BPSC में ग्रामीण प्रतिभाओं का जलवा: लालगंज की प्रगति के बाद बेलसर की ऋचा सिंह का भव्य स्वागत, निकाला गया 'सफलता जुलूस'
BPSC की परीक्षा में इस बार ग्रामीण परिवेश से आने वाले होनहार अभ्यर्थियों, विशेषकर बेटियों ने अपनी प्रतिभा का परचम लहराया है। ग्रामीण इलाकों में इस ऐतिहासिक सफलता का जश्न बेहद खास और अनूठे अंदाज में मनाया जा रहा है....
Patna : बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) की परीक्षा में इस बार ग्रामीण परिवेश से आने वाले कई होनहार अभ्यर्थियों ने सफलता हासिल कर अपने इलाके का नाम रोशन किया है। इस बड़ी कामयाबी के बाद ग्रामीण इलाकों में सफलता का जश्न कुछ खास और बेहद भावुक अंदाज में मनाया जा रहा है। गांवों में लोग अपने होनहार बच्चों का जिस तरह गाजे-बाजे और फूल-मालाओं के साथ स्वागत-सम्मान कर रहे हैं, उसे देखकर साफ समझा जा सकता है कि अब ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा के प्रति लोग कितने जागरूक हुए हैं। अब गांव के लोग भी अपने बच्चों को आगे बढ़ाने और समाज के लिए प्रेरणा बनाने के लिए पूरी तरह तैयार हैं।
बेलसर की ऋचा सिंह का राजस्व अधिकारी के पद पर चयन, ग्रामीणों ने निकाला विजय जुलूस
इसी कड़ी में आज वैशाली जिले के बेलसर अंतर्गत बेदौलीया की रहने वाली ऋचा सिंह का उनके पैतृक गांव पहुंचने पर ऐतिहासिक स्वागत और सम्मान हुआ। ऋचा सिंह का चयन बीपीएससी परीक्षा के माध्यम से 'राजस्व अधिकारी' (Revenue Officer) के पद पर हुआ है। अपनी मिट्टी की बेटी की इस ऐतिहासिक सफलता से गदगद ग्रामीणों और परिजनों ने पूरे इलाके में एक शानदार 'सफलता जुलूस' निकाला। इस दौरान लोगों ने मिठाई बांटी और ऋचा को फूल-मालाओं से लादकर अपनी खुशी और गर्व का इजहार किया।
सेल्फ स्टडी से दूसरे प्रयास में मिली सफलता, पिता के सपोर्ट को दिया श्रेय
राजस्व अधिकारी के रूप में चयनित ऋचा सिंह ने अपनी इस कामयाबी का मंत्र साझा करते हुए बताया कि उन्होंने बिना किसी बाहरी बड़े कोचिंग के, पूरी तरह 'सेल्फ स्टडी' (खुद से पढ़ाई) के दम पर अपने दूसरे प्रयास में यह मुकाम हासिल किया है। ऋचा ने भावुक होते हुए कहा कि उनकी सफलता के पीछे उनके पिता की कड़ी मेहनत और अटूट सपोर्ट रहा है। पिता के मजबूत इरादों के कारण ही उन्हें पढ़ाई के दौरान न तो कभी पैसों की तंगी महसूस हुई और न ही कभी किसी जरूरी संसाधन की कमी खली। ऋचा का लक्ष्य यहीं रुकना नहीं है, बल्कि वह आगे भी बीपीएससी परीक्षा पास कर शीर्ष प्रशासनिक पद पर बैठना चाहती हैं।
लालगंज में किसान की बेटी प्रगति का भी हुआ था बैंड-बाजे के साथ जोरदार स्वागत
ग्रामीण इलाकों में शिक्षा की यह अलख किसी एक गांव तक सीमित नहीं है। इससे ठीक एक दिन पहले ही लालगंज इलाके में एक साधारण किसान की बेटी प्रगति की सफलता पर भी ऐसा ही नजारा देखने को मिला था। प्रगति के गांव पहुंचने पर ग्रामीणों ने बैंड-बाजे के साथ उनका जोरदार और भव्य स्वागत किया था। बैक-टू-बैक ग्रामीण पृष्ठभूमि की बेटियों द्वारा राज्य की सबसे प्रतिष्ठित परीक्षा में सफलता हासिल करने से यह साबित हो गया है कि अगर सही अवसर और हौसला मिले, तो गांवों की प्रतिभाएं किसी से कम नहीं हैं।
ऋचा के पिता की अभिभावकों से भावुक अपील— बच्चों को शिक्षित कर ही बदलेगा भविष्य
ऋचा की इस शानदार सफलता पर उनके पिता ने भी गहरी खुशी और संतोष जाहिर किया है। बेटी की कामयाबी से गदगद पिता ने समाज के सभी अभिभावकों और माता-पिता से एक बेहद जरूरी और भावुक अपील की है। उन्होंने कहा कि शिक्षा ही वह इकलौता माध्यम है जिससे किसी भी परिवार और समाज का बेहतर भविष्य बन सकता है। इसलिए सभी माता-पिता, चाहे परिस्थितियां कैसी भी हों, अपने बच्चों को (विशेषकर बेटियों को) उच्च शिक्षित जरूर करें। शिक्षा के जरिए ही वे अपने पैरों पर खड़ी होकर समाज को नई दिशा दे सकती हैं।
रिषभ की रिपोर्ट