Vikramshila University: प्राचीन शिक्षा के केंद्र विक्रमशिला विश्वविद्यालय में जल्द शुरू होगी पढ़ाई,दूसरा कैंपस बनने का रास्ता साफ, यहां बनेगा
Vikramshila University: विक्रमशिला विश्वविद्यालय का दूसरा कैंपस भागलपुर के कहलगांव में मलकपुर और अंतिचक मौजा में बनेगा।...

Vikramshila University: विक्रमशिला विश्वविद्यालय का दूसरा कैंपस भागलपुर के कहलगांव में मलकपुर और अंतिचक मौजा में बनेगा। इस नए केंद्रीय विश्वविद्यालय की स्थापना के लिए कुल 215 एकड़ भूमि का अधिग्रहण किया जाएगा। यह निर्णय बिहार सरकार द्वारा लिया गया है, और इसके लिए भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया जल्द ही शुरू होने वाली है।
हाल ही में, शिक्षा विभाग ने इस संबंध में आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए हैं और भूमि चयन की प्रक्रिया को तेज किया गया है। मुख्य सचिव अमृत लाल मीणा ने भी इस परियोजना के लिए सकारात्मक पहल की पुष्टि की है, जिससे स्थानीय लोगों को रोजगार के अवसर मिलेंगे और क्षेत्र का विकास होगा.
इस नए कैंपस में अध्ययन और शोध कार्यों को बढ़ावा देने के लिए आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। विक्रमशिला विश्वविद्यालय का इतिहास प्राचीन काल से जुड़ा हुआ है, जब इसे बौद्ध धर्म और तंत्र विद्या का प्रमुख केंद्र माना जाता था
उम्मीद की जा रही है कि इस सत्र से विश्वविद्यालय के अस्थायी परिसर में पढ़ाई शुरू हो सकेगी, जबकि स्थायी परिसर का निर्माण जारी रहेगा
बहरहाल विक्रमशिला केंद्रीय विश्वविद्यालय का अस्थाई परिसर कहलगांव में स्थापित किया जाएगा। इसके लिए कहलगांव में दो स्थानों का चयन किया गया है। इसके अतिरिक्त, सबौर कृषि विश्वविद्यालय में भी एक स्थल का चयन किया गया है। कहलगांव में विक्रमशिला केंद्रीय विश्वविद्यालय के अस्थाई परिसर को अंतिम रूप देकर अध्ययन प्रारंभ करने की योजना बनाई गई है।
विक्रमशिला विश्वविद्यालय के स्थायी परिसर के लिए भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया भी चल रही है। भागलपुर जिला प्रशासन ने 210 एकड़ भूमि चिन्हित की है, जिसमें से कुछ भूमि राज्य सरकार की है लेकिन स्थानीय परिवारों द्वारा कब्जा किया गया है. यह परियोजना प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा घोषित विशेष पैकेज का हिस्सा है, जिसके तहत 500 करोड़ रुपये का बजट भी आवंटित किया गया था.
उम्मीद जताई जा रही है कि इसी सत्र से पढ़ाई प्रारंभ हो जाएगी, जिससे एक बार फिर से इस प्राचीन शिक्षा केंद्र को जीवंत किया जा सकेगा।विक्रमशिला विश्वविद्यालय को पाल वंश के राजा धर्मपाल द्वारा 8वीं शताब्दी में स्थापित किया गया था। यह बौद्ध धर्म और तंत्र विद्या का प्रमुख केंद्र था और नालंदा विश्वविद्यालय के समकक्ष माना जाता था. इसका पतन 12वीं शताब्दी में बख्तियार खिलजी द्वारा आक्रमण के कारण हुआ था.