छपरा में शौचालय योजना में बड़ा 'खेल': वायरल ऑडियो में BDO से लेकर जिला तक पैसों की सेटिंग का दावा
छपरा सदर प्रखंड में शौचालय योजना के नाम पर अवैध वसूली का ऑडियो वायरल हो रहा है। ब्लॉक समन्वयक पर 1000 रुपये मांगने और बीडीओ व जिला स्तर पर 'मैनेज' करने के गंभीर आरोप लगे हैं।लोहिया स्वच्छ बिहार अभियान की खुली पोल, जांच की मांग।
छपरा सदर प्रखंड से सामने आए एक कथित ऑडियो ने लोहिया स्वच्छ बिहार अभियान की जमीनी हकीकत को उजागर कर दिया है। जहां सरकार गरीबों को स्वच्छता से जोड़ने के लिए आर्थिक सहायता दे रही है, वहीं इस योजना में बिचौलियों और अधिकारियों के नाम पर अवैध वसूली का धंधा फल-फूल रहा है। वायरल ऑडियो में प्रखंड समन्वयक (बीसी) अंकित कुमार गुप्ता पर खुलेआम प्रति लाभार्थी 1000 रुपये रिश्वत मांगने का आरोप लगा है।
"BDO साहेब से जिला तक मैनेज": वसूली के पीछे संगठित नेटवर्क का आरोप
कथित ऑडियो में जब लाभार्थी द्वारा 1000 रुपये देने पर आपत्ति जताई गई, तो सामने से मिले जवाब ने प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए। ऑडियो में स्पष्ट कहते सुना जा सकता है— "हमको 1000 रुपया चाहिए, क्योंकि हमको बीडीओ साहेब से लेकर जिला तक मैनेज करना पड़ता है।" इस बयान ने यह संकेत दिया है कि यह किसी एक कर्मचारी की मनमानी नहीं, बल्कि ऊपर से नीचे तक फैला एक संगठित वसूली सिस्टम हो सकता है।
जनता की जेब पर डाका या अधिकारियों के नाम का दुरुपयोग?
यह प्रकरण न केवल एक हजार रुपये की अवैध मांग का है, बल्कि उस भ्रष्ट मानसिकता को दर्शाता है जहां जनकल्याणकारी योजनाओं को भी कमाई का जरिया बना लिया गया है। अब सबसे बड़ा सवाल यह उठता है कि क्या वाकई निचले स्तर के कर्मचारी उच्च अधिकारियों के संरक्षण में यह खेल खेल रहे हैं, या सिर्फ अपना जेब भरने के लिए बीडीओ और जिला स्तरीय अधिकारियों के नाम का इस्तेमाल कर रहे हैं।
जांच और सख्त प्रशासनिक कार्रवाई की जरूरत
चूंकि मामला एक कथित ऑडियो पर आधारित है, इसलिए निष्पक्ष जांच के बिना किसी अंतिम निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी। जिला प्रशासन और पंचायती राज विभाग को ऑडियो की सत्यता और इसमें शामिल आवाजों की फोरेंसिक जांच करानी चाहिए। यदि इस गंभीर मामले को महज एक मामूली विवाद समझकर दबा दिया गया, तो सिस्टम की आड़ में पल रहे भ्रष्ट चेहरों के हौसले और बुलंद होंगे।
सारण से धर्मेन्द्र रस्तोगी की रिपोर्ट