माल ढुलाई को सस्ता बनाएगा, बल्कि जलमार्ग के जरिए नेपाल और पश्चिम बंगाल
Patna - बिहार के परिवहन मंत्री श्रवण कुमार ने गुरुवार को सारण जिले में स्थित कालूघाट इंटर मल्टी मॉडल टर्मिनल (IMMT) का औचक निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने टर्मिनल को जल्द चालू करने के सख्त निर्देश देते हुए कहा कि ड्रेजिंग और अन्य तकनीकी बाधाओं को तुरंत दूर किया जाए। मंत्री ने विभागीय अधिकारियों और इनलैंड वॉटरवेज अथॉरिटी ऑफ इंडिया (IWAI) को हर 15 दिन में प्रगति की समीक्षा करने का निर्देश दिया है, ताकि मार्च तक कार्गो सेवा का शुभारंभ सुनिश्चित किया जा सके।
व्यापारिक कनेक्टिविटी और सामुदायिक जेटी का विस्तार
निरीक्षण के दौरान मंत्री ने निर्माणाधीन सामुदायिक जेटी के कार्यों में तेजी लाने पर जोर दिया। उन्होंने अधिकारियों को डोरीगंज से कालूघाट के बीच व्यापारिक दृष्टि से महत्वपूर्ण घाटों का चयन कर वहां निर्माण प्रक्रिया शुरू करने को कहा। वर्तमान में राज्य में 21 जेटी मौजूद हैं, जबकि सिमरिया, अयोध्या और एनआईटी घाट समेत 17 नए स्थानों पर जेटी का निर्माण किया जा रहा है, जिन्हें जल्द ही विभाग को हस्तांतरित कर दिया जाएगा।
नेपाल के साथ व्यापार को मिलेगी नई गति
इस टर्मिनल का प्राथमिक उद्देश्य बिहार और पश्चिम बंगाल के माध्यम से नेपाल तक माल ढुलाई को सुगम बनाना है। मंत्री ने बताया कि जलमार्ग के उपयोग से सड़क परिवहन पर दबाव कम होगा और नेपाल के साथ व्यापारिक संबंध मजबूत होंगे। यह पहल न केवल व्यापार को बढ़ावा देगी, बल्कि माल ढुलाई को अधिक सस्ता और तेज बनाकर क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था की तस्वीर बदल देगी।
सड़क और रेल के मुकाबले जलमार्ग है अधिक किफायती
परिवहन मंत्री ने आंकड़ों के जरिए जलमार्ग की उपयोगिता स्पष्ट की। उन्होंने बताया कि जलमार्ग से माल ढुलाई की लागत औसतन 1.3 रुपये प्रति टन-किमी है, जो रेल (2.41 रुपये) और सड़क (3.62 रुपये) की तुलना में बेहद कम है। ईंधन दक्षता के मामले में भी जलमार्ग अव्वल है; जहाँ एक लीटर ईंधन से जलमार्ग पर 105 टन माल ढोया जा सकता है, वहीं सड़क पर यह क्षमता मात्र 24 टन है।
पर्यावरण अनुकूल परिवहन पर विशेष जोर
पर्यावरण के दृष्टिकोण से भी यह टर्मिनल मील का पत्थर साबित होगा। मंत्री के अनुसार, जलमार्ग में ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन मात्र 15 ग्राम प्रति टन-किमी है, जबकि सड़क मार्ग पर यह 64 ग्राम तक पहुंच जाता है। यह परियोजना न केवल प्रदूषण कम करेगी बल्कि कम ऊर्जा (1 HP) में अधिक भार (4000 किग्रा) ले जाने की क्षमता के कारण सतत विकास के लक्ष्यों को भी पूरा करेगी।
82.48 करोड़ की लागत से विकसित सुविधाएं
गंगा नदी (NW-1) के किनारे 13.17 एकड़ में फैला यह टर्मिनल 82.48 करोड़ रुपये की लागत से तैयार हुआ है। इसकी वार्षिक क्षमता 77 हजार कंटेनर हैंडलिंग की है और यहाँ 2,895 वर्ग मीटर का विशाल भंडारण यार्ड बनाया गया है। प्रशासन भवन, विद्युत उपकेंद्र और वेट ब्रिज जैसी आधुनिक सुविधाओं से लैस यह टर्मिनल स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा करेगा।