वीडियो में 34 बाल्टियां, FIR में 29: सारण पुलिस की जब्ती पर उठे सवाल,130 लीटर स्प्रिट का कौन देगा हिसाब?

बिहार के सारण (छपरा) में तरैया थाना पुलिस द्वारा स्प्रिट जब्ती मामले में बड़ा अंतर सामने आया है।मौके के वीडियो में 34 बाल्टियां दिख रही हैं जबकि FIR में 29 बाल्टियों का जिक्र है।गायब हुई 130 लीटर स्प्रिट को लेकर DIG ने दिए सख्त जांच के आदेश

Saran Police Spirit Seizure mismatch
वीडियो में 34 बाल्टियां, FIR में 29: सारण पुलिस की जब्ती पर उठे सवाल- फोटो : Reporter

बिहार के छपरा (सारण) जिले से शराबबंदी कानून के क्रियान्वयन और पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाने वाला एक गंभीर मामला सामने आया है। तरैया थाना पुलिस द्वारा की गई स्प्रिट जब्ती की कार्रवाई में सरकारी दस्तावेजों और मौके पर बनाए गए वीडियो में कथित रूप से बड़ा अंतर देखा जा रहा है। आधिकारिक एफआईआर (FIR) और वीडियो के दावों में भिन्नता उजागर होने के बाद अब पुलिस की पारदर्शिता पर प्रशासनिक गलियारों से लेकर आम जनता के बीच चर्चाएं गर्म हो गई हैं।


छापेमारी और आरोपी की गिरफ्तारी का पूरा घटनाक्रम

मामला 27 जुलाई 2026 का है, जब तरैया थाना पुलिस को चंचलिया गांव स्थित पुराने बांध के पास श्याम किशोर सिंह के गन्ने के खेत में भारी मात्रा में स्प्रिट छिपाए जाने की गुप्त सूचना मिली थी। सूचना के आधार पर पुलिस टीम ने त्वरित छापेमारी की। पुलिस को देखते ही तीन संदिग्ध बाइक से भागने लगे, जिनमें से पुलिस ने पीछा करके अरबाज खान नामक व्यक्ति को गिरफ्तार कर लिया, जबकि उपेंद्र राय और प्रवीण कुमार मौके से फरार होने में सफल रहे। इसके बाद गिरफ्तार आरोपी की निशानदेही पर गन्ने के खेत में सघन तलाशी अभियान चलाया गया।


एफआईआर बनाम वीडियो: 5 बाल्टियों का रहस्य

पुलिस द्वारा दर्ज एफआईआर के अनुसार, मौके से 26-26 लीटर क्षमता की कुल 29 बाल्टियों में 754 लीटर स्प्रिट बरामद दिखाई गई और इसी आधार पर जब्ती सूची तैयार की गई। हालांकि, कार्रवाई के दौरान बने वीडियो में 34 बाल्टियां दिखाई देने का दावा किया जा रहा है। यदि सभी 34 बाल्टियों में स्प्रिट भरी थी, तो कुल मात्रा 884 लीटर होती है। यानी सरकारी रिकॉर्ड और वीडियो के बीच सीधे तौर पर 5 बाल्टियों (लगभग 130 लीटर स्प्रिट) का बड़ा अंतर सामने आ रहा है।


प्रशासनिक चूक या माल का गायब होना?

इस मामले में सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि यदि वे अतिरिक्त 5 बाल्टियां खाली भी थीं, तो उन्हें जब्ती सूची में दर्ज क्यों नहीं किया गया? क्या वीडियो में दिख रही सभी बाल्टियों में स्प्रिट मौजूद थी या कुछ खाली थीं, इसकी आधिकारिक पुष्टि होना अभी बाकी है। यही बिंदु अब पूरी निष्पक्ष जांच की मुख्य वजह बन गया है कि क्या रिकॉर्ड बनाने में कोई लिपिकीय त्रुटि हुई है या फिर किसी स्तर पर माल गायब करने जैसी गंभीर अनियमितता को अंजाम दिया गया है।


शराबबंदी के बाद पुराने विवादों की फिर से चर्चा

बिहार में शराबबंदी लागू होने के बाद से ही जब्त माल के रखरखाव और आंकड़ों में हेरफेर को लेकर कई बार विवाद उठते रहे हैं। पूर्व में सामने आया "चूहे शराब पी गए" जैसा मामला आज भी जनता की स्मृति में ताजा है। ऐसे में सारण की इस नई घटना ने एक बार फिर सोशल मीडिया से लेकर प्रशासनिक हलकों तक हड़कंप मचा दिया है। लोग यह सवाल उठा रहे हैं कि जब पुलिस के अपने वीडियो साक्ष्य और दर्ज एफआईआर में इतना विरोधाभास है, तो फिर असली रिकॉर्ड पर कैसे भरोसा किया जाए।


डीआईजी का सख्त रुख: दोषियों पर होगी कड़ी कार्रवाई

मामले की संवेदनशीलता और तूल पकड़ते विवाद को देखते हुए सारण प्रक्षेत्र के डीआईजी नीलेश कुमार ने मामले पर कड़ा संज्ञान लिया है। उन्होंने स्पष्ट किया है कि पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराई जा रही है। डीआईजी ने भरोसा दिलाया कि यदि जांच में किसी भी पुलिस अधिकारी या कर्मचारी की लापरवाही या कोई अनिमितता साबित होती है, तो उनके खिलाफ सख्त विभागीय और कानूनी कार्रवाई निश्चित रूप से की जाएगी।

सारण से धर्मेन्द्र रस्तोगी की रिपोर्ट