High Court: विवाहित व्यक्ति का शादी का वादा धोखा, हाईकोर्ट ने आरोपी को राहत देने से किया इनकार

High Court: महिलाओं के साथ कथित तौर पर शादी का झूठा वादा कर शारीरिक संबंध बनाने के मामलों में हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण कानूनी व्याख्या प्रस्तुत की है।

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विवाहित व्यक्ति का शादी का वादा धोखा- फोटो : social Media

High Court: महिलाओं के साथ कथित तौर पर शादी का झूठा वादा कर शारीरिक संबंध बनाने के मामलों में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने दो अलग-अलग आदेशों के जरिए महत्वपूर्ण कानूनी व्याख्या प्रस्तुत की है। न्यायमूर्ति अवनीश सक्सेना की एकलपीठ ने एक मामले में आरोपी के विरुद्ध चल रही आपराधिक कार्यवाही व चार्जशीट को निरस्त करने से इंकार कर दिया, जबकि दूसरे प्रकरण में आपराधिक मुकदमे को विधिक प्रक्रिया का दुरुपयोग मानते हुए रद्द कर दिया।

पहले मामले में याची विपिन कुमार व अन्य के विरुद्ध सहारनपुर जनपद के देवबंद स्थित अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट न्यायालय में विचाराधीन आपराधिक वाद को समाप्त करने की मांग की गई थी। अभियोजन के अनुसार पीड़िता ने आरोप लगाया कि वर्ष 2018 में सोशल मीडिया के माध्यम से संपर्क स्थापित कर आरोपी ने विवाह का आश्वासन दिया और लगातार शारीरिक संबंध स्थापित किए। आरोप है कि पीड़िता पांच बार गर्भवती हुई, जिनमें चार बार गर्भपात कराया गया। साथ ही आपत्तिजनक चित्रों व वीडियो के माध्यम से ब्लैकमेलिंग का भी आरोप है।

न्यायालय ने कहा कि यदि प्रथमदृष्टया यह स्थापित हो कि आरोपी पूर्व से विवाहित था, तो विवाह का वादा आरंभ से ही कपटपूर्ण  माना जा सकता है। अतः इस स्तर पर आपराधिक कार्यवाही में हस्तक्षेप उचित नहीं होगा।

वहीं दूसरे प्रकरण में बस्ती जनपद के एक आरोपी की याचिका स्वीकार करते हुए न्यायालय ने कहा कि दो बालिग, शिक्षित व्यक्तियों के मध्य दीर्घकालिक सहमति से स्थापित संबंध मात्र विवाह न होने के कारण दंडनीय अपराध की श्रेणी में स्वतः नहीं आता। न्यायालय ने सुप्रीम कोर्ट के प्रतिपादित सिद्धांतों का हवाला देते हुए कहा कि लंबे समय तक चले संबंधों में सहमति की अवधारणा  प्रभावी मानी जाएगी।

इन दोनों आदेशों ने स्पष्ट कर दिया है कि प्रत्येक प्रकरण के तथ्य व परिस्थितियां भिन्न होती हैं। जहां कपटपूर्ण मंशा सिद्ध होगी, वहां विधि कठोर रुख अपनाएगी; किन्तु सहमति आधारित संबंधों को आपराधिक रंग देना न्यायिक प्रक्रिया का दुरुपयोग माना जाएगा।