मौत की FIR, दो साल का सस्पेंस और एक OTP: 'मर्डर केस' का चौंकाने वाला अंत
आधार कार्ड ने एक शख्स को न केवल अपने परिवार से मिला दिया है बल्कि पुलिस फाइल में 'मृत' मानकर जाँच की जा रही थी, जबकि असल में कहानी कुछ और ही मोड़ ले चुकी है.
आधार कार्ड ने एक शख्स को न केवल अपने परिवार से मिला दिया है बल्कि पुलिस फाइल में 'मृत' मानकर जाँच की जा रही थी, जबकि असल में कहानी कुछ और ही मोड़ ले चुकी है. दरअसल यूपी के बस्ती जिले के पिलखाव गाँव में रहने वाले संदीप की पत्नी प्रियंका जुलाई २०२४ में अचानक अपने बेटे और जेवर लेकर गायब हो गई थी। संदीप ने हर जगह तलाश की, लेकिन जब कोई सुराग नहीं मिला तो उसे लगा कि उसकी पत्नी और बच्चे के साथ कुछ अनहोनी हो गई है। घर में कलेश और ससुराल पक्ष से विवाद के चलते संदीप का शक यकीन में बदल गया कि उसकी पत्नी की हत्या कर दी गई है।
पति ने दर्ज कराई थी हत्या की एफआईआर
काफी समय तक पुलिस से मदद न मिलने पर संदीप ने न्याय के लिए कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। कोर्ट के आदेश पर प्रियंका के माता-पिता और रिश्तेदारों के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज किया गया। पुलिस फाइल में प्रियंका को 'मृत' मानकर जाँच की जा रही थी, जबकि असल में कहानी कुछ और ही मोड़ ले चुकी थी।
सरयू के किनारे से राजस्थान तक का सफर
हकीकत यह थी कि प्रियंका घर से झगड़कर खुदकुशी करने अयोध्या गई थी। वहाँ सरयू नदी के तट पर राजस्थान से आए मंगलचंद्र नामक व्यक्ति ने उसकी जान बचाई। इसके बाद प्रियंका अपनी पुरानी जिंदगी छोड़कर मंगलचंद्र के साथ राजस्थान चली गई और वहाँ लिव-इन रिलेशनशिप में रहने लगी। संदीप और उसका परिवार दो साल तक जिसे मरा हुआ समझ रहे थे, वह दूसरे राज्य में नई पहचान के साथ रह रही थी।
एक 'ओटीपी' ने खोल दी सारी पोल
प्रियंका की यह नई जिंदगी तब तक सुरक्षित रही जब तक उसने अपनी पहचान बदलने की कोशिश नहीं की। राजस्थान में आधार केंद्र पर अपना पता अपडेट कराते समय जैसे ही उसने पुराना आधार नंबर डाला, लिंक मोबाइल नंबर पर एक OTP चला गया। वह नंबर संदीप के पास था। ओटीपी आते ही संदीप को समझ आ गया कि प्रियंका जिंदा है और उसने तुरंत पुलिस को इसकी सूचना दी।
थाने में हाई वोल्टेज ड्रामा और कानूनी मोड़
पुलिस ने लोकेशन ट्रेस कर प्रियंका को राजस्थान से बरामद किया। जब उसे बस्ती लाया गया, तो संदीप ने अपनी पत्नी को अपनाने से इनकार कर दिया और केवल बेटे की कस्टडी मांगी। हालांकि, बेटे ने अपने पिता को पहचानने तक से मना कर दिया। अब पुलिस इस मामले में 'क्लोजर रिपोर्ट' लगा रही है और बच्चे की कस्टडी को लेकर कानूनी प्रक्रिया जारी है।