Share Market Crash : शेयर बाजार में 'ब्लैक थर्सडे', सेंसेक्स 2500 अंक टूटा, निफ्टी में भी सुनामी, निवेशकों के डूबे करोड़ों रूपये

Share Market Crash : शेयर बाजार में 'ब्लैक थर्सडे', सेंसेक्स

N4N DESK : भारतीय शेयर बाजार के लिए गुरुवार का दिन 'ब्लैक थर्सडे' साबित हुआ, जहां चौतरफा बिकवाली के चलते बाजार में भीषण तबाही देखने को मिली। ग्लोबल मार्केट से मिले कमजोर संकेतों और कच्चे तेल की कीमतों में आए अचानक उछाल ने घरेलू निवेशकों का भरोसा तोड़ दिया। बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) का सेंसेक्स कारोबार के अंत में 2496 अंकों की ऐतिहासिक गिरावट के साथ 74,207 के स्तर पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी भी 775 अंक फिसलकर 23,002 पर आ गया।

बाजार में इस सुनामी का सबसे बड़ा कारण अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों का 114 डॉलर प्रति बैरल के पार जाना रहा। तेल की बढ़ती कीमतों ने न केवल भारत, बल्कि जापान से लेकर कोरिया तक के एशियाई बाजारों का मूड खराब कर दिया। ईंधन महंगा होने से मुद्रास्फीति (Inflation) बढ़ने की आशंका गहरा गई है, जिसके कारण विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPIs) ने भारतीय बाजार से बड़े पैमाने पर पैसा निकालना शुरू कर दिया, जिससे बाजार संभल नहीं सका।

सिर्फ इक्विटी मार्केट ही नहीं, बल्कि कमोडिटी बाजार में भी गुरुवार को भारी हलचल देखी गई। शेयर बाजार की गिरावट के साथ ही सुरक्षित निवेश माने जाने वाले सोना और चांदी की कीमतों में भी जोरदार क्रैश देखने को मिला। विशेष रूप से एमसीएक्स (MCX) पर चांदी की कीमतों में 5 फीसदी से अधिक की गिरावट दर्ज की गई। तेल की कीमतों में लगी आग और बुलियन मार्केट में आई इस मंदी ने निवेशकों के पोर्टफोलियो को दोहरा झटका दिया है।

कारोबारी सत्र के दौरान दिग्गज कंपनियों के शेयर ताश के पत्तों की तरह बिखरते नजर आए। बिकवाली का सबसे ज्यादा असर बैंकिंग और फाइनेंस सेक्टर पर पड़ा, जहां बजाज फाइनेंस, एचडीएफसी बैंक और कोटक महिंद्रा जैसे शेयरों में 4 से 5.50 फीसदी तक की गिरावट रही। रिलायंस इंडस्ट्रीज, मारुति, इंफोसिस और टाटा स्टील जैसी बड़ी कंपनियों के शेयर भी इस बिकवाली की आंधी से खुद को बचा नहीं पाए और भारी नुकसान के साथ लाल निशान में बंद हुए।

बाजार के जानकारों का मानना है कि इतनी बड़ी गिरावट ने तकनीकी स्तर पर बाजार के ढांचे को कमजोर कर दिया है। पिछले बंद 76,704 के मुकाबले सेंसेक्स का सीधे 74,750 पर खुलना ही इस बात का संकेत था कि बाजार पर मंदी का साया है। विशेषज्ञों के अनुसार, जब तक कच्चे तेल की कीमतें स्थिर नहीं होतीं और वैश्विक भू-राजनीतिक हालात में सुधार नहीं आता, तब तक बाजार में अस्थिरता का यह दौर जारी रह सकता है।