RBI plastic notes: भारत में कैसे बनेंगे प्लास्टिक के नोट? जानें नई तकनीक और बड़ी चुनौतियां

RBI plastic notes: RBI ने 10 और 20 के पॉलिमर नोटों के परीक्षण की योजना बनाई है। जानें प्लास्टिक के नोट कैसे बनेंगे, भारत में इनकी छपाई और तकनीक से जुड़ी क्या चुनौतियां हैं।

RBI plastic notes

RBI plastic notes: भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने ₹10 और ₹20 के पॉलिमर यानी प्लास्टिक के नोटों का परीक्षण करने की योजना बनाई है। सरकार ने इसके लिए मंजूरी भी दे दी है। इसके बाद लोगों के मन में सवाल उठ रहे हैं कि ये नोट कैसे बनाए जाएंगे, इनकी छपाई कहां होगी और क्या भारत के पास इन्हें बड़े पैमाने पर बनाने की पूरी क्षमता है?


सरकार की ओर से संसद में दी गई जानकारी के अनुसार, RBI ने ₹10 और ₹20 के एक-एक अरब पॉलिमर नोटों के परीक्षण का प्रस्ताव दिया है। इसका मतलब है कि दोनों मूल्य के नोटों को मिलाकर कुल दो अरब नोटों का परीक्षण प्रस्तावित है। नियमित रूप से इन नोटों को जारी करने का फैसला परीक्षण सफल होने के बाद लिया जाएगा। 


कहां छपेंगे प्लास्टिक के नोट?


पॉलिमर नोटों को लेकर RBI की योजना अभी शुरुआती चरण में है। इन नोटों के लिए जरूरी सामग्री खरीदने की प्रक्रिया शुरू की गई है। जुलाई 2026 में RBI की सहायक कंपनी भारतीय रिजर्व बैंक नोट मुद्रण प्राइवेट लिमिटेड (BRBNMPL) ने पॉलिमर शीट खरीदने के लिए वैश्विक स्तर पर निविदा जारी की थी। इसलिए यह कहना जल्दबाजी होगी कि नोट बनाने के लिए जरूरी हर सामग्री भारत में ही तैयार होगी। नोटों की छपाई भारत में करने और उन्हें बनाने में इस्तेमाल होने वाली सभी चीजों का देश में ही उत्पादन करने के बीच अंतर है। फिलहाल उपलब्ध जानकारी से यह साफ नहीं है कि पूरी सामग्री की आपूर्ति देश के भीतर से होगी या कुछ चीजों के लिए विदेशी कंपनियों की मदद लेनी पड़ेगी। 


पॉलिमर नोट बनाना क्यों है चुनौतीपूर्ण?


पॉलिमर नोट सामान्य प्लास्टिक की शीट पर छपाई करके नहीं बनाए जाते। इन्हें इस तरह तैयार करना होता है कि वे लंबे समय तक इस्तेमाल के बाद भी मजबूत रहें और उनकी सुरक्षा विशेषताएं सुरक्षित रहें। इन नोटों को बनाने के लिए खास तरह की प्लास्टिक फिल्म, सुरक्षा से जुड़ी तकनीक, विशेष स्याही और छपाई की आधुनिक मशीनों की जरूरत होती है। इसके अलावा नोटों की गुणवत्ता की जांच भी जरूरी है, ताकि वे रोजमर्रा के इस्तेमाल में खराब न हों और उनकी नकल करना मुश्किल रहे। भारत में प्लास्टिक, रसायन, छपाई और सुरक्षा से जुड़े उत्पाद बनाने वाले उद्योग मौजूद हैं। लेकिन इन सभी क्षमताओं को मिलाकर पॉलिमर करेंसी बनाने की पूरी व्यवस्था कितनी मजबूत है, इसका पता उत्पादन और परीक्षण के आगे बढ़ने पर ही चलेगा।


RBI क्यों लाना चाहता है प्लास्टिक के नोट?


पॉलिमर नोटों का मुख्य उद्देश्य उनकी उम्र बढ़ाना है। ₹10 और ₹20 जैसे छोटे मूल्य के नोटों का इस्तेमाल बहुत ज्यादा होता है। ये तेजी से एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति तक पहुंचते हैं, जिससे वे जल्दी फट सकते हैं या खराब हो सकते हैं। RBI के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय अध्ययनों में पॉलिमर नोटों की उम्र सामान्य कागज आधारित नोटों से अधिक पाई गई है। भारत में परीक्षण के दौरान यह देखा जाएगा कि ये नोट गर्मी, बारिश, नमी और लगातार इस्तेमाल जैसी परिस्थितियों में कैसा प्रदर्शन करते हैं।  


क्या कागज के नोट बंद हो जाएंगे?


नहीं। सरकार ने स्पष्ट किया है कि पॉलिमर नोटों को मौजूदा कागज आधारित नोटों के साथ जारी करने की योजना है। फिलहाल सभी कागज के नोटों को बंद करके उनकी जगह प्लास्टिक के नोट लाने का कोई प्रस्ताव नहीं है। पहले परीक्षण किया जाएगा और उसके नतीजों के आधार पर आगे का फैसला लिया जाएगा। अभी इन नोटों के आम लोगों तक पहुंचने की निश्चित तारीख भी घोषित नहीं की गई है। 


आगे क्या होगा?


भारत में पॉलिमर नोटों की शुरुआत से पहले उनकी गुणवत्ता, सुरक्षा, लागत और भारतीय मौसम में टिकाऊपन की जांच अहम होगी। इसके साथ ही यह भी देखना होगा कि इन नोटों को बनाने के लिए जरूरी सामग्री और तकनीक की कितनी आपूर्ति देश में हो सकती है। फिलहाल सरकार की मंजूरी के बाद भी यह परियोजना परीक्षण और तैयारी के चरण में है। इसलिए यह कहना सही नहीं होगा कि भारत में प्लास्टिक के नोटों का बड़े पैमाने पर उत्पादन पूरी तरह तैयार हो चुका है। अंतिम फैसला परीक्षण और जरूरी तैयारियों के बाद ही लिया जाएगा।