Bihar news:बैंक मैनेजर बनीं बिहार की पर्वत बेटी, मोनी कुमारी ने माउंट एल्ब्रुस पर लहराया तिरंगा, रचा गौरवशाली इतिहास
बैंक की नौकरी की जिम्मेदारियों के साथ पर्वतारोहण के जुनून को जिंदा रखते हुए मोनी ने यूरोप महाद्वीप की सबसे ऊंची चोटी माउंट एल्ब्रुस, जिसकी ऊंचाई 5,643 मीटर है, पर सफलतापूर्वक तिरंगा फहराकर बिहार का नाम रोशन किया है।..
Bihar news:हौसले बुलंद हों तो कोई भी शिखर दूर नहीं। बिहार की बेटी और सारण की बहू मोनी कुमारी ने इस कहावत को अपनी मेहनत और जज्बे से सच साबित कर दिखाया है। बैंक की नौकरी की जिम्मेदारियों के साथ पर्वतारोहण के जुनून को जिंदा रखते हुए मोनी ने यूरोप महाद्वीप की सबसे ऊंची चोटी माउंट एल्ब्रुस, जिसकी ऊंचाई 5,643 मीटर है, पर सफलतापूर्वक तिरंगा फहराकर बिहार का नाम रोशन किया है।आरा यानी भोजपुर की रहने वाली मोनी कुमारी, सारण जिले के इसुआपुर प्रखंड के डटरा पुरसौली गांव निवासी विनोद कुमार सिंह की बहू हैं। वह बिहार ग्रामीण बैंक में मैनेजर के पद पर कार्यरत हैं। बैंक की जिम्मेदारियों और पर्वतारोहण के कठिन प्रशिक्षण के बीच उन्होंने जिस तरह संतुलन कायम किया, वह युवाओं के लिए प्रेरणा बन गया है।

मौसम ने बदला प्लान, मोनी ने वक्त से पहले फतह किया शिखर
मोनी कुमारी ने अपने पर्वतारोहण अभियान की शुरुआत 10 अगस्त 2026 को की थी। अभियान का मुख्य समिट स्वतंत्रता दिवस यानी 15 अगस्त को प्रस्तावित था। लेकिन पहाड़ पर मौसम तेजी से बदल रहा था। खराब मौसम और संभावित खतरे को देखते हुए मोनी ने अपनी टीम के साथ जोखिम उठाने के बजाय रणनीतिक फैसला लिया।उन्होंने निर्धारित कार्यक्रम से एक दिन पहले ही 14 अगस्त की सुबह माउंट एल्ब्रुस का समिट पूरा कर लिया। इस फैसले ने न सिर्फ उनकी सूझबूझ बल्कि कठिन परिस्थितियों में सही निर्णय लेने की क्षमता को भी साबित किया।

बर्फीली हवाओं और कम ऑक्सीजन के बीच फौलादी इरादा
माउंट एल्ब्रुस की चढ़ाई आसान नहीं होती। ऊंचाई बढ़ने के साथ ऑक्सीजन का स्तर कम होता जाता है और मौसम किसी भी समय चुनौती बन सकता है। मोनी को भी अभियान के दौरान कड़ाके की ठंड, तेज हवाओं, भारी बर्फबारी, कम ऑक्सीजन, फिसलन भरे बर्फीले रास्तों और तेजी से बदलते मौसम का सामना करना पड़ा।कई बार शरीर जवाब देने लगता है, लेकिन ऐसे समय में पर्वतारोही का मानसिक संकल्प सबसे बड़ा हथियार बनता है। मोनी ने भी शारीरिक थकान और प्राकृतिक चुनौतियों के सामने हार नहीं मानी। फौलादी इरादे और दृढ़ संकल्प के साथ वह शिखर तक पहुंचीं और वहां तिरंगा लहराकर अपने अभियान को ऐतिहासिक उपलब्धि में बदल दिया।

किलिमंजारो के बाद एल्ब्रुस पर दूसरी अंतरराष्ट्रीय कामयाबी
माउंट एल्ब्रुस मोनी कुमारी की पहली बड़ी पर्वतारोहण उपलब्धि नहीं है। इससे पहले दिसंबर 2025 में उन्होंने अफ्रीका महाद्वीप की सबसे ऊंची चोटी माउंट किलिमंजारो का सफल आरोहण किया था।पर्वतारोहण को महज शौक के तौर पर नहीं, बल्कि गंभीर लक्ष्य के रूप में अपनाने के लिए मोनी ने प्रतिष्ठित Basic Mountaineering Course (BMC) भी पूरा किया है। इससे पर्वतारोहण की तकनीक, सुरक्षा, अनुशासन और कठिन परिस्थितियों से निपटने की उनकी तैयारी का अंदाजा लगाया जा सकता है।

पति और परिवार ने बढ़ाया हौसला
मोनी कुमारी अपनी सफलता का श्रेय अकेले खुद को नहीं देतीं। उन्होंने अपने पति आशीष कुमार, माता-पिता और सास-ससुर के निरंतर सहयोग और प्रोत्साहन को अपनी सफलता की बड़ी ताकत बताया है।पर्वतारोहण जैसे कठिन और जोखिम भरे क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए परिवार का भरोसा बेहद महत्वपूर्ण होता है। मोनी के मुताबिक परिवार के मजबूत समर्थन के बिना इस मुकाम तक पहुंचना बेहद मुश्किल होता।

बिहार सरकार से सहयोग की उम्मीद
माउंट एल्ब्रुस फतह करने के बाद मोनी कुमारी की उम्मीदें अब और बड़े लक्ष्यों की ओर हैं। वह चाहती हैं कि बिहार सरकार उन्हें और प्रदेश के अन्य प्रतिभाशाली खिलाड़ियों एवं साहसिक खेलों से जुड़े युवाओं को सरकारी स्तर पर बेहतर सहयोग और प्रोत्साहन दे।उनका मानना है कि अगर पर्वतारोहियों को प्रशिक्षण, संसाधन और आर्थिक सहायता मिले तो बिहार के युवा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर और बड़ी उपलब्धियां हासिल कर सकते हैं।मोनी का सपना सिर्फ खुद शिखर तक पहुंचना नहीं है। वह चाहती हैं कि बिहार की ग्रामीण पृष्ठभूमि से आने वाली बेटियां भी साहसिक खेलों और पर्वतारोहण को करियर के रूप में देखें और बड़े सपने देखने से न डरें।
नौकरी और जुनून का अनोखा संतुलन
एक तरफ बैंक मैनेजर के रूप में जिम्मेदारियों का दबाव और दूसरी तरफ बर्फ से ढके दुनिया के ऊंचे पर्वतों को जीतने का जुनून—मोनी कुमारी ने दोनों के बीच शानदार संतुलन बनाकर मिसाल पेश की है।उनकी कहानी सिर्फ एक पर्वतारोहण अभियान की सफलता नहीं, बल्कि हौसले, अनुशासन, परिवार के सहयोग और लक्ष्य के प्रति जुनून की कहानी है। आरा की बेटी और सारण की बहू मोनी कुमारी ने 5,643 मीटर की ऊंचाई पर तिरंगा लहराकर यह संदेश दिया है कि बिहार की बेटियों के सपनों की कोई सीमा नहीं।उनकी उपलब्धि आज बिहार के युवाओं, खासकर ग्रामीण इलाकों की बेटियों के लिए प्रेरणा है अगर इरादे मजबूत हों, तो पहाड़ भी रास्ता दे देते हैं।
रिपोर्ट- धर्मेंद्र रस्तोगी