BookMyShow Success Story - पेड़ के नीचे आया भारतीय युवक को वो एक आईडिया... जिसने बदल दिया टिकट खरीदने का अंदाज! Book my show' की फर्श से अर्श तक की कहानी
बुक माय शो की शुरुआत 1999 में आशीष हेमराजानी ने अपने बेडरूम से की थी। चुनौतियों और डॉट कॉम बबल फटने के बाद भी, आज यह प्लेटफॉर्म भारत में ऑनलाइन टिकटिंग का पर्याय बन चुका है।
Patna - एक पेड़ के नीचे रेडियो सुनते हुए आया एक विचार भारत के मनोरंजन उद्योग की दिशा बदल देगा? यह कहानी है आशीष हेमराजानी की,महज 24 साल की उम्र में अपने घर के बेडरूम से एक छोटे से स्टार्टअप की शुरुआत की थी। शुरुआती विरोध, तकनीकी चुनौतियों और 2002 के डॉट कॉम मार्केट क्रैश में लगभग सब कुछ खो देने के बावजूद, आशीष और उनके दो दोस्तों ने हार नहीं मानी। आज वही 'बिग ट्री एंटरटेनमेंट' देश की दिग्गज कंपनी 'BookMyShow' के रूप में करोड़ों लोगों के मनोरंजन का प्रवेश द्वार बन चुकी है।
एक पेड़ के नीचे आया 'करोड़ों का आईडिया'
बुक माय शो की नींव 1999 में दक्षिण अफ्रीका की एक यात्रा के दौरान पड़ी। आशीष हेमराजानी, जो उस समय एक विज्ञापन फर्म में काम कर रहे थे, एक पेड़ के नीचे बैठकर रेडियो पर रग्बी टिकट का प्रचार सुन रहे थे। वहीं से उन्हें भारत में ऑनलाइन टिकट बेचने का विचार आया। भारत लौटकर उन्होंने 24 साल की उम्र में अपने घर के बेडरूम से 'Bigtree Entertainment Pvt Ltd' की शुरुआत की।
बेडरूम से शुरू हुआ सफर और दोस्तों का साथ
आशीष ने अपने साथ सिडेनहैम इंस्टीट्यूट के दोस्तों, राजेश बालपांडे और परीक्षित दार को भी इस मिशन में जोड़ लिया। परीक्षित ने टेक्नोलॉजी संभाली और राजेश ने वित्त (Finance) का मोर्चा संभाला। शुरुआत में जब उन्होंने परिवार को नौकरी छोड़कर टिकट बेचने के विचार के बारे में बताया, तो उन्हें विरोध झेलना पड़ा, लेकिन आशीष अपने इरादे पर अडिग थे।
जब खुद टिकट खरीदकर ग्राहकों को देते थे आशीष
1999 में भारत में इंटरनेट और बैंकिंग की सुविधाएं न के बराबर थीं। तकनीक की कमी के कारण आशीष पहले खुद टिकट खरीदते थे और फिर ग्राहकों को बेचते थे। उन्होंने कॉल सेंटर बनाए और वहां से टिकट बेचना शुरू किया। कंपनी को पहला बड़ा निवेश जेपी मोर्गन चेस से 2.5 करोड़ रुपये का मिला था।
डॉट कॉम बबल और अस्तित्व का संकट
साल 2002 में 'डॉट कॉम बबल' फटने से पूरी इंडस्ट्री क्रैश हो गई, जिसका बुरा असर आशीष की कंपनी पर भी पड़ा। 150 कर्मचारियों वाली कंपनी में केवल 6 लोग बचे और कॉल सेंटर्स बंद करने पड़े। लेकिन आशीष ने हार नहीं मानी, उन्हें भरोसा था कि भारत में इंटरनेट का भविष्य उज्ज्वल है।
2006: डिजिटल क्रांति और 'बुक माय शो' का जन्म
2006 के आसपास डेबिट/क्रेडिट कार्ड और नेट बैंकिंग के आने से हालात बदले। 2007 में कंपनी ने अपना ब्रांड नेम बदलकर 'BookMyShow' रखा। साल 2011 तक कंपनी 16.09 करोड़ रुपये के रेवेन्यू तक पहुँच गई और सभी प्रमुख सिनेमाघरों के साथ मिलकर काम करने लगी।
रिकॉर्ड तोड़ सफलता और 'बाहुबली' का जादू
2012 में इसे 'हॉटेस्ट कंपनी ऑफ द ईयर' चुना गया और एक्सल पार्टनर ने 100 करोड़ का निवेश किया। साल 2017 में फिल्म 'बाहुबली' के दौरान कंपनी ने 15 मिलियन टिकट बेचकर 100 करोड़ का मुनाफा कमाया और नया इतिहास रच दिया। आज यह ऐप केवल भारत ही नहीं, बल्कि कई अन्य देशों में भी अपनी सेवाएं दे रहा है।
विस्तार और वर्तमान स्वरूप
आज बुक माय शो केवल फिल्मों तक सीमित नहीं है, बल्कि स्पोर्ट्स, लाइव इवेंट्स और नाटकों की बुकिंग का भी दिग्गज प्लेटफॉर्म है। 2016 में मोबाइल एप्लीकेशन की शुरुआत के बाद इसकी लोकप्रियता में जबरदस्त उछाल आया और यह दुनिया के सबसे सफल स्टार्टअप्स की सूची में शामिल हो गया।