रेलवे का 'गेम चेंजर' प्लान: दो कंपनियां बनेंगी एक, शेयर बाजार में आई तेजी, क्या बदलने वाली है भारतीय रेलवे की किस्मत?
रेलवे सेक्टर से आई एक गुप्त रिपोर्ट ने निवेशकों की चांदी कर दी है। रेल मंत्रालय के एक बड़े 'मास्टर प्लान' के चलते IRCON और RVNL के शेयरों में जबरदस्त खलबली मची है। क्या इन दो सरकारी दिग्गजों का विलय भारतीय रेलवे की तस्वीर बदल देगा?
Patna - भारतीय शेयर बाजार में शुक्रवार को चौतरफा गिरावट के बावजूद रेलवे सेक्टर के शेयरों में जोरदार रौनक देखने को मिली। बाजार में छाई सुस्ती के उलट रेलवे की दो दिग्गज सरकारी कंपनियों, IRCON इंटरनेशनल और रेल विकास निगम लिमिटेड (RVNL) के शेयरों में भारी खरीदारी दर्ज की गई। इस तेजी के पीछे की मुख्य वजह रेल मंत्रालय द्वारा इन दोनों सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (PSU) के विलय (Merger) का औपचारिक प्रस्ताव पेश करना बताया जा रहा है। इस खबर के आते ही निवेशकों का उत्साह चरम पर पहुंच गया और रेलवे स्टॉक्स 'रॉकेट' बन गए।
मंत्रालयों की मंजूरी और समीक्षा प्रक्रिया
रिपोर्ट्स के अनुसार, रेल मंत्रालय ने इस प्रस्तावित विलय की प्रक्रिया को आगे बढ़ा दिया है। हालांकि, यह मर्जर अभी शुरुआती चरण में है और इसे एक मानक समीक्षा प्रक्रिया (Normal Review Process) से गुजरना होगा। इस योजना को अंतिम रूप देने के लिए वित्त मंत्रालय, सार्वजनिक उद्यम विभाग (DPE) और आर्थिक मामलों की कैबिनेट समिति (CCEA) की मंजूरी अनिवार्य होगी। यदि इन सभी विभागों से हरी झंडी मिल जाती है, तो यह भारतीय रेलवे के बुनियादी ढांचे के क्षेत्र में एक विशाल और शक्तिशाली इकाई के रूप में उभरेगी।
शेयर बाजार में जबरदस्त तेजी
मर्जर की खबर ने स्टॉक मार्केट में हलचल मचा दी। कारोबार के दौरान IRCON का शेयर करीब 12% की छलांग लगाकर ₹150 के स्तर के आसपास पहुंच गया। वहीं, RVNL के स्टॉक में भी 7% तक की तेजी देखी गई और यह ₹298 के स्तर को छू गया। सिर्फ यही दोनों नहीं, बल्कि रेलवे सेक्टर की अन्य कंपनियों जैसे जुपिटर वैगन्स में 14%, रेलटेल में 5% और IRFC व कॉनकॉर (CONCOR) में भी 2% तक की बढ़त दर्ज की गई। निवेशकों को उम्मीद है कि इस विलय से कंपनियों की वित्तीय स्थिति और मजबूत होगी।
विलय का मुख्य उद्देश्य और रणनीतिक लाभ
विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रस्तावित मर्जर का प्राथमिक उद्देश्य दोनों कंपनियों की अलग-अलग विशेषज्ञता (Expertise) को एक मंच पर लाना है। RVNL जहां प्रोजेक्ट मैनेजमेंट और प्लानिंग में माहिर है, वहीं IRCON के पास टर्नकी प्रोजेक्ट्स और रेलवे कंस्ट्रक्शन का दशकों का अनुभव है। इन दोनों के मिलन से परिचालन लागत (Operational Cost) में कमी आएगी और प्रोजेक्ट्स को समय पर पूरा करने की क्षमता बढ़ेगी। इसके अलावा, एक बड़ी कंपनी होने के नाते यह वैश्विक स्तर पर विदेशी प्रोजेक्ट्स हासिल करने के लिए अधिक सक्षम होगी।
शेयरधारकों पर क्या होगा असर?
चूंकि IRCON और RVNL दोनों ही प्रमुख एक्सचेंजों (BSE और NSE) पर लिस्टेड हैं, इसलिए मर्जर की स्थिति में 'शेयर स्वैप' (Share Swap) मैकेनिज्म अपनाए जाने की पूरी संभावना है। इसका अर्थ यह है कि एक कंपनी के शेयरधारकों को एक निश्चित अनुपात (Ratio) में दूसरी कंपनी के शेयर दिए जाएंगे। वर्तमान में IRCON का मार्केट कैप लगभग ₹13,924 करोड़ है, जबकि RVNL का मार्केट कैप ₹61,185 करोड़ के करीब है। सरकार की इन दोनों कंपनियों में क्रमश: 65% और 73% हिस्सेदारी है, जिससे इस विलय प्रक्रिया में सरकारी निर्णय सबसे अहम होगा।