आधे घंटे की बारिश में डूबा सीतामढ़ी शहर : अपने कार्यालय तक को नहीं बचा सका नगर निगम, सदर अस्पताल परिसर बना तालाब

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आधे घंटे की बारिश में डूबा सीतामढ़ी शहर- फोटो : अविनाश कुमार

Sitamarhi : जिले में मानसून की शुरुआत के साथ ही महज आधे घंटे की मूसलाधार बारिश ने नगर निगम के दावों की पूरी तरह हवा निकाल दी है। चंद मिनटों की बरसात के कारण पूरा शहर जलमग्न हो गया है और प्रमुख सड़कें तालाब में तब्दील हो चुकी हैं। सदर अस्पताल रोड सहित शहर के अधिकांश मुख्य मार्गों पर घुटने भर पानी जमा हो गया है, जिससे आम नागरिकों का अपने घरों से बाहर निकलना पूरी तरह दुश्वार हो गया है। सड़कों पर हुए इस भारी जलजमाव के कारण पैदल यात्रियों के साथ-साथ वाहन चालकों को भी भारी फजीहत का सामना करना पड़ रहा है।


सदर अस्पताल के जिला प्रतिरक्षण और पोस्टमार्टम कार्यालय तक पहुंचा नाले का गंदा पानी

सीतामढ़ी शहर की स्वास्थ्य व्यवस्था की लाइफलाइन कहे जाने वाले सदर अस्पताल परिसर की स्थिति सबसे ज्यादा नारकीय बन गई है। अस्पताल परिसर के भीतर स्थित जिला प्रतिरक्षण कार्यालय, पोस्टमार्टम कार्यालय और इमरजेंसी वार्ड के सामने घुटने भर से ज्यादा पानी लग गया है। दूर-दराज के ग्रामीण इलाकों से यहाँ इलाज कराने और बच्चों का मुख्य टीका लगवाने आई गर्भवती महिलाओं व मरीजों को बदबूदार गंदे पानी से होकर गुजरना पड़ रहा है। अस्पताल परिसर में जलभराव के कारण मरीजों को स्ट्रेचर और व्हीलचेयर से ले जाने में स्वास्थ्य कर्मियों के पसीने छूट रहे हैं।


पॉस इलाकों में घुसा नाले का गंदा पानी; कोट बाजार, गौशाला रोड और नूनिया टोली बेहाल

बारिश की मार से सीतामढ़ी शहर का कोई भी कोना अछूता नहीं रहा है। शहर के सबसे वीआईपी और पॉस माने जाने वाले रिहाइशी इलाकों, जैसे- कोट बाजार, गौशाला रोड, नूनिया टोली सहित अधिकतर गलियों में बाढ़ जैसी स्थिति उत्पन्न हो गई है। सड़कों पर ड्रेनेज (जल निकासी) की उचित व्यवस्था न होने के कारण बारिश के पानी के साथ नाले का बदबूदार और दूषित कचरा लोगों के घरों, रसोई और व्यावसायिक दुकानों के भीतर तक घुस गया है। इससे न केवल लोगों की संपत्ति को नुकसान पहुंच रहा है, बल्कि महामारी और संक्रामक बीमारियां फैलने का खतरा भी मंडराने लगा है।


निगम कार्यालय के मुख्य गेट पर ही लगा पानी, शिकायत के बाद भी नहीं होती नाले की उड़ाही

शर्मनाक स्थिति यह है कि जिस नगर निगम पर पूरे शहर को साफ रखने और जल निकासी की जिम्मेदारी है, खुद उसी नगर निगम कार्यालय के मुख्य गेट पर भारी जलजमाव हो गया है। अपना खुद का दफ्तर न बचा पाने वाले निगम कार्यालय के मुख्य गेट पर पानी लगने से वहां काम से आने वाले नागरिकों के साथ-साथ अस्पताल जाने वाले मरीजों की परेशानी दोगुनी हो गई है। स्थानीय निवासियों का आरोप है कि जलजमाव की इस स्थाई समस्या को लेकर कई बार निगम के वरीय पदाधिकारियों को कहा गया, लेकिन इसके बावजूद समय रहते नालों की उड़ाही (सफाई) का कार्य नहीं कराया गया।


कागजों तक सीमित रहा 'सफाई अभियान', लापरवाह कार्यशैली के खिलाफ जनता में भारी आक्रोश

नगर निगम प्रशासन की इस घोर प्रशासनिक लापरवाही और शिथिलता को लेकर अब सीतामढ़ी की जनता में निगम के प्रति भारी आक्रोश और गुस्सा पनप रहा है। लोगों का साफ तौर पर कहना है कि हर साल मानसून से पहले 'नाला उड़ाही' के नाम पर लाखों-करोड़ों रुपये का बजट कागजों पर ही ठिकाने लगा दिया जाता है, जिसका खामियाजा टैक्स भरने वाली आम जनता को भुगतना पड़ता है। स्थानीय प्रबुद्ध नागरिकों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि नगर निगम की इस लापरवाही की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए और युद्धस्तर पर सक्शन मशीनों को लगाकर शहर से जल निकासी सुनिश्चित की जाए।


अविनाश कुमार की रिपोर्ट