'भूमि विवाद अगली पीढ़ी के लिए नहीं बनने देंगे अभिशाप', विजय सिन्हा ने सर्वेक्षण का तय किया डेडलाइन, विधानसभा में राजद-कांग्रेस का प्रदर्शन
उपमुख्यमंत्री ने कहा कि उनकी जनसुनवाई के दौरान कुल 46 लाख शिकायतें प्राप्त हुईं, जिनमें से लगभग 40 लाख आवेदन परिमार्जन से जुड़े हैं। सर्वेक्षण अगले दो वर्षों में पूरा करने का लक्ष्य है
Bihar Vidhan Sabha : बिहार विधानसभा में भूमि विवाद के मुद्दे पर सरकार ने स्पष्ट किया कि राज्य में जमीन संबंधी समस्याओं के स्थायी समाधान की दिशा में ठोस कदम उठाए जा रहे हैं। बरौली विधायक मंजीत सिंह के सवाल का जवाब देते हुए उपमुख्यमंत्री सह राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने कहा कि भूमि विवाद को आने वाली पीढ़ियों के लिए अभिशाप नहीं बनने दिया जाएगा।
उन्होंने बताया कि असर्वेक्षित भूमि के सर्वेक्षण का कार्य तेजी से चल रहा है और अगले दो वर्षों के भीतर इसे पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। सरकार की प्राथमिकता है कि जिन जमीनों पर कोई विवाद नहीं है, उनका सर्वे पहले पूरा किया जाए, ताकि स्पष्ट अभिलेख तैयार हो सकें और भविष्य में विवाद की स्थिति उत्पन्न न हो।
उपमुख्यमंत्री ने कहा कि उनकी जनसुनवाई के दौरान कुल 46 लाख शिकायतें प्राप्त हुईं, जिनमें से लगभग 40 लाख आवेदन परिमार्जन से जुड़े हैं। इन शिकायतों में नाम, खाता, खेसरा संख्या और अन्य अभिलेखीय त्रुटियों के सुधार की मांग की गई है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि इन मामलों का निपटारा प्राथमिकता के आधार पर किया जाए, ताकि आम लोगों को अनावश्यक परेशानी का सामना न करना पड़े।
राजद विधायकों की नारेबाजी
इधर, सदन की कार्यवाही से पहले विपक्षी दलों ने सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया। राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के विधायकों ने विधानसभा पोर्टिको में बैनर-पोस्टर के साथ नारेबाजी की। बैनर पर लिखा था, “बिहार अपराध और बेरोजगारी में नंबर वन है” तथा “मोदी-नीतीश से बिहार को बचाओ।”
कांग्रेस विधायक काली पट्टी बांधकर आए
वहीं कांग्रेस विधायक अभिषेक रंजन मुंह पर काली पट्टी बांधकर विधानसभा पहुंचे। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार अपराध के मुद्दे पर बोलने से बच रही है। विपक्ष के इन प्रदर्शनों के बीच सदन की कार्यवाही शुरू हुई।