Bihar Mutual Fund: बचत से बाजार तक में बिहारियों का जलवा, जोखिम लेकर कमाई की चाह ने बदली तस्वीर

Bihar Mutual Fund: बिहार के निवेशकों का मिजाज तेजी से बदलता नजर आ रहा है। ...

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बचत से बाजार तक में बिहारियों का जलवा- फोटो : social Media

Bihar Mutual Fund: बिहार के निवेशकों का मिजाज तेजी से बदलता नजर आ रहा है। कभी बैंक एफडी, बचत खाते और दूसरे सुरक्षित ठिकानों को तरजीह देने वाले निवेशक अब शेयर बाजार से जुड़े विकल्पों की तरफ ज्यादा रुख कर रहे हैं। एसोसिएशन ऑफ म्यूचुअल फंड्स इन इंडिया (AMFI) की रिपोर्ट के मुताबिक बिहार में म्यूचुअल फंड में लगाए गए कुल निवेश का करीब 81 फीसदी हिस्सा इक्विटी योजनाओं में पहुंच चुका है। यह आंकड़ा बिहार को देश में इक्विटी म्यूचुअल फंड निवेश के मामले में सबसे आगे खड़ा करता है।रिपोर्ट की तस्वीर बताती है कि बिहार के निवेशकों में अब सिर्फ पैसा सुरक्षित रखने के बजाय उसे तेजी से बढ़ाने की चाह मजबूत हुई है। खासकर युवा और नौकरीपेशा वर्ग बाजार से जुड़े निवेश विकल्पों में दिलचस्पी दिखा रहा है। हालांकि इक्विटी में संभावित रिटर्न ज्यादा हो सकता है, लेकिन इसके साथ बाजार के उतार-चढ़ाव और जोखिम का पहलू भी जुड़ा रहता है।

AMFI की रिपोर्ट के अनुसार बिहार में म्यूचुअल फंड की कुल रकम का 81 प्रतिशत हिस्सा इक्विटी फंडों में निवेश किया गया है। इस मामले में बिहार देश में पहले पायदान पर है।बिहार के बाद पंजाब का नंबर आता है, जहां म्यूचुअल फंड निवेश का करीब 80 फीसदी हिस्सा इक्विटी योजनाओं में है। राजस्थान और उत्तराखंड दोनों राज्यों में इक्विटी का हिस्सा 79 फीसदी बताया गया है।

वहीं उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश में कुल म्यूचुअल फंड निवेश का 77 फीसदी हिस्सा इक्विटी में लगा है। पड़ोसी राज्य झारखंड 75 फीसदी इक्विटी निवेश के साथ इस सूची में सातवें स्थान पर है।यानी आंकड़े साफ इशारा कर रहे हैं कि देश के कई राज्यों में निवेशकों का झुकाव पारंपरिक बचत से हटकर बाजार आधारित निवेश की ओर बढ़ रहा है, लेकिन बिहार में यह रुझान सबसे ज्यादा तेज दिखाई दे रहा है।

म्यूचुअल फंड एक ऐसी निवेश व्यवस्था है, जिसमें कई निवेशकों से पैसा जुटाकर उसे शेयर, बॉन्ड और दूसरी वित्तीय परिसंपत्तियों में लगाया जाता है। इस पूरे निवेश का प्रबंधन पेशेवर फंड मैनेजर करते हैं।इसकी खासियत यह है कि निवेशक अपेक्षाकृत छोटी रकम से भी बाजार में हिस्सेदारी ले सकता है। साथ ही पैसा अलग-अलग कंपनियों और परिसंपत्तियों में लगाया जाता है, जिससे निवेश में विविधता आती है।हालांकि इसका मतलब यह नहीं है कि म्यूचुअल फंड में जोखिम खत्म हो जाता है। खासकर इक्विटी फंड शेयर बाजार की चाल से प्रभावित होते हैं और इनके रिटर्न में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है।

म्यूचुअल फंड और शेयर विशेषज्ञ राजीव सिंह के मुताबिक इक्विटी योजनाओं की सबसे बड़ी खींच ज्यादा रिटर्न की संभावना है। लंबे समय तक निवेश बनाए रखने पर बाजार की वृद्धि का फायदा मिलने की उम्मीद रहती है।इसी वजह से युवा और नौकरीपेशा निवेशकों के बीच इक्विटी आधारित योजनाओं की लोकप्रियता बढ़ रही है। डिजिटल प्लेटफॉर्म और आसान निवेश प्रक्रिया ने भी बाजार तक आम निवेशकों की पहुंच पहले के मुकाबले आसान कर दी है।

बिहार के 81 फीसदी इक्विटी निवेश का आंकड़ा सिर्फ एक संख्या नहीं, बल्कि निवेश की बदलती सोच का संकेत भी माना जा सकता है। अब निवेशक महज पूंजी सुरक्षित रखने के बजाय महंगाई को मात देकर पैसा बढ़ाने के रास्ते तलाश रहे हैं।लेकिन बाजार की चमक के साथ जोखिम को नजरअंदाज करना भारी पड़ सकता है। इक्विटी निवेश में बाजार गिरने पर नुकसान की संभावना भी रहती है। इसलिए निवेशकों के लिए अपनी जोखिम क्षमता, निवेश अवधि और वित्तीय लक्ष्य को ध्यान में रखना जरूरी है।बिहार का यह आंकड़ा फिलहाल देशभर के निवेश व्यवहार में एक दिलचस्प तस्वीर पेश करता है—बचत की पुरानी तिजोरी से पैसा निकलकर अब शेयर बाजार की हलचल में अपनी किस्मत आजमाने पहुंच रहा है।