वैशाली कोर्ट का कड़ा रुख: 'लापरवाह' सिविल सर्जन और पुलिस अफसरों को नोटिस, सिस्टम में मचा हड़कंप!
वैशाली में न्यायिक प्रक्रिया में लापरवाही बरतने पर कोर्ट का हंटर चला है। जख्मी रिपोर्ट दाखिल न करने पर जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीश ने सिविल सर्जन, पीएचसी डॉक्टर और थानाध्यक्ष समेत कई पुलिसकर्मियों को नोटिस जारी किया है, जिससे विभाग में हड़कंप मच गया
Vaishali -: न्याय के काम में बाधा डालना और अदालती आदेशों की अनदेखी करना वैशाली के स्वास्थ्य विभाग और पुलिस अधिकारियों को भारी पड़ रहा है। वैशाली जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीश (अष्टम) आदित्य पांडेय ने कड़ी नाराजगी जताते हुए सिविल सर्जन, एक डॉक्टर और दो पुलिस पदाधिकारियों के खिलाफ कारण-पृच्छा (Show Cause) नोटिस जारी किया है।
कोर्ट के आदेश को ठेंगा: न डॉक्टर आए, न सिविल सर्जन ने सुध ली
मामला जख्मी रिपोर्ट (Injury Report) कोर्ट में पेश न करने से जुड़ा है। कोर्ट ने बेलसर पीएचसी की डॉ. चंचल कुमारी को 15 दिसंबर 2025 तक व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर स्पष्टीकरण देने का आदेश दिया था। इस आदेश का पालन सुनिश्चित कराने की जिम्मेदारी सिविल सर्जन को सौंपी गई थी। लेकिन हैरानी की बात यह है कि न तो डॉक्टर कोर्ट पहुँचीं और न ही सिविल सर्जन ने इस दिशा में कोई कार्रवाई की। कोर्ट ने इसे न्यायिक आदेश की अवहेलना मानते हुए दोनों के खिलाफ नोटिस जारी किया है।
पुलिस महकमे पर भी गाज: थानाध्यक्ष और IO को चेतावनी
सिर्फ स्वास्थ्य विभाग ही नहीं, पुलिस की सुस्ती पर भी कोर्ट ने कड़ा प्रहार किया है। जख्मी राजीव कुमार की फाइनल रिपोर्ट 18 जनवरी तक जमा करने का समय दिया गया था। समय बीत जाने के बाद भी रिपोर्ट न मिलने पर कोर्ट ने बरांटी थानाध्यक्ष और अनुसंधानकर्ता (IO) मीरा कुमारी को कारण-पृच्छा नोटिस थमा दिया है।
क्या है पूरा मामला?
लोक अभियोजक श्यामबाबू राय के अनुसार:
- बेलसर पीएचसी मामला: डॉक्टर चंचल कुमारी को रवि रंजन कुमार की फाइनल इंजरी रिपोर्ट न देने पर स्पष्टीकरण देना था।
- बरांटी थाना मामला: राजीव कुमार की रिपोर्ट समय पर जमा न करने से न्यायिक प्रक्रिया में देरी हो रही है।
- कोर्ट का अल्टीमेटम: कोर्ट ने साफ़ कर दिया है कि प्रशासनिक ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
अधिकारियों में मची खलबली
अदालत की इस सख्त कार्रवाई के बाद वैशाली पुलिस और स्वास्थ्य महकमे में हड़कंप है। अब इन अधिकारियों को कोर्ट में जवाब देना होगा कि आखिर क्यों बार-बार दिए गए निर्देशों के बावजूद उन्होंने न्यायिक कार्यों में सहयोग नहीं किया।
Report - rishav kumar