UGC Act 2026 : यूजीसी के नए नियमों के खिलाफ सवर्ण छात्र ने खून से लिखा पीएम मोदी को पत्र, कहा- हमें भी मिले पढ़ने की आजादी

UGC Act 2026 : देश भर में यूजीसी एक्ट के खिलाफ आक्रोश थमने का नाम नहीं ले रहा है. इसी कड़ी में बिहार के एक युवा ने खून से पीएम मोदी को पत्र लिखा है......पढ़िए आगे

UGC Act 2026 : यूजीसी के नए नियमों के खिलाफ सवर्ण छात्र ने ख
पीएम को खून से लिखा पत्र - फोटो : SOCIAL MEDIA

PATNA : देश में सरकारी नौकरियों और उच्च शिक्षा में आरक्षण तथा यूजीसी (UGC) के हालिया नियमों को लेकर सवर्ण समाज के युवाओं का आक्रोश अब एक नए और कड़े रूप में सामने आ रहा है। मुजफ्फरपुर के एक युवा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को संबोधित करते हुए अपने 'रक्त' से एक पत्र लिखा है, जिसे 'रक्त पत्र आंदोलन' का नाम दिया गया है। इस पत्र के माध्यम से सवर्ण छात्रों ने भारत में अपनी शैक्षणिक आजादी और भविष्य की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंताएँ व्यक्त की हैं।

वीडियो संदेश में छात्र निशांत झा ने प्रधानमंत्री को याद दिलाते हुए कहा कि भारत की आजादी की लड़ाई में सवर्ण समाज के पूर्वजों ने सबसे अधिक रक्त बहाया है। उन्होंने भावुक होते हुए कहा कि जिस आजादी के लिए उनके पूर्वजों ने बलिदान दिया, आज उसी स्वतंत्र भारत में यूजीसी जैसे नियमों के माध्यम से स्वर्ण छात्र-छात्राओं को मानसिक रूप से 'गुलाम' बनाया जा रहा है। उनके अनुसार, वर्तमान नीतियां सवर्ण छात्रों से उनकी पढ़ने की आजादी और सम्मानपूर्वक जीने का अधिकार छीन रही हैं। 

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को संबोधित इस रक्त पत्र में सीधे तौर पर #ROLLBACKUGC और #काले_कानून_वापस_लो जैसे नारों का प्रयोग किया गया है। छात्र का आरोप है कि यूजीसी द्वारा लाए गए कुछ नियम विशेष रूप से सवर्ण वर्ग के युवाओं के करियर और अवसरों को प्रभावित कर रहे हैं, जिससे उनके बीच भविष्य को लेकर डर और असुरक्षा का माहौल पैदा हो गया है। पत्र में आग्रह किया गया है कि इन नीतियों पर पुनर्विचार किया जाए और स्वर्ण छात्रों को भी समान अवसर प्रदान किए जाएं। 

इस आंदोलन के माध्यम से युवा ने देश भर के सवर्ण छात्र-छात्राओं और नौजवानों से एकजुट होने की अपील की है। उन्होंने कहा कि यह समय चुप बैठने का नहीं बल्कि अपने हक के लिए शांतिपूर्ण लेकिन प्रभावी तरीके से आवाज बुलंद करने का है। उन्होंने अन्य युवाओं से भी इसी तरह 'रक्त पत्र' लिखकर प्रधानमंत्री तक अपनी बात पहुंचाने का आह्वान किया है, ताकि सरकार को इस वर्ग के योगदान और वर्तमान समस्याओं का एहसास हो सके। वीडियो के अंत में युवा ने स्पष्ट संदेश दिया कि इस देश में जीने और पढ़ने का अधिकार सभी का समान है, चाहे वे किसी भी वर्ग से हों। 'रक्त पत्र आंदोलन' की यह शुरुआत सोशल मीडिया पर भी तेजी से चर्चा का विषय बन रही है।