सारण की बेटी सबिता महतो ने रचा इतिहास:19,400 फीट ऊंचे मिग ला पास तक 6 दिनों में पूरी की 265 KM की बेहद कठिन अल्ट्रा रन

बिहार के सारण जिले की एथलीट सबिता महतो ने लद्दाख के लेह से 19,400 फीट ऊंचे मिग ला पास तक 265 किलोमीटर की अल्ट्रा रन मात्र 6 दिनों में पूरी कर इतिहास रच दिया है। जानें उनके इस साहसिक अभियान और संघर्ष की पूरी कहानी।

Sabita Mahto ultra run 265 km in 6 days Mig La Pass
सारण की बेटी सबिता महतो ने रचा इतिहास- फोटो : Reporter

बिहार के सारण जिले के एक छोटे से गांव की अंतरराष्ट्रीय एंड्योरेंस एथलीट सबिता महतो ने दुनिया के सबसे कठिन साहसिक अभियानों में से एक को सफलतापूर्वक पूरा कर देश का नाम रोशन किया है। सबिता ने लद्दाख के लेह से विश्व के सबसे ऊंचे मोटरेबल दर्रों में शामिल मिग ला पास (लगभग 19,400 फीट की ऊंचाई) तक 265 किलोमीटर की मैराथन/अल्ट्रा रन मात्र छह दिनों में पूरी की। उनकी यह असाधारण सफलता न केवल खेल जगत का मान बढ़ाती है, बल्कि अटूट साहस और महिला सशक्तिकरण की मिसाल बनकर उभरी है।


शून्य से नीचे तापमान और ऑक्सीजन की कमी के बीच डटे रहे कदम

यह अभियान अत्यंत दुर्गम और चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में पूरा किया गया। 19 हजार फीट से अधिक की ऊंचाई पर लगातार घटता ऑक्सीजन स्तर, हड्डियां जमा देने वाली जमाव बिंदु से नीचे की ठंड, तेज बर्फीली हवाएं और लगातार बदलता मौसम किसी भी एथलीट की शारीरिक व मानसिक क्षमता की अंतिम परीक्षा लेते हैं। खेल विशेषज्ञों के अनुसार, इतनी ऊंचाई पर 265 किलोमीटर दौड़ना एक असाधारण उपलब्धि है, लेकिन सबिता ने अपने पक्के इरादों से साबित कर दिया कि हौसलों के आगे हर बाधा छोटी है।


दियारा के साधारण परिवार से अंतरराष्ट्रीय फलक तक का संघर्षपूर्ण सफर

सारण जिले के पानापुर प्रखंड अंतर्गत दियारा क्षेत्र की रहने वाली सबिता महतो का जीवन शुरुआती दौर से ही संघर्षों से भरा रहा। एक साधारण परिवार में जन्मी सबिता ने आर्थिक कठिनाइयों और सीमित संसाधनों के बावजूद कभी अपने सपनों से समझौता नहीं किया। कड़े अभ्यास और अनुशासन के बल पर उन्होंने खुद को देश की शीर्ष एंड्योरेंस एथलीटों में शामिल किया। आज उनकी यह ऐतिहासिक यात्रा ग्रामीण क्षेत्रों की लाखों बेटियों और युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत बन चुकी है।


उम्लिंग ला साइक्लिंग से एवरेस्ट तक, उपलब्धियों से भरा है सबिता का करियर

मिग ला पास से पहले भी सबिता महतो कई राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय कीर्तिमान अपने नाम कर चुकी हैं। वर्ष 2022 में उन्होंने नई दिल्ली से उम्लिंग ला पास तक 1,200 किलोमीटर की सोलो साइक्लिंग कर सुर्खियां बटोरी थीं। इसके बाद उन्होंने मनाली से उम्लिंग ला तक 570 किलोमीटर की अल्ट्रा रन सफलता से पूरी की और माउंट एवरेस्ट अभियान में भी हिस्सा लेकर अपने अदम्य साहस का परिचय दिया। मिग ला पास की यह हालिया सफलता उनके साहसिक अभियानों में एक नया स्वर्णिम अध्याय जोड़ती है।


युवाओं और बेटियों को दिया संदेश, भारतीय सेना व संस्थाओं का जताया आभार

अपनी सफलता पर सबिता ने कहा कि इस दौड़ का मुख्य उद्देश्य युवाओं और बेटियों को यह संदेश देना था कि यदि आत्मविश्वास मजबूत हो, तो संसाधन कभी आड़े नहीं आते। उन्होंने अपनी इस उपलब्धि का श्रेय अपने परिवार, सुलभ इंटरनेशनल, पाथ फाउंडेशन और अपने सहयोगियों को दिया। इसके साथ ही उन्होंने अभियान को सुरक्षित बनाने के लिए भारतीय सेना, बॉर्डर रोड्स ऑर्गनाइजेशन (BRO प्रोजेक्ट हिमांक), लद्दाख प्रशासन और स्थानीय पुलिस का विशेष आभार व्यक्त किया।

सारण से धर्मेन्द्र रस्तोगी की रिपोर्ट