बिहार में मानसिक बीमारी के बढ़ते ग्राफ पर पटना हाई कोर्ट सख्त: केंद्र से मांगा जवाब, 20 अप्रैल को बड़े अधिकारियों की होगी 'वर्चुअल' पेशी
पटना हाई कोर्ट ने बिहार में बढ़ते मानसिक रोगियों पर जताई चिंता। केंद्र से मांगा जवाब और 20 अप्रैल को बड़े अधिकारियों को हाजिर होने का आदेश दिया। मरीजों को मिलेंगी 144 मुफ्त दवाएं।
Patna - : बिहार में बढ़ती मानसिक बीमारियों और मरीजों की स्थिति पर पटना हाई कोर्ट ने गहरी चिंता व्यक्त की है। मुख्य न्यायाधीश संगम कुमार साहू और न्यायमूर्ति हरीश कुमार की खंडपीठ ने इस मामले की गंभीरता को देखते हुए केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के सचिव को जवाबी हलफनामा दायर करने का कड़ा आदेश दिया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि मानसिक स्वास्थ्य देखभाल एक गंभीर विषय है और इसमें किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
20 अप्रैल को अधिकारियों की फौज रहेगी मौजूद
कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 20 अप्रैल 2026 की तारीख मुकर्रर की है। इस दौरान स्वास्थ्य विभाग के प्रधान सचिव, बिहार राज्य मानसिक स्वास्थ्य प्राधिकरण के सचिव, बिमहास (BIMHAS) के निदेशक, बिहार के डीजीपी और कारागार महानिरीक्षक को वर्चुअल माध्यम से कोर्ट में उपस्थित रहने का निर्देश दिया गया है। जेल महानिरीक्षक को विशेष रूप से निर्देश दिया गया है कि वे मानसिक स्वास्थ्य देखभाल नियम, 2018 के तहत निर्धारित प्रक्रियाओं का सत्यापन कर अपना जवाब दाखिल करें।
मरीजों को मुफ्त भोजन और 144 तरह की दवाएं
सुनवाई के दौरान कोर्ट को राज्य सरकार की ओर से महत्वपूर्ण जानकारियां दी गईं:
निःशुल्क भोजन: 1 अक्टूबर 2025 से बिमहास (BIMHAS) में भर्ती प्रति रोगी को 182.325/- रुपये प्रतिदिन की दर से मुफ्त भोजन दिया जा रहा है。
दवाओं की आपूर्ति: राज्य सरकार के संकल्प के अनुसार, मरीजों को 144 प्रकार की दवाएं पूरी तरह निःशुल्क उपलब्ध कराई जा रही हैं。
बेड की सुविधा: वर्तमान में पुरुषों के लिए 100, महिलाओं के लिए 60 और कैदियों के लिए 20 बेड उपलब्ध हैं, जिनकी संख्या जल्द बढ़ाई जाएगी。
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सड़कों पर भटकते मानसिक रोगियों के लिए 24x7 टोल-फ्री नंबर
हाई कोर्ट ने एडीजी (एडीजी, कमजोर वर्ग) को आदेश दिया है कि प्रदेश के सभी महत्वपूर्ण सार्वजनिक स्थानों पर टोल-फ्री नंबर जारी किए जाएं और इनका व्यापक प्रचार-प्रसार किया जाए。 कोर्ट का उद्देश्य है कि यदि कोई व्यक्ति सड़क पर भटकते हुए मानसिक रूप से बीमार दिखे, तो नागरिक उस नंबर पर सूचना दे सकें। यह टोल-फ्री नंबर आपातकालीन सहायता के लिए 24x7 उपलब्ध रहेगा। इसके अलावा, डीजीपी को निर्देश दिया गया है कि सभी थानों को मानसिक स्वास्थ्य अधिनियम, 2017 की धारा 100 के तहत पूरी संवेदनशीलता के साथ कार्य करने के लिए प्रेरित करें।
टेलीमानस से 36 हजार को परामर्श, हजारों की घर वापसी
आंकड़ों के अनुसार, नवंबर 2022 से अब तक बिहार में 36,381 व्यक्तियों को 'टेलीमानस' कॉल के माध्यम से परामर्श दिया गया है। साथ ही, पुलिस और स्वास्थ्य विभाग के समन्वय से वर्ष 2019 से 2026 तक दर्जनों मानसिक रूप से बीमार पुरुषों और महिलाओं का सफल उपचार कर उन्हें उनके घर वापस भेजा गया है। केवल वर्ष 2025 में ही 14 महिलाओं और 10 पुरुषों की घर वापसी कराई गई।
चिंताजनक: साल-दर-साल बढ़ रहे ओपीडी के मरीज
25 जिला अस्पतालों से प्राप्त ओपीडी रिपोर्ट मानसिक स्वास्थ्य की बिगड़ती स्थिति की गवाही दे रही है:
2022-23: 14,503 नए मरीज और 13,612 पुराने मरीज ओपीडी पहुंचे।
2023-24: नए मरीजों की संख्या बढ़कर 15,655 हुई।
2024-25: ओपीडी में मरीजों का आंकड़ा तेजी से बढ़कर 20,677 तक पहुँच गया।