Employment in India: 2030 तक भारत में 35 करोड़ से ज्यादा नौकरियों का अनुमान, जानें किन सेक्टरों में मिलेंगे सबसे ज्यादा रोजगार
Employment in India: भारत में 2030 तक 35 करोड़ से ज्यादा नए रोजगार के अवसर पैदा होने का अनुमान है। जानें ऑटोमोबाइल, लॉजिस्टिक्स, टेलीकॉम, साफ ऊर्जा और कपड़ा उद्योग में कितनी नौकरियां मिल सकती हैं।
Employment in India: भारत में रोजगार युवाओं के लिए एक बड़ा मुद्दा है। इस बीच एक रिपोर्ट में अनुमान लगाया गया है कि देश के मैन्युफैक्चरिंग और सर्विस सेक्टर में साल 2030 तक 35 करोड़ से ज्यादा नए रोजगार के अवसर पैदा हो सकते हैं। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि देश से बेरोजगारी पूरी तरह खत्म हो जाएगी। इन अवसरों का लाभ युवाओं को तभी मिलेगा, जब उनके पास काम के हिसाब से जरूरी कौशल और प्रशिक्षण होगा।
PTI की रिपोर्ट के मुताबिक, यह अनुमान अलग-अलग सेक्टर की कौशल परिषदों और उद्योग संगठनों के आंकड़ों पर आधारित है। इंडिया डिडैक्टिक्स एसोसिएशन (IDA) ने भी कहा है कि कंपनियों की जरूरत और युवाओं की पढ़ाई के बीच बेहतर तालमेल होना जरूरी है।
किस सेक्टर में कितनी नौकरियां मिलने का अनुमान?
ऑटोमोबाइल सेक्टर में 20 से 25 लाख नौकरियां
ऑटोमोबाइल यानी गाड़ियों से जुड़े उद्योग में साल 2030 तक 20 से 25 लाख नई सीधी नौकरियां पैदा होने का अनुमान है। इसमें गाड़ियों के निर्माण, उनके पुर्जे बनाने और उनसे जुड़े दूसरे कामों में रोजगार के अवसर शामिल हो सकते हैं।
लॉजिस्टिक्स सेक्टर में 47 लाख कर्मचारियों की जरूरत
लॉजिस्टिक्स सेक्टर में साल 2030 तक करीब 47 लाख प्रशिक्षित कर्मचारियों की जरूरत पड़ने का अनुमान है। इस क्षेत्र में सामान को एक जगह से दूसरी जगह पहुंचाने, गोदामों में रखने और सप्लाई से जुड़े काम शामिल हैं।
टेलीकॉम सेक्टर में 10 लाख नए रोजगार
टेलीकॉम यानी दूरसंचार क्षेत्र में करीब 10 लाख नए रोजगार के अवसर पैदा होने की उम्मीद है। मोबाइल नेटवर्क, इंटरनेट सेवाओं और संचार तकनीक के बढ़ते इस्तेमाल से इस क्षेत्र में प्रशिक्षित कर्मचारियों की जरूरत बढ़ सकती है।
क्लीन एनर्जी सेक्टर में 44 लाख से ज्यादा नौकरियां
साफ ऊर्जा के क्षेत्र में साल 2030 तक 44 लाख से ज्यादा पूर्णकालिक नौकरियां पैदा होने का अनुमान है। इसमें सौर ऊर्जा, पवन ऊर्जा और दूसरी साफ ऊर्जा से जुड़े काम शामिल हो सकते हैं।
टेक्सटाइल और अपैरल सेक्टर में करीब 2 करोड़ नौकरियां
कपड़ा और कपड़े बनाने के उद्योग में अगले तीन साल के दौरान करीब 2 करोड़ नए रोजगार के अवसर पैदा होने का अनुमान है। इस क्षेत्र में कपड़ा बनाने, सिलाई, डिजाइन और तैयार कपड़ों के उत्पादन जैसे काम शामिल हैं।
युवाओं के लिए स्किल ट्रेनिंग क्यों जरूरी?
रोजगार के अवसर बढ़ने के साथ युवाओं को काम के लिए तैयार करना भी जरूरी है। कंपनियों को ऐसे कर्मचारियों की जरूरत होती है, जिन्हें केवल किताबी जानकारी ही नहीं, बल्कि काम करने का व्यावहारिक अनुभव भी हो। तकनीक के बढ़ते इस्तेमाल के कारण कई क्षेत्रों में काम करने के तरीके बदल रहे हैं। इसलिए युवाओं को तकनीकी शिक्षा, मशीनों के इस्तेमाल और अपने क्षेत्र से जुड़ी नई जानकारी सीखनी होगी। इंडस्ट्री और शिक्षण संस्थानों के बीच बेहतर तालमेल से युवाओं को यह समझने में मदद मिल सकती है कि कंपनियों को किस तरह के कर्मचारियों की जरूरत है।
सितंबर 2026 में भारत की बेरोजगारी दर कितनी रही?
सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय के आवधिक श्रम बल सर्वेक्षण (PLFS) के मुताबिक, सितंबर 2026 में 15 साल और उससे अधिक उम्र के लोगों की कुल बेरोजगारी दर 5 फीसदी रही। यह अगस्त 2026 के बराबर थी। हालांकि, पिछले साल सितंबर के मुकाबले इसमें 0.2 फीसदी अंक की कमी आई। ग्रामीण क्षेत्रों में बेरोजगारी दर अगस्त के 4.1 फीसदी से बढ़कर सितंबर में 4.2 फीसदी हो गई। वहीं, शहरी क्षेत्रों में यह 6.8 फीसदी से बढ़कर 6.9 फीसदी रही।
सितंबर 2025 में ग्रामीण बेरोजगारी दर 4.6 फीसदी थी, जो सितंबर 2026 में घटकर 4.2 फीसदी रह गई। वहीं, शहरी बेरोजगारी दर पिछले साल के 6.8 फीसदी से बढ़कर 6.9 फीसदी हो गई। यानी ग्रामीण क्षेत्रों में सालाना आधार पर सुधार हुआ, जबकि शहरी क्षेत्रों में बेरोजगारी दर लगभग स्थिर रही।
क्या 2030 तक बेरोजगारी खत्म हो जाएगी?
35 करोड़ से ज्यादा नए रोजगार पैदा होने का अनुमान जरूर बड़ा है, लेकिन इससे यह साबित नहीं होता कि 2030 तक बेरोजगारी खत्म हो जाएगी। इसके लिए यह देखना जरूरी होगा कि कितनी नौकरियां वास्तव में पैदा होती हैं, कितने युवाओं को काम मिलता है और क्या उन्हें उनकी योग्यता के अनुसार रोजगार मिल पाता है। देश में रोजगार की स्थिति इस बात पर भी निर्भर करेगी कि उद्योग कितनी तेजी से बढ़ते हैं और युवाओं को जरूरी प्रशिक्षण कितनी अच्छी तरह मिलता है।