Gold-Silver Prices: सोना हुआ 'सस्ता', चांदी में भारी गिरावट! जानिए आज का ताजा रेट

सोना चांदी
सोना-चांदी हुआ सस्ता - फोटो : social media

Gold And Silver Prices: वैश्विक राजनीति में मचे घमासान और युद्ध के साये के बीच भारतीय सर्राफा बाजार से एक चौंकाने वाली खबर सामने आ रही है। जहाँ एक तरफ दुनिया भर में तनाव बढ़ रहा है, वहीं दूसरी ओर सोने और चांदी की कीमतों में भारी गिरावट दर्ज की गई है। निवेशकों और आम खरीदारों के मन में अब बस एक ही सवाल है क्या यह गिरावट जारी रहेगी या कीमतें फिर से आसमान छुएंगी? दरअसल, अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोमवार 30 मार्च को सोना और चांदी की कीमतों में तेज गिरावट दर्ज की गई। वैश्विक तनाव और आर्थिक अनिश्चितताओं के बीच सोना करीब 1.38% गिरकर 4,462 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गया, जबकि चांदी 2% टूटकर 68.3 डॉलर प्रति औंस के स्तर पर आ गई।

वैश्विक बाजारों में अस्थिरता 

संयुक्त राज्य अमेरिका और ईरान के बीच जारी संघर्ष अब पांचवें हफ्ते में पहुंच चुका है, जिससे वैश्विक बाजारों में अस्थिरता बनी हुई है। हालांकि, गिरावट के बावजूद कुछ निवेशक निचले स्तर पर खरीदारी कर रहे हैं, लेकिन बाजार में आगे की स्थिति को लेकर चिंता बनी हुई है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि युद्ध लंबा खिंचता है, तो दुनिया के केंद्रीय बैंक अपने गोल्ड रिजर्व बेच सकते हैं या महंगाई को नियंत्रित करने के लिए ब्याज दरों में बढ़ोतरी कर सकते हैं। इससे सोने जैसे बिना ब्याज वाले निवेश पर दबाव बढ़ता है।

कच्चे तेज की कीमतों में उछाल

युद्ध के चलते कच्चे तेल की कीमतों में उछाल आया है, जिससे वैश्विक महंगाई बढ़ने की आशंका है। इससे फेडरल रिजर्व पर ब्याज दरें बढ़ाने का दबाव बन सकता है। ब्याज दरों में वृद्धि से सोने की मांग पर नकारात्मक असर पड़ता है।

केंद्रीय बैंकों की बिक्री से बढ़ा दबाव

रिपोर्ट्स के अनुसार, तर्कीके केंद्रीय बैंक ने हाल ही में करीब 60 टन सोना बेचा है। अगर अन्य देश भी ऐसा कदम उठाते हैं, तो सोने की कीमतों में और गिरावट आ सकती है। विशेषज्ञों के मुताबिक, फिलहाल सोना 4,400 से 4,500 डॉलर प्रति औंस के दायरे में कारोबार कर रहा है और इसमें कमजोरी बनी हुई है। वहीं चांदी 68 से 72 डॉलर के बीच बनी हुई है। निचले स्तर पर खरीदारी जरूर दिख रही है, लेकिन मजबूत तेजी के लिए वैश्विक हालात में सुधार जरूरी होगा।

निवेशकों के लिए सलाह

मौजूदा समय में सोना और चांदी दोनों ही अस्थिर दौर से गुजर रहे हैं। युद्ध, महंगाई और ब्याज दरों के दबाव के बीच निवेशकों को सतर्क रणनीति अपनाने की सलाह दी जा रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि जल्दबाजी में निवेश करने से बचें और बाजार की स्थिति स्पष्ट होने का इंतजार करें।