स्वास्थ्य मंत्री निशांत की शानदार पहल ! 'टीबी मुक्त भारत अभियान' में बिहार की ऐतिहासिक उपलब्धि, एक माह में बना 1.90 करोड़ को मिला लाभ

विशेष अभियान के दौरान 15,004 टीबी मरीजों की पहचान एवं पंजीकरण किया गया। इनमें से 11,956 मरीजों को डिफरेंशिएटेड टीबी केयर के तहत विशेष देखभाल एवं नियमित फॉलो-अप से जोड़ा गया, ताकि उपचार की निरंतरता सुनिश्चित की जा सके।

स्वास्थ्य मंत्री निशांत की शानदार पहल ! 'टीबी मुक्त भारत अभि

Bihar News : निशांत के बिहार का स्वास्थ्य मंत्री बनते ही राज्य में चिकित्सा सेवाओं में बड़े बदलाव शुरू हुए हैं। इसी क्रम में स्वास्थ्य विभाग, बिहार द्वारा संचालित 'टीबी मुक्त भारत अभियान' के तहत राज्य ने क्षय रोग (टीबी) उन्मूलन की दिशा में एक महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक उपलब्धि दर्ज की है। 2 जुलाई से 31 जुलाई 2026 तक चले विशेष अभियान के दौरान बिहार ने टीबी स्क्रीनिंग के निर्धारित लक्ष्य से कहीं अधिक प्रदर्शन करते हुए 1 करोड़ के लक्ष्य के विरुद्ध 1.90 करोड़ से अधिक लोगों की स्क्रीनिंग कर 185 प्रतिशत उपलब्धि हासिल की है। 


स्वास्थ्य मंत्री निशांत ने कहा कि यह उपलब्धि स्वास्थ्य विभाग की जनस्वास्थ्य के प्रति प्रतिबद्धता, प्रभावी कार्ययोजना तथा आशा कार्यकर्ताओं, एएनएम, सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारियों, चिकित्सा पदाधिकारियों एवं आम नागरिकों की सक्रिय सहभागिता का परिणाम है। अभियान के दौरान गांवों से लेकर शहरी क्षेत्रों तक व्यापक स्तर पर स्क्रीनिंग, जांच एवं जागरूकता गतिविधियां संचालित की गईं, जिससे अधिक से अधिक संभावित मरीजों तक समय पर पहुंच बनाई जा सकी।


अभियान के दौरान 1,90,91,155 लोगों का निक्षय पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन किया गया। इसके साथ ही संवेदनशील एवं उच्च जोखिम वाले वर्गों के 5,91,305 लोगों का एक्स-रे तथा 1,23,348 लोगों की NAAT तकनीक से जांच कर टीबी की शीघ्र एवं सटीक पहचान सुनिश्चित की गई। आधुनिक जांच तकनीकों के उपयोग से रोग की प्रारंभिक अवस्था में पहचान संभव हुई, जिससे मरीजों का समय पर उपचार प्रारंभ किया जा सका।


विशेष अभियान के दौरान 15,004 टीबी मरीजों की पहचान एवं पंजीकरण किया गया। इनमें से 11,956 मरीजों को डिफरेंशिएटेड टीबी केयर के तहत विशेष देखभाल एवं नियमित फॉलो-अप से जोड़ा गया, ताकि उपचार की निरंतरता सुनिश्चित की जा सके। वहीं संक्रमण की रोकथाम के उद्देश्य से 42,239 घरेलू संपर्कों को टीबी प्रिवेंटिव ट्रीटमेंट (TPT) से जोड़ा गया। इससे ऐसे लोगों में टीबी विकसित होने की संभावना को कम करने की दिशा में प्रभावी पहल की गई। विभाग द्वारा उपचार की प्रत्येक अवस्था पर मरीजों की निगरानी एवं परामर्श की व्यवस्था भी सुनिश्चित की गई है।


टीबी मरीजों के उपचार के साथ-साथ उनके पोषण एवं सामाजिक सहयोग पर भी विशेष बल दिया गया है। अभियान के दौरान 17,643 फूड बास्केट वितरित किए गए तथा 65,796 लाभार्थियों को निक्षय पोषण योजना के तहत वित्तीय सहायता उपलब्ध कराई गई, ताकि मरीज बिना किसी आर्थिक बाधा के अपना उपचार पूरा कर सकें। नियमित दवा के साथ संतुलित पोषण और सामाजिक सहयोग टीबी से पूर्णतः स्वस्थ होने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इसी उद्देश्य से अभियान के दौरान समुदाय आधारित सहयोग एवं जनभागीदारी को भी बढ़ावा दिया गया।


राज्य के सभी जिलों में अभियान को मिशन मोड में संचालित किया जा रहा है। स्वास्थ्य विभाग की टीमों ने स्थानीय प्रशासन, जनप्रतिनिधियों तथा सामुदायिक समूहों के सहयोग से घर-घर जाकर स्क्रीनिंग, लक्षणों की पहचान, परामर्श और आवश्यक जांच की व्यवस्था सुनिश्चित की है। परिणामस्वरूप सभी जिलों ने निर्धारित स्क्रीनिंग लक्ष्य के अनुरूप उल्लेखनीय प्रगति दर्ज की गई है और बिहार ने समग्र रूप से लक्ष्य का 185 प्रतिशत हासिल करते हुए टीबी उन्मूलन अभियान को नई गति प्रदान की है। यह उपलब्धि भविष्य में टीबी मुक्त बिहार और टीबी मुक्त भारत के लक्ष्य को प्राप्त करने की दिशा में एक मजबूत आधार सिद्ध होगी।