Bihar Road Accident: बिहार में रफ्तार का कहर, सिस्टम की लापरवाही, नाइट ड्यूटी से लौट रहे युवक को हाइवा ने रौंदा, सड़क जाम से एंबुलेंस भी लौटी
Bihar Road Accident: बिहार में एक बार फिर बेलगाम रफ्तार और सरकारी लापरवाही ने एक नौजवान की जिंदगी छीन ली। ...
Bihar Road Accident: बिहार में एक बार फिर बेलगाम रफ्तार और सरकारी लापरवाही ने एक नौजवान की जिंदगी छीन ली। वैशाली में नाइट ड्यूटी कर घर लौट रहे बाइक सवार युवक को तेज रफ्तार हाइवा ने कुचल दिया। टक्कर इतनी खौफनाक थी कि हाइवा अनियंत्रित होकर सड़क से करीब 20 फीट नीचे उतरते हुए एक चाय की दुकान में जा घुसा। गनीमत रही कि दुकान पर बैठे आधा दर्जन लोग वक्त रहते जान बचाकर भाग निकले, वरना हादसा और भी खूनी हो सकता था।
इस दर्दनाक हादसे में 22 वर्षीय संजीत कुमार की मौके पर ही मौत हो गई। मृतक संजीत कुमार, प्रमोद सिंह के पुत्र थे और हाजीपुर स्थित चोकर मिल में नाइट ड्यूटी कर बाइक से अकेले अपने घर लौट रहे थे। हादसा मधुरापुर महिला दूध सेंटर से आगे मोड़ के पास हुआ, जहां पहले से ही सड़क निर्माण कार्य चल रहा है। लेकिन निर्माण एजेंसी की लापरवाही ने इस मोड़ को मौत का जाल बना दिया था।
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, हाजीपुर की ओर से महनार जा रही बालू लदी हाइवा ने पहले बाइक सवार को जोरदार टक्कर मारी और फिर संतुलन खोते हुए चाय दुकान में घुस गई। दुकान पूरी तरह तबाह हो गई, बाहर खड़ी साइकिलें, मोटरसाइकिलें और कुर्सियां भी हाइवा की चपेट में आ गईं। पुलिस ने मौके से हाइवा चालक को गिरफ्तार कर वाहन को जब्त कर लिया है।
घटना के बाद इलाके में गुस्से का लावा फूट पड़ा। आक्रोशित लोगों ने मधुरापुर महिला दूध सेंटर के पास हाजीपुर–महनार सड़क को जाम कर दिया। दोनों ओर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं। हालात इतने बदतर हो गए कि प्रसव के बाद जच्चा-बच्चा को लेकर जा रही एंबुलेंस और महनार सीएचसी से सदर अस्पताल जा रही इमरजेंसी एंबुलेंस को भी लौटना पड़ा। जान बचाने के रास्ते बंद हो गए और मरीजों को वैकल्पिक मार्ग अपनाना पड़ा।
स्थानीय लोगों ने सड़क निर्माण के संवेदक पर गंभीर आरोप लगाए। उनका कहना है कि निर्माण कार्य के बावजूद न तो चेतावनी बोर्ड लगाया गया है और न ही डायवर्सन की व्यवस्था की गई है। यही लापरवाही लगातार हादसों को दावत दे रही है।
सूचना मिलते ही बिदुपुर थाना अध्यक्ष रवि प्रकाश और सब इंस्पेक्टर संदीप कुमार पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे और आक्रोशित भीड़ को समझा-बुझाकर शांत कराने में जुटे रहे। लेकिन सवाल अब भी कायम है क्या एक और लाश गिरने के बाद ही सिस्टम जागेगा, या यूं ही रफ्तार, रेत और लापरवाही गरीबों की जान लेती रहेगी?
रिपोर्ट- ऋषभ कुमार