सहरसा में 3800 लीटर शराब जब्त: गिट्टी के नीचे छिपा था 'सिंडिकेट', 15 तस्कर पुलिस के सामने से हुए 'फुर्र'

पुलिस ने गिट्टी लदे एक हाईवा से 3800 लीटर से अधिक विदेशी शराब बरामद की है, जिसे पंजाब और झारखंड से तस्करी कर लाया गया था। हालांकि, सटीक सूचना के बावजूद पुलिस की घेराबंदी को धता बताते हुए मौके से 15 तस्कर फरार होने में सफल रहे।

सहरसा में 3800 लीटर शराब जब्त: गिट्टी के नीचे छिपा था 'सिंडि

Saharsa - : बिहार के सहरसा जिले में पुलिस ने शराब माफिया के खिलाफ एक बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया है, लेकिन यह ऑपरेशन कामयाबी से ज्यादा 'पुलिस की नाकामी' के सवालों के घेरे में है। सिमरी बख्तियारपुर पुलिस ने गिट्टी से लदे एक हाईवा से 3801 लीटर विदेशी शराब बरामद की है। हालांकि, सटीक सूचना और समय पर छापेमारी के बावजूद पुलिस के हाथ एक भी तस्कर नहीं लगा। मौके पर मौजूद 10 से 15 आरोपी पुलिस की घेराबंदी तोड़कर अंधेरे का फायदा उठाते हुए आसानी से फरार हो गए, जिससे पुलिस की रणनीति पर सवालिया निशान लग गए हैं।

गिट्टी की आड़ में चलता-फिरता 'मयखाना'

सिमरी बख्तियारपुर के चकभारों गांव स्थित गर्ल्स स्कूल के पास शराब की बड़ी खेप उतारी जानी थी। तस्करों ने पुलिस की आंखों में धूल झोंकने के लिए हाईवा (BR27G6800) पर ऊपर से एक फीट तक गिट्टी लाद रखी थी। पुलिस ने जब गिट्टी हटवाई, तो उसके नीचे से पंजाब और झारखंड निर्मित 'रॉयल चैलेंज' और 'ब्लेंडर्स प्राइड' जैसे महंगे ब्रांड के कार्टन का अंबार मिला।

अंतरराज्यीय सिंडिकेट के खुले तार

बरामद शराब के बोतलों पर 'फॉर सेल इन पंजाब' और 'झारखंड' के मार्क लगे हैं। यह इस बात का प्रमाण है कि बिहार में शराब पहुँचाने के लिए एक बहुत बड़ा अंतरराज्यीय गिरोह काम कर रहा है। मौके से पुलिस ने एस्कॉर्ट के लिए इस्तेमाल की जा रही एक बोलेरो पिकअप (JH17Z4127) भी जब्त की है। एसडीपीओ मुकेश कुमार ठाकुर के अनुसार, अब वाहनों के जीपीएस और चेसिस नंबर के जरिए मुख्य सरगना की तलाश की जा रही है।

छापेमारी की घेराबंदी पर गंभीर सवाल

पुलिस को रात के 2:10 बजे की पुख्ता गुप्त सूचना मिली थी। इसके बावजूद एक साथ 15 तस्करों का भाग निकलना कई चुभते सवाल खड़े करता है:

  • क्या छापेमारी के लिए गई पुलिस टीम की संख्या कम थी?

  • क्या पुलिस का सारा ध्यान केवल 'माल' बरामदगी पर था, अपराधियों की गिरफ्तारी पर नहीं?

  • 10-15 लोगों का एक साथ भाग जाना पुलिस की घेराबंदी की पोल खोलता है।


  • 'शराब' मिली, पर 'शराबी' और 'सौदागर' गायब

अक्सर देखा जाता है कि पुलिस शराब की खेप जब्त कर अपनी पीठ थपथपा लेती है, लेकिन 'जीरो अरेस्ट' होने के कारण असली माफिया हमेशा पकड़ से बाहर रहते हैं। स्थानीय लोगों और विश्लेषकों का मानना है कि जब तक तस्करों की मौके पर गिरफ्तारी नहीं होगी, तब तक वे नए नामों और फर्जी कागजातों के सहारे अपना कारोबार जारी रखेंगे।

पुलिस की अगली रणनीति: फाइलों में दब न जाए राज

फिलहाल पुलिस ने हाईवा और बोलेरो मालिकों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है। एसडीपीओ ने दावा किया है कि तकनीक के सहारे वे माफिया तक पहुँचेंगे। लेकिन धरातल की हकीकत यह है कि मौके से पकड़े गए अपराधी जो राज उगल सकते थे, वह अब फाइलों की खानापूर्ति में उलझ कर रह सकता है।

Report - chhotu sarkar