दशकों से बसे आशियानों पर संकट: नौतन में अंचल कार्यालय के नोटिस के खिलाफ ग्रामीणों का हल्लाबोल
पश्चिम चंपारण के नौतन में दशकों से बसे ग्रामीणों को अंचल कार्यालय से मिला बेदखली का नोटिस, गुस्साए लोगों ने प्रखंड मुख्यालय पर प्रदर्शन किया । 70 सालों से रह रहे परिवारों को बेदखली का डर सता रहा है।
Bettiah - पश्चिम चंपारण जिले के नौतन अंचल अंतर्गत शिवराजपुर (वार्ड नंबर 8) के ग्रामीणों के पैरों तले तब जमीन खिसक गई, जब उन्हें अंचल कार्यालय द्वारा जमीन खाली करने का नोटिस थमाया गया। शुक्रवार को इसके विरोध में बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने नौतन अंचल कार्यालय के समक्ष जोरदार प्रदर्शन किया। ग्रामीणों का कहना है कि उनके पूर्वज साल 1954 में नदी के कटाव के कारण भगवानपुर पंडितवा दियारा क्षेत्र से आकर यहाँ बसे थे। लगभग 70 वर्षों से रह रहे इन परिवारों के लिए अब सिर छुपाने की छत बचाना एक बड़ी चुनौती बन गई है।
दस्तावेज होने के बावजूद नोटिस पर उठाए सवाल
प्रदर्शन कर रहे शिवकुमार यादव, सुदामा यादव, नागेंद्र मुखिया और हीरालाल मुखिया सहित दर्जनों ग्रामीणों ने बताया कि उनके पास जमीन से जुड़े वैध दस्तावेज हैं। उन्होंने दावा किया कि वे नियमित रूप से जमीन की रसीद कटवाते हैं और मलगुजारी (लगान) भी भर रहे हैं। ग्रामीणों के अनुसार, कुछ जमीन कोठी बंदोबस्त के तहत खरीदी गई थी, जिसका दाखिल-खारिज और जमाबंदी भी हो चुकी है। इसके बावजूद, अंचल कार्यालय द्वारा खाता 11, खेसरा 439 के तहत नोटिस जारी करना समझ से परे है।
मजदूरी कर पेट पालने वाले परिवारों की बढ़ी चिंता
शिवराजपुर वार्ड नंबर 8 के निवासी मुख्य रूप से दिहाड़ी मजदूर हैं। प्रदर्शनकारियों में बड़ी संख्या में महिलाएं भी शामिल थीं, जिनका कहना है कि उनके पास इस जमीन के अलावा रहने का कोई दूसरा ठिकाना नहीं है। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि प्रशासन उनकी वर्षों पुरानी बस्ती को उजाड़ने की कोशिश कर रहा है, जबकि उनके पास जमीन के मालिकाना हक से जुड़े पुख्ता सबूत मौजूद हैं।
प्रशासन का पक्ष: डीएम को कराया जाएगा अवगत
इस मामले में प्रखंड विकास पदाधिकारी सह अंचलाधिकारी (नौतन) शैलेंद्र कुमार सिंह ने प्रदर्शनकारी ग्रामीणों से मुलाकात की। उन्होंने स्थिति को शांत कराते हुए आश्वासन दिया कि ग्रामीणों की समस्याओं और उनके द्वारा प्रस्तुत किए गए दस्तावेजों से जिला पदाधिकारी (DM) को अवगत कराया जाएगा। फिलहाल, अंचल कार्यालय ने मामले की समीक्षा करने की बात कही है, लेकिन ग्रामीणों ने स्पष्ट कर दिया है कि जब तक नोटिस वापस नहीं लिया जाता, उनका संघर्ष जारी रहेगा।
रिपोर्ट: आशीष