कभी था Police का मुखबिर,अब बिहार की जेल से रचा तेलंगाना डकैती का चक्रव्यूह; कुख्यात सुबोध सिंह का बड़ा कारनामा
कुख्यात ज्वेलरी लुटेरे सुबोध सिंह ने ऐसा कर दिखाया। पूर्णिया केंद्रीय कारागार में बंद रहते हुए उसने एक खास मोबाइल ऐप के जरिए तेलंगाना के करीमनगर में ₹82 लाख से अधिक की सोने-चांदी की लूट की पूरी साजिश रची। पुलिस सुबोध को अपने साथ तेलंगाना ले गई है।
क्या कोई अपराधी जेल की सलाखों के पीछे बंद रहकर सैकड़ों किलोमीटर दूर दूसरे राज्य में करोड़ों की डकैती करा सकता है? तेलंगाना पुलिस की ताजा जांच ने इस हैरान करने वाले सवाल का जवाब 'हां' में दिया है। बिहार के कुख्यात ज्वेलरी लुटेरे सुबोध सिंह ने पूर्णिया केंद्रीय कारागार (Purnia Central Jail) में बंद रहते हुए तेलंगाना के करीमनगर में 82 लाख रुपये से अधिक की सोने-चांदी की लूट की पूरी स्क्रिप्ट लिखी। इस सनसनीखेज खुलासे ने न सिर्फ कानून व्यवस्था को चौंका दिया है, बल्कि बिहार की जेल सुरक्षा व्यवस्था और दावों की भी पोल खोलकर रख दी है।
NEET परीक्षा के दिन वारदात, पेंटर बनकर की गई थी शोरूम की रेकी
तेलंगाना पुलिस के मुताबिक, यह वारदात 3 मई की तड़के करीमनगर स्थित 'पीएमजे ज्वैलर्स' (PMJ Jewellers) में अंजाम दी गई थी। गिरोह के शातिर अपराधियों ने जानबूझकर डकैती के लिए उस दिन को चुना जिस दिन देशभर में NEET परीक्षा आयोजित हो रही थी, ताकि स्थानीय पुलिस परीक्षा ड्यूटी और ट्रैफिक व्यवस्था में व्यस्त रहे। इस बड़ी लूट की तैयारी पिछले दो महीनों से चल रही थी। वारदात से पहले गिरोह के एक सदस्य को पेंटर बनाकर शोरूम के अंदर काम पर भेजा गया था, जिसने दुकान की सुरक्षा व्यवस्था, सीसीटीवी कैमरों की लोकेशन और आने-जाने के रास्तों की पूरी रेकी कर मुख्य सरगना तक पहुंचाई थी।

स्पेशल मोबाइल ऐप से जेल के अंदर से ऑपरेट हो रहा था अंतरराज्यीय गैंग
करीमनगर के पुलिस कमिश्नर गौश आलम ने मामले का पर्दाफाश करते हुए बताया कि मास्टरमाइंड सुबोध सिंह जेल के अंदर मोबाइल और एक विशेष कम्युनिकेशन एप्लिकेशन (Mobile App) का इस्तेमाल कर रहा था। इस हाई-टेक ऐप के जरिए वह अपने अंतरराज्यीय गिरोह को निर्देश देता था, ताकि पुलिस उसकी बातचीत और डिजिटल गतिविधियों को आसानी से ट्रैक न कर सके। सुबोध सिंह ने पूर्णिया जेल के भीतर बैठकर ही डकैती की पूरी प्लानिंग की और बिहार से शूटरों व लुटेरों की टीम को तेलंगाना भेजकर वारदात को अंजाम दिलवाया। इस खुलासे ने जेल प्रशासन द्वारा मोबाइल नेटवर्क जैमिंग और सुरक्षा के दावों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
पुलिस जांच का 'बिहार कनेक्शन', भारी मात्रा में सोना-चांदी बरामद
करीमनगर में हुई इस सनसनीखेज डकैती की जांच करते हुए तेलंगाना पुलिस जब बिहार पहुंची, तो मामले की कड़ियां जुड़ती चली गईं। पुलिस ने इस मामले में पटना के फुलवारीशरीफ (खलीलपुरा) निवासी गोलू और बौली मोहल्ला निवासी मोहम्मद आदिल समेत अब तक पांच शातिर आरोपियों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार लुटेरों के कब्जे से पुलिस ने करीब 161.4 तोला सोने के आभूषण और लगभग 112 किलोग्राम चांदी की वस्तुएं बरामद की हैं, जिनकी कुल कीमत 82.02 लाख रुपये आंकी गई है। इसके अलावा वारदात में इस्तेमाल किए गए अवैध हथियार, वाहन और अन्य उपकरण भी जब्त किए गए हैं।

पुलिस का मुखबिर ऐसे बना देश का सबसे बड़ा ज्वेलरी लुटेरा
मूल रूप से बिहार के नालंदा जिले के चांदी थाना क्षेत्र (चिस्तीपुर गांव) का रहने वाला 42 वर्षीय सुबोध सिंह कभी अपराध की दुनिया में नहीं, बल्कि कानून के साथ था। वर्ष 1999 से करीब आठ वर्षों तक वह बिहार पुलिस और एसटीएफ (STF) के लिए मुखबिर (Informer) के रूप में काम करता था। पुलिस के साथ रहते हुए उसने छापेमारी की तकनीक, पुलिस की कार्यशैली और कानूनी कमियों को बेहद करीब से सीखा। बाद में इसी अनुभव का गलत इस्तेमाल कर उसने देश का सबसे बड़ा अंतरराज्यीय ज्वेलरी डकैती नेटवर्क खड़ा कर लिया। वर्तमान में सुबोध सिंह के खिलाफ देश के विभिन्न राज्यों में हत्या, रंगदारी और लूट के 42 से अधिक संगीन मामले दर्ज हैं।

प्रोडक्शन वारंट पर तेलंगाना ले जाया गया मास्टरमाइंड, जांच जारी
अधिकारियों के मुताबिक, सुबोध सिंह का नाम इससे पहले 26 जुलाई 2024 को पूर्णिया के तनिष्क शोरूम में हुई करोड़ों रुपये की चर्चित डकैती में भी सामने आया था, जिसे उसने तब बेऊर जेल में रहते हुए अंजाम दिलवाया था। इसी के बाद सुरक्षा कारणों से उसे 11 मई को पटना की बेऊर जेल से पूर्णिया केंद्रीय कारागार शिफ्ट किया गया था। करीमनगर डकैती में नाम सामने आने के बाद हैदराबाद पुलिस की एक विशेष टीम प्रोडक्शन वारंट लेकर पूर्णिया जेल पहुंची और कड़ी सुरक्षा के बीच सुबोध सिंह को अपने साथ तेलंगाना ले गई है, जहां रिमांड पर लेकर उससे पूछताछ की जा रही है।