एक साल बाद दो मासूम बच्चियां सकुशल बरामद : मां अब भी लापता, भाकपा माले ने पुलिसिया लापरवाही पर उठाए सवाल

सुपौल जिले में बीते एक साल से लापता एक महिला और उसकी दो मासूम बेटियों में दोनो बच्चियां सकुशल बरामद हो गई, लेकिन महिला का अबतक पता नही चल पाया है। इधर इस मामले को लेकर सीपीआई (एमएल) ने पुलिस की कार्रवाई पर सवाल खड़ा करते हुए जनआंदोलन की बात की है..

एक साल बाद दो मासूम बच्चियां सकुशल बरामद : मां अब भी लापता,
एक साल से लापता महिला का नहीं मिला सुराग- फोटो : विनय कुमार मिश्रा

Supaul : जिले के पिपरा प्रखंड अंतर्गत कौशलीपट्टी गांव से एक वर्ष पूर्व रहस्यमय ढंग से लापता हुई दो मासूम बच्चियों को पुलिस ने सकुशल बरामद कर लिया है, लेकिन उनकी मां अब भी लापता है। इस सनसनीखेज मामले का खुलासा मोहर्रम के दिन तब हुआ, जब बंधक बनाई गई 10 वर्षीय बड़ी बेटी को आरोपियों ने सामान खरीदने बाहर भेजा। बच्ची ने गजब का साहस दिखाते हुए एक दुकानदार के मोबाइल से अपने पिता मनीष कुमार को फोन किया और रोते हुए अपनी आपबीती सुनाई। बच्ची ने बताया कि उसे और उसकी 8 साल की छोटी बहन को एक साल से बंधक बनाकर प्रताड़ित किया जा रहा था।


बच्चियां कॉलेज के पास से हुईं बरामद, मां का सुराग नहीं

बेटी से फोन पर लोकेशन की जानकारी मिलते ही हड़कंप मच गया। सूचना के आधार पर पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए सुपौल शहर के वार्ड संख्या-4 स्थित बी.एस.एस. कॉलेज के समीप एक निजी मकान में छापेमारी की। वहां से दोनों बच्चियों को सकुशल मुक्त करा लिया गया, लेकिन उनकी मां का अब तक कोई सुराग नहीं मिल सका है। पुलिस ने इस मामले में संदेहास्पद भूमिका को लेकर कुछ लोगों को हिरासत में लिया है और लापता महिला की तलाश में सघन पूछताछ कर रही है।


आवेदन के बाद भी FIR न करने का आरोप

पीड़ित परिवार के अनुसार, कौशलीपट्टी निवासी मनीष कुमार ने लगभग एक वर्ष पहले अपनी पत्नी और दोनों बेटियों के अचानक लापता होने की लिखित शिकायत पिपरा थाने में दी थी। परिजनों का गंभीर आरोप है कि आवेदन देने के बावजूद स्थानीय पुलिस ने न तो प्राथमिकी (FIR) दर्ज की और न ही समय रहते कोई प्रभावी कदम उठाया। पुलिस की इसी सुस्ती के कारण दोनों मासूम बच्चियां एक साल तक नरकीय जीवन जीने और प्रताड़ना झेलने को मजबूर रहीं।


भाकपा माले की जांच टीम पहुंची पीड़ित के घर

इस मामले को लेकर अब राजनीति और जनआक्रोश भी गरमाने लगा है। शनिवार को भाकपा (माले) की एक उच्चस्तरीय जांच टीम कौशलीपट्टी गांव पहुंची और पीड़ित परिवार से मुलाकात की। इस टीम में पिपरा विधानसभा के पूर्व प्रत्याशी अनिल कुमार, एरिया सचिव कलाधार प्रसाद यादव और जिला कमिटी सदस्य लाल बहादुर यादव शामिल थे। टीम ने पुलिस की कार्यशैली पर कड़े सवाल खड़े करते हुए कहा कि अगर समय पर एफआईआर दर्ज होती, तो बच्चियों को एक साल तक बंधक नहीं रहना पड़ता।


निष्पक्ष जांच न होने पर जनआंदोलन की चेतावनी

भाकपा (माले) के नेता अनिल कुमार ने सरकार और प्रशासन से मांग की है कि मामले की लीपापोती करने के बजाए उच्चस्तरीय और निष्पक्ष जांच कराई जाए। उन्होंने आवेदन दबाकर बैठने वाले दोषी पुलिस पदाधिकारियों के विरुद्ध सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई करने और लापता महिला को अविलंब बरामद करने की मांग की। इसके साथ ही माले ने दो टूक चेतावनी दी कि यदि जल्द ही पूरे मामले का पर्दाफाश कर दोषियों को जेल नहीं भेजा गया, तो पार्टी सड़क पर उतरकर उग्र जनआंदोलन करने को बाध्य होगी।


विनय कुमार मिश्र की रिपोर्ट