Bihar Job: बिहार में नौकरी की बारिश! 44 हजार एएनएम पदों पर भर्ती, 45 हजार से अधिक शिक्षकों की होगी नियुक्ति
बिहार में नौकरी की बारिश! 44 हजार एएनएम पदों पर भर्ती, 45 हजार से अधिक शिक्षकों की होगी नियुक्ति
Bihar Job: बिहार में 44,321 एएनएम की नियुक्ति मुकम्मल की जाएगी। इस मेगा बहाली में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत 5,006 एएनएम की नियुक्ति भी शामिल है। चालू वित्तीय वर्ष में अब तक 7,468 एएनएम की बहाली हो चुकी है, जबकि विभिन्न संवर्गों में 39,095 नियमित पद और एनएचएम के तहत 5,226 रिक्तियां कुल मिलाकर 44,321 पद पर नियुक्ति प्रक्रिया जारी है।सरकार का दावा है कि यह कदम सूबे की स्वास्थ्य सेवाओं में “गेम चेंजर” साबित होगा। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों से लेकर ग्रामीण उपकेंद्रों तक नर्सिंग स्टाफ की तादाद बढ़ने से मातृ और शिशु स्वास्थ्य सेवाओं को नई रफ्तार मिलेगी।
आंकड़ों की जुबान में बात करें तो हालात में काबिले-गौर सुधार दर्ज हुआ है। शिशु मृत्यु दर घटकर प्रति एक लाख पर 23 हो गई है, जो राष्ट्रीय औसत से बेहतर बताई जा रही है। मातृ मृत्यु दर 334 से घटकर 104 पर आ गई है इसे स्वास्थ्य महकमा बड़ी कामयाबी के तौर पर पेश कर रहा है। वहीं, प्रजनन दर 4.2 से घटकर 2.8 हो गई है, जो जनसंख्या स्थिरीकरण की दिशा में अहम संकेत है। संस्थागत प्रसव की दर बढ़कर 76.2 फीसदी पहुंच गई है, जिससे सुरक्षित मातृत्व को मजबूती मिली है।
दवा वितरण के मोर्चे पर भी बिहार ने परचम लहराया है। पिछले 16 महीनों से मुफ्त दवा उपलब्ध कराने में राज्य देश में नंबर एक पर बना हुआ है। कालाजार, यक्ष्मा (टीबी) और चमकी बुखार के उन्मूलन के लिए विशेष अभियान चलाए जा रहे हैं।महिलाओं की सेहत को लेकर भी सरकार ने नई पहल की है। सर्वाइकल कैंसर से बचाव के लिए किशोरियों को वैक्सीन दी जा रही है, जिससे भविष्य में गंभीर बीमारियों के खतरे को कम करने का दावा किया जा रहा है।
मंगल पांडेय ने विधान परिषद में बजट बहस के बाद बड़ा एलान करते हुए कहा कि अगले एक वर्ष के भीतर स्वास्थ्य विभाग में 44,321 एएनएम की नियुक्ति मुकम्मल कर ली जाएगी। इसमें राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत 5,006 एएनएम की बहाली भी शामिल है। उन्होंने बताया कि चालू वित्तीय वर्ष में ही 7,468 एएनएम की नियुक्ति हो चुकी है, जबकि विभिन्न संवर्गों में 39,095 नियमित और 5,226 एनएचएम पदों पर नियुक्ति प्रक्रिया जारी है।
विधान परिषद में स्वास्थ्य विभाग के लिए 21,270 करोड़ 41 लाख रुपये का बजट मंजूर हुआ। मंत्री ने यह भी साफ किया कि सरकारी चिकित्सकों की निजी प्रैक्टिस पर रोक के लिए सख्त नीति तैयार की जा रही है, ताकि अवाम को बेहतर और ईमानदार इलाज मिल सके। साथ ही, निजी प्रतिष्ठित संस्थानों को अस्पताल खोलने के लिए प्रोत्साहन नीति पर भी काम जारी है।
सरकार का दावा है कि सूबे में सेहत के मोर्चे पर इंकलाबी सुधार हुए हैं। शिशु मृत्यु दर घटकर प्रति एक लाख पर 23 हो गई है, जो राष्ट्रीय औसत से बेहतर बताई जा रही है। मातृ मृत्यु दर 334 से घटकर 104 पर आ गई है। प्रजनन दर 4.2 से घटकर 2.8 हो गई है, जबकि संस्थागत प्रसव की दर बढ़कर 76.2 फीसदी पहुंच गई है। पिछले 16 महीनों में मुफ्त दवा वितरण में बिहार नंबर एक पर कायम है। कालाजार, यक्ष्मा और चमकी बुखार उन्मूलन अभियान में भी तेज रफ्तार से काम हुआ है। सर्वाइकल कैंसर से बचाव के लिए बच्चियों को वैक्सीन दी जा रही है।
उधर, शिक्षा विभाग में भी बड़ा खाका पेश हुआ। सुनील कुमार ने घोषणा की कि हर 10 पंचायत पर एक सहायक शिक्षा विकास पदाधिकारी तैनात किया जाएगा। इसके लिए 935 पदों का सृजन हुआ है और बिहार लोक सेवा आयोग के माध्यम से बहाली प्रक्रिया जारी है।
सरकार की प्राथमिकता 45 हजार से अधिक शिक्षकों की नियुक्ति है। 90 फीसदी विशिष्ट शिक्षकों की वेतन विसंगतियां दूर की जा चुकी हैं। डीबीटी के जरिए भुगतान से पारदर्शिता लाई गई है। मध्याह्न भोजन योजना में एनजीओ की थर्ड पार्टी जांच अनिवार्य की गई है और गड़बड़ी पर सख्त कार्रवाई का भरोसा दिलाया गया है।