Hydroponics farming - खेत-खलिहान भूल जाइए! वैशाली के किसान ने पाइप और कपड़े की बत्ती से उगाई 28 तरह की सब्जियां, बिना मिट्टी 'कोट-पेंट' पहनकर करें खेती

Hydroponics farming - वैशाली के एक युवा किसान ने बिना मिट्टी और नाममात्र पानी के साथ महज 10 फीट की जगह में 28 प्रकार की सब्जियां उगाने का कारनामा कर दिखाया है। घरेलू कबाड़ और इजरायली तकनीक के मेल से यह खेती 'जीरो बजट' मॉडल बन गई है।

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घर की छत पर हाइड्रोपोनिक्स खेती करते अरुण कुमार- फोटो : रिषभ कुमार

Vaishali - वैशाली जिले के चेहराकलां प्रखंड अंतर्गत सुमेरगंज गांव के अरुण कुमार ने खेती का ऐसा मॉडल पेश किया है जिसे देख लोग दांतों तले उंगली दबा रहे हैं। महज 10 फीट के दायरे में पीवीसी पाइप, प्लास्टिक के डिस्पोजल ग्लास और पुराने कपड़े की बत्तियों के सहारे 27 से 28 प्रकार की सब्जियां उगाई जा रही हैं। इसमें मिट्टी का बिल्कुल भी प्रयोग नहीं होता। 

नारियल का छिलका और सूती बत्ती: तकनीक ऐसी कि पानी भी नाममात्र

अरुण ने इस विधि में मिट्टी की जगह कोकपीट (नारियल का बुरादा) का इस्तेमाल किया है। पाइपों को आपस में जोड़कर छोटे मोटर से पानी की सप्लाई की जाती है। पौधों की जड़ों तक नमी पहुँचाने के लिए प्लास्टिक ग्लास के नीचे सूती कपड़े की बत्ती लगाई गई है, जिससे पानी की भारी बचत होती है और फसल को भरपूर ऑक्सीजन मिलता है।

खल्ली और हल्दी: पूरी तरह प्राकृतिक और जैविक

जहरीले रासायनिक खादों को ठेंगा दिखाते हुए अरुण ने सरसों की खल्ली और हल्दी पाउडर का घोल तैयार किया है। यह पूरी तरह प्राकृतिक पोषक तत्व प्रदान करता है, जिससे पौधों का विकास जमीन की अपेक्षा अधिक तेजी से होता है। वर्तमान में उनके पास छत पर बैंगन, पालक, मिर्च, खीरा, गोभी, राजमा, टमाटर और मटर जैसी फसलें लहलहा रही हैं। 

शहरी लोगों के लिए वरदान और 'कोट-पेंट' वाली खेती


अरुण कुमार बताते हैं कि यह तकनीक शहरी क्षेत्रों और कृषि भूमि की कमी के लिए सबसे बेहतर विकल्प है। इस खेती की सबसे बड़ी खूबी यह है कि इसमें कीचड़ या गंदगी का नामोनिशान नहीं है, इसलिए आप कोट-पेंट पहनकर भी आराम से बागवानी कर सकते हैं। वे अब अन्य किसानों को भी इसकी ट्रेनिंग दे रहे हैं ताकि 'जीरो लागत' में बेहतर उत्पादन संभव हो सके।

Report - Rishav kumar