हटाईये इसको...कभी नकाब...कभी टोपी तो कभी टीका देखकर क्यों चिढ़ने लगे मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, सेकुलर छवि या अनुशासन, क्या दिखाना चाह रहे सुशासन बाबू

Bihar Politics News : एक साल के भीतर कई ऐसे मामले सामने आये हैं, जब मुख्यमंत्री ने नेताओं के टोपी पहनने से लेकर टीका लगाने तक पर सवाल खड़े किये हैं....जानिए वजह

हटाईये इसको...कभी नकाब...कभी टोपी तो कभी टीका देखकर क्यों चि
क्यों चिढ़ने लगे मुख्यमंत्री- फोटो : SOCIAL MEDIA

PATNA : क्या मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की सियासत अब बदल रही है? विपक्षी पार्टियाँ दावा कर रही है की नीतीश कुमार अब पूरी तरह से बीजेपी के रंग में रंग गए हैं। दरअसल एक साल के भीतर कई ऐसे मामले सामने आये हैं, जब मुख्यमंत्री ने नेताओं के टोपी पहनने से लेकर टीका लगाने तक पर सवाल खड़े किये हैं। पिछले दिनों एक महिला डॉक्टर का नकाब हटाने पर सीएम नीतीश की काफी किरकिरी हुई थी। यहाँ तक की देशभर में उनके इस हरकत का विरोध हुआ था। महिला डॉक्टर ने कई दिनों तक नौकरी ज्वाइन नहीं किया। 

नीतीश कुमार की सियासत पर नजर डालते हुए थोड़ा पीछे चलते हैं। मामला 18 सितंबर 2011 का है । अहमदाबाद के गुजरात यूनिवर्सिटी कन्वेंशन हॉल में तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेन्द्र मोदी के तीन दिवसीय सद्भावना उपवास के दूसरे दिन खेड़ा जिले के पीराना गांव की एक छोटी दरगाह के मौलवी, सैयद इमाम शाही सैयद मंच पर मोदी का अभिवादन करने पहुंचे थे। इसी दौरान मौलवी ने उन्हें एक ‘स्कल कैप’ (मुस्लिम टोपी) पहनाने की कोशिश की, जिसे सीएम मोदी ने विनम्रता से मना कर दिया और इसके बजाय उनसे शॉल ओढ़ाने का अनुरोध किया। 20 सितंबर 2013 को नई दिल्ली में राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग द्वारा आयोजित एक व्याख्यान था। इसी कार्यक्रम में नीतीश कुमार ने कहा था कि “देश चलाने के लिए कभी टोपी भी पहननी पड़ेगी और कभी तिलक भी लगाना पड़ेगा।” उनके इस बयान को तत्कालीन गुजरात के मुख्यमंत्री और बीजेपी के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार नरेंद्र मोदी के संदर्भ में जोड़कर देखा गया था।

2025 के बिहार विधानसभा चुनाव से पहले नीतीश कुमार ने सीतामढ़ी में 8 अगस्त 2025 को मंदिर में पूजा के दौरान ‘टीका’ (तिलक) लगाने से इनकार किया था। अवसर था सीतामढ़ी के पुनौरा धाम में मां जानकी मंदिर की पुनर्विकास परियोजना के शिलान्यास और भूमि पूजन का कार्यक्रम। वैदिक मंत्रोच्चार के बीच जब पुजारी मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को तिलक लगाने आए तो उन्होंने अपना सिर पीछे कर लिया और तिलक लगवाने से मना कर दिया। खास बात यह कि इस कार्यक्रम में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह भी मौजूद थे। सीतामढ़ी में टीका लगाने से इनकार करने की घटना के कुछ ही दिनों बाद 21 अगस्त 2025 को पटना के एक मदरसा कार्यक्रम में नीतीश कुमार ने मुस्लिम टोपी पहनने से भी इनकार कर दिया था। पहले सलीम परवेज और फिर मंत्री जमा खान ने टोपी पहनाने की कोशिश की, लेकिन नीतीश ने टोपी लेकर जमा खान को ही पहना दी। इस पर तो विरोधी दलों ने बखेड़ा ही खड़ा कर दिया था। ये घटनाए बिहार विधानसभा चुनाव के पहले की है। 

बिहार चुनाव में एनडीए की भारी बहुमत से जीत के बाद फिर नीतीश कुमार मुख्यमंत्री बने। लेकिन टोपी और टीका पर टिप्पणी करने का मुख्यमंत्री का सिलसिला नहीं रुका।  नीतीश कुमार ने 15 दिसंबर को आयुष डॉक्टरों को नियुक्ति पत्र देते हुए एक मुस्लिम महिला डॉक्टर के चेहरे से हिजाब खींच दिया था। उनके इस व्यवहार की एक तरफ़ काफ़ी आलोचना हुई और राष्ट्रीय अंतरराष्ट्रीय मीडिया में ये ख़बर सुर्खियों में बन गयी। विपक्षी पार्टी ने कहा की मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पूरी तरह संघी हो गए हैं। वहीँ पाकिस्तान के डिप्टी पीएम और विदेश मंत्री इसहाक़ डार ने एक्स पर लिखा, "बिहार में एक मुस्लिम महिला के अपमान से जुड़ी शर्मनाक घटना निंदनीय और बेहद परेशान करने वाली है।" फिलहाल बिहार विधानसभा का बजट सत्र चल रहा है। बीते 5 फरवरी को बिहार सरकार के पूर्व मंत्री और राजद के नेता अब्दुल बारी सिद्दीकी अपना वक्तव्य विधान परिषद में दे रहे थे। इस दौरान मुख्यमंत्री नीतीश कुमार भी वहां उपस्थित थे। विधान परिषद में टोपी पहनकर आए राजद एमएलसी अब्दुल बारी सिद्दीकी से सीएम नीतीश ने कहा कि “यह टोपी क्यों पहने हैं? हटाइये न।” इस पर अब्दुल बारी सिद्दीकी ने अपनी टोपी उतार दी और कहा- “लीजिए आपका हुकुम सर आंखों पर, मैं अपनी टोपी उतार देता हूं। इसके बाद एक कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के साथ बिहार सरकार के मंत्री अशोक चौधरी और बिहार राज्य नागरिक परिषद् के महासचिव छोटू सिंह भी मौजूद थे। मुख्यमंत्री ने दोनों के सिर ललाट पर टीका देखा और दोनों के सिर को आपस में टकरा दिया। साथ ही कहा की हटाईये इसको। 

इसके पहले मोकामा के जदयू विधायक अनंत सिंह विधानसभा में शपथ लेने पहुंचे थे। शिष्टाचार वश अनंत सिंह विधानसभा में मुख्यमंत्री की सीट तक पहुँच गए। उन्होंने मुख्यमंत्री का पैर छूकर आशीर्वाद लिया। लेकिन जैसे ही मुख्यमंत्री की नजर अनंत सिंह के ललाट पर लगे तिलक पर पड़ी। उन्होंने अनन्त सिंह को तुरंत टोका...ये क्या है जी। एक बार 11 फ़रवरी को राजद के एमएलसी सुनील सिंह विधान परिषद् में किसी मुद्दे पर चर्चा कर रहे थे। इस दौरान सीएम नीतीश ने फिर सुनील सिंह के तिलक के बारे में पूछा। सुनील सिंह ने भी तपाक से उत्तर दिया...अभी अभी पूजा करके आये सर।